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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 03:23 PM
भारत ने ओडिशा तट पर स्वदेशी रूप से विकसित प्राले मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने ओडिशा तट पर स्वदेशी रूप से विकसित प्राले मिसाइल का सफल परीक्षण किया

DRDO successfully conducted the flight test of the indigenously developed Pralay Missile off the coast of Odisha today at 1110 hrs. The test was conducted as part of user evaluation trials and successfully met all the stipulated objectives, as validated by data captured through various range instruments. This successful trial marks another significant milestone in strengthening India’s indigenous defence capabilities.
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ABP News✓
Nov 5, 2026, 02:35 PM
फोन चोरी को रोकनाः आपके उपकरण को सुरक्षित रखने के लिए एक सरल सेटिंग

फोन चोरी को रोकनाः आपके उपकरण को सुरक्षित रखने के लिए एक सरल सेटिंग

आजकल फोन हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है. इसमें कॉन्टैक्ट्स, फोटोज, बैंकिंग ऐप्स, यूपीआई और पर्सनल डेटा हर चीज होती है. ऐसे में अगर फोन कहीं गिर जाए या भीड़भाड़ में चोरी हो जाए तो इंसान के हाथ-पांव फूल जाते हैं. अक्सर जब कोई चोर फोन चुराता है तो वह सबसे पहला काम फोन को स्विच ऑफ करने का करता है. एक बार फोन बंद हो गया तो न उस पर घंटी बजती है और न ही उसकी लाइव लोकेशन ट्रैक हो पाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके ही फोन के अंदर एक ऐसी सेटिंग मौजूद है जिसे ऑन करने के बाद कोई भी चोर आपके फोन को स्विच ऑफ नहीं कर पाएगा? जी हां जब तक फोन अनलॉक नहीं होगा तब तक वह बंद भी नहीं होगा. चलिए आपको बताते हैं कि अपने फोन को चोरों से सेफ रखने के लिए आपको कौन सी सेटिंग ऑन करनी चाहिए. आमतौर पर हमारे फोन में एक बड़ी कमी होती है कि स्क्रीन लॉक होने के बावजूद कोई भी पावर बटन दबाकर फोन को आसानी से स्विच ऑफ या रीस्टार्ट कर सकता है. इसी कमजोरी का फायदा चोर उठाते हैं और फोन हाथ लगते ही उसे तुरंत बंद कर देते हैं जिससे पुलिस या मालिक उसे ट्रैक न कर सके. लेकिन आजकल आने वाले लगभग सभी नए एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स और आईफोन में Require Password to Power Off का एक ऑप्शन दिया जाने लगा है. जब आप इस सेटिंग को एक्टिवेट कर देते हैं तो लॉक स्क्रीन पर पावर ऑफ का बटन दबाने पर फोन तुरंत पासवर्ड, पिन या फिंगरप्रिंट मांगने लगता है. अब जाहिर सी बात है कि चोर के पास आपका पासवर्ड या फिंगरप्रिंट तो होगा नहीं इसलिए वह चाहकर भी फोन को बंद नहीं कर पाएगा और आपका फोन लगातार ऑन रहेगा. अगर आप रियलमी, ओप्पो, वनप्लस या शाओमी जैसा कोई एंड्रॉइड फोन इस्तेमाल करते हैं. तो इस सेटिंग को चालू करना बेहद आसान है. इसके लिए सबसे पहले अपने फोन की मेन Settings में जाएं. वहां नीचे स्क्रॉल करके Password & Security या Privacy वाले ऑप्शन पर टैप करें. इसके अंदर आपको System Security का एक सेक्शन मिलेगा जिस पर क्लिक करने के बाद आपको Require Password to Power Off का ऑप्शन दिख जाएगा. बस इसके सामने बने टॉगल बटन को ऑन कर दें और अपना स्क्रीन लॉक पासवर्ड डालकर इसे कन्फर्म कर दें. वहीं अगर आपके पास सैमसंग का फोन है तो सेटिंग्स में जाकर Lock Screen ऑप्शन में जाएं और वहां Secure Lock Setting पर क्लिक करें. यहां आपको Lock Network And Security का बटन मिलेगा. जिसे ऑन करते ही आपका फोन बिना पासवर्ड के कभी स्विच ऑफ नहीं होगा. सिर्फ पावर ऑफ पर पासवर्ड लगाना ही काफी नहीं है, आपको एक और काम करना जरूरी है. मान लीजिए चोर ने फोन स्विच ऑफ करने की कोशिश की और पासवर्ड की वजह से वह फेल हो गया. ऐसे में चोर दूसरा रास्ता अपनाते हैं वे लॉक स्क्रीन पर ऊपर से स्वाइप करके नोटिफिकेशन पैनल खींचते हैं और वहां से मोबाइल डेटा, लोकेशन या एयरप्लेन मोड ऑन कर देते हैं. जैसे ही फोन फ्लाइट मोड पर जाता है उसका इंटरनेट कट जाता है और लोकेशन मिलनी बंद हो जाती है. इससे बचने के लिए अपने फोन की सेटिंग्स में Notification and Status Bar या Lock Screem सेटिंग्स में जाएं. वहां Swipe down on the lock screen to view the notification drawer' वाले ऑप्शन को तुरंत बंद कर दें. इसके बाद जब तक फोन अनलॉक नहीं होगा तब तक ऊपर से कोई भी सेटिंग नीचे नहीं खुलेगी. नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है. न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है.
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 08:00 AM
बी. एस. एन. एल. दिवाली के लिए एकल रिचार्ज पर 395 दिनों की वैधता प्रदान करता है

बी. एस. एन. एल. दिवाली के लिए एकल रिचार्ज पर 395 दिनों की वैधता प्रदान करता है

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल दिवाली के मौके पर अपने करोड़ों ग्राहकों के लिए जबरदस्त ऑफर लेकर आई है। जी हां, इस ऑफर के तहत यूजर्स को एक बार रिचार्ज कराने पर पूरे 395 दिनों की वैलिडिटी मिलने वाली है। दरअसल कंपनी अपने 365 दिन वाले प्लान में अब एक्स्ट्रा वैलिडिटी ऑफर कर रही है। खास बात ये है कि इस दौरान ग्राहकों को डेली 3GB हाई-स्पीड डेटा भी मिलने वाला है। प्लान में अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और 100 SMS की सुविधा भी मिल रही है। BSNL के दिवाली से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऑफर की घोषणा की है जिसमें 2,799 रुपये की कीमत वाले मौजूदा प्लान में अब ज्यादा वैलिडिटी मिल रही है। इस प्लान में ग्राहकों को टोटल 395 दिनों की सर्विस वैलिडिटी मिल रही है। इसका मतलब है कि यूजर्स को बार-बार मोबाइल रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लंबी वैलिडिटी के चलते ये प्लान उन ग्राहकों के लिए हेल्पफुल हो सकता है, जो सालभर के लिए एक साथ रिचार्ज करवाने की सोच रहे हैं। 365 + 30 DAYS EXTRA with BSNL! Recharge at ₹2,799 and enjoy 395 days of validity, 3GB data/day, unlimited calls & 100 SMS/day. Offer valid till 30 Nov 2026. Recharge now! #BSNLIndia #Extra30Days #395DaysValidity #RechargeNow #BSNLSelfcareApp #DigitalIndia #SmartConnectivity #SwitchToBSNL @CMDBSNL @robertravi21 प्लान में मिलने वाले डेटा बेनिफिट्स की बात करें तो इसमें हर दिन 3GB हाई-स्पीड डेटा भी मिल रहा है। इस तरह ग्राहक इंटरनेट ब्राउजिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया का यूज कर सकते हैं। हालांकि डेली मिलने वाली डेटा लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट की स्पीड कम हो जाएगी। प्लान में न सिर्फ डेटा बेनिफिट मिल रहा है बल्कि इसमें देशभर के नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा भी मिल रही है। इसके साथ ही ग्राहकों को डेली 100 SMS भेजने की सुविधा भी मिल रही है। इस तरह प्लान में कॉलिंग, मैसेजिंग और इंटरनेट तीनों सुविधाएं मिल रही हैं जो इसे और भी खास बना रहा है। हालांकि बीएसएनएल का ये खास दिवाली ऑफर लिमिटेड टाइम के लिए पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक 30 नवंबर 2026 तक इस ऑफर का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे में जो भी लोग लंबी वैलिडिटी वाला प्लान ढूंढ रहे हैं, उनके लिए ये एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। Jio का नया प्लान: सिर्फ 15 रुपये में मिलेगा अनलिमिटेड 5G डेटा, एक्स्ट्रा 200MB भी
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Aaj Tak
Nov 5, 2026, 07:55 AM
नासा का स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप 22 साल के मिशन के बाद पृथ्वी पर लौटा

नासा का स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप 22 साल के मिशन के बाद पृथ्वी पर लौटा

नासा का प्रसिद्ध स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप आखिरकार पृथ्वी पर वापस आ गया है. 4 नवंबर 2026 को सुबह 7:39 बजे पूर्वी समय के अनुसार यह उत्तरी सुमात्रा के ऊपर वायुमंडल में प्रवेश कर गया. लगभग 1450 किलोग्राम वजन वाले इस मिनीबस आकार के ऑब्जरवेटरी ने 22 साल तक ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन किया. बचाव का प्रयास विफल होने के बाद इसका अनियंत्रित पतन तय हो गया था. नासा के अनुसार इसका ज्यादातर हिस्सा जल गया और किसी को नुकसान पहुंचने की संभावना केवल 1 में 2100 थी. स्विफ्ट को नवंबर 2004 में लॉन्च किया गया था. इसका मूल मिशन सिर्फ दो साल का था जिसमें गामा-रे बर्स्ट यानी ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन करना था. यह ऑब्जरवेटरी इतनी फुर्तीली थी कि बर्स्ट का पता लगाते ही एक मिनट के अंदर अपनी दूरबीनों को उस दिशा में घुमा लेती थी. इसी वजह से इसका नाम स्विफ्ट पड़ा जो अंग्रेजी में तेज पक्षी को कहते हैं. 2018 में इसे इसके पहले प्रमुख वैज्ञानिक नील गेहरल्स के नाम पर नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी कर दिया गया. दो साल के मिशन के बावजूद स्विफ्ट ने दो दशक से ज्यादा काम किया. इसने 2000 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट और 1400 से अधिक सुपरनोवा विस्फोटों का अध्ययन किया. सुदूर ब्लैक होल, क्षुद्रग्रह और धूमकेतु जैसी कई अन्य चीजों पर भी इसने महत्वपूर्ण आंकड़े दिए. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसने तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली टिप्पणियों का महत्व साबित किया और खगोल भौतिकी में क्रांति लाई. Video clips from Indonesia probably showing the fiery demise of Swift: https://t.co/X5kJ0DyGfi and https://t.co/XsP67opr0B -> https://t.co/xSfXCAubIV स्विफ्ट के पास अपना थ्रस्टर नहीं था इसलिए वायुमंडलीय घर्षण के कारण यह धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर गिर रहा था. ऊंचाई कम होने के साथ यह प्रक्रिया तेज हो गई. सितंबर 2025 में नासा ने एरिजोना की कंपनी काटालिस्ट स्पेस को 30 मिलियन डॉलर का अनुबंध दिया. कंपनी का लिंक नामक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट जुलाई में लॉन्च हुआ और अगस्त में स्विफ्ट को पकड़कर ऊंची कक्षा में ले जाने वाला था. लेकिन प्रोपल्शन सिस्टम और रिएक्शन व्हील्स में खराबी आ गई. लिंक खुद 25 सितंबर को पृथ्वी पर गिर गया. नासा ने इसे उच्च जोखिम वाला लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास बताया. इससे उपग्रह सर्विसिंग तकनीक आगे बढ़ी और भविष्य में अन्य उपग्रहों को बचाने के सबक मिले. स्विफ्ट ने अपना आखिरी वैज्ञानिक अवलोकन 20 अक्टूबर को पूरा किया था. स्विफ्ट का गिरना असामान्य नहीं है. हर दिन औसतन तीन बड़े अंतरिक्ष मलबे पृथ्वी पर गिरते हैं. भविष्य में सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ने से यह समस्या और बढ़ेगी. स्विफ्ट ने साबित किया कि अच्छे डिजाइन वाले मिशन अपनी निर्धारित अवधि से बहुत आगे जा सकते हैं. इसका योगदान लंबे समय तक वैज्ञानिकों को नई खोजों में मदद करेगा. यह घटना अंतरिक्ष कचरे के प्रबंधन और उपग्रहों को लंबी उम्र देने वाली तकनीकों की जरूरत को रेखांकित करती है.
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 06:30 AM
दिवाली से पहले वीवो टी5 प्रो 5जी स्मार्टफोन पर 26 प्रतिशत की छूट दे रहा है।

दिवाली से पहले वीवो टी5 प्रो 5जी स्मार्टफोन पर 26 प्रतिशत की छूट दे रहा है।

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी फेस्टिव सीजन में नया 5G स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं? अगर हां तो आपके लिए Flipkart शानदार डील लेकर आया है। जी हां, दिवाली से पहले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Vivo के दमदार 5G स्मार्टफोन Vivo T5 Pro 5G पर डिस्काउंट दे रहा है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9020mAh की बड़ी बैटरी है। इतना ही नहीं इस फोन में स्नैपड्रैगन प्रोसेसर और 90W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी मिल रहा है। ऐसे में बड़ी बैटरी, दमदार परफॉर्मेंस और फास्ट चार्जिंग वाला फोन ढूंढ रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। Flipkart पर Vivo T5 Pro 5G को दिवाली से पहले शानदार डिस्काउंट के साथ लिस्ट किया गया है। फोन का 128GB + 6GB RAM वेरिएंट 49,999 रुपये की जगह सिर्फ 36,999 रुपये में मिल रहा है। इसका मतलब है कि फोन पर सीधे 26% यानी 13,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। फोन पर खास बैंक ऑफर्स भी मिल रहे हैं जिससे आप डिवाइस को और कम कीमत पर खरीद सकते हैं। Flipkart Axis Bank क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 5,650 रुपये तक की एक्स्ट्रा छूट मिल रही है। इसके बाद फोन की प्रभावी कीमत घटकर 31,349 रुपये रह जाएगी। जबकि SBI और HDFC क्रेडिट कार्ड पर 4,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा रहा है। Axis Bank क्रेडिट कार्ड पर भी 4,000 रुपये की छूट मिल रही है। अन्य ऑफर्स की बात करें तो एक्सचेंज ऑफर में पुराने फोन को एक्सचेंज करने पर 32,400 रुपये तक की छूट और नो-कॉस्ट EMI में 5,500 रुपये की 6 महीने की EMI पर भी फोन खरीदने का ऑप्शन है, जिसमेंकुल भुगतान 32,999 रुपये होगा। वीवो के इस बड़ी बैटरी वाले फोन में 6.83 इंच की 1.5K AMOLED डिस्प्ले मिल रही है। साथ ही फोन में 144Hz तक का रिफ्रेश रेट और 5,000 निट्स तक पीक ब्राइटनेस मिल रही है। परफॉर्मेंस के लिए डिवाइस में स्नैपड्रैगन 7s Gen 4 प्रोसेसर मिल रहा है। डिवाइस में 12GB तक LPDDR4X RAM के ऑप्शन हैं। कैमरा की बात करें तो फोन में 50MP Sony IMX882 प्राइमरी कैमरा दिया गया है। साथ ही इसमें OIS और EIS सपोर्ट भी है। जबकि सामने की तरफ सेल्फी के लिए इसमें 32MP फ्रंट कैमरा मिल रहा है। डिवाइस में 9,020mAh बैटरी, 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिल रहा है। दिवाली सेल में Motorola के 5G फोन पर डिस्काउंट, 50MP सेल्फी कैमरा और 6500 mAh बैटरी भी
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 06:11 AM
वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म कण संरचना और जैविक गतिविधि का विश्लेषण किया

वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म कण संरचना और जैविक गतिविधि का विश्लेषण किया

शोधकर्ताओं ने तैयार नैनोकणों की संरचना, आकार और रासायनिक विशेषताओं का विश्लेषण करने के लिए कई आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। इनमें यूवी-विजिबल, एक्सआरडी, एसईएम-ईडीएस, टीईएम और एफटी-आईआर जैसी तकनीकें शामिल रहीं। एक्सरे विवर्तन (एक्सआरडी) विश्लेषण में नैनोकणों की षट्कोणीय वर्टजाइट संरचना सामने आई। इनके क्रिस्टलाइट का आकार लगभग 28.4 नैनोमीटर पाया गया। इसके अलावा आरएसएम अनुकूलन और आणविक डॉकिंग के माध्यम से नैनोकणों की जैविक सक्रियता और संभावित क्रियाविधि को समझने का प्रयास किया गया। इस शोध का नेतृत्व बेरीनाग पीजी कॉलेज के डॉ. महेश चंद्र विश्वकर्मा, एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के डॉ. बालम सिंह बिष्ट और पंतनगर विश्वविद्यालय के डॉ. रविंद्र कुमार ने किया। शोध दल में शोध छात्र मनोज प्रसाद टम्टा और पूजा बर्गली के साथ हेमंत कुमार जोशी, दीपशिखा आर्य, राजेश कुमार और विशाल कुमार सहित अन्य शोधकर्ता शामिल रहे। नन्ही परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान रानीखेत और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के शोधकर्ताओं ने भी इसमें योगदान दिया। इस शोध की खासियत यह है कि इसमें उत्तराखंड की स्थानीय जैव-विविधता का उपयोग आधुनिक नैनो प्रौद्योगिकी के साथ किया गया है। वनस्पति आधारित हरित संश्लेषण के जरिये तैयार किए गए जिंक ऑक्साइड नैनोकण भविष्य में कृषि क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण के विकल्प विकसित करने में मददगार हो सकते हैं। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 05:28 AM
पुरुषों में अवरोधक एजोस्पर्मिया का इलाजः प्रजनन क्षमता के लिए एक नई आशा

पुरुषों में अवरोधक एजोस्पर्मिया का इलाजः प्रजनन क्षमता के लिए एक नई आशा

ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया पुरुषों में होने वाली ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें अंडकोष में शुक्राणुओं का निर्माण तो होता है, लेकिन प्रजनन मार्ग में किसी रुकावट के कारण वे वीर्य तक नहीं पहुंच पाते। चिकित्सकों के अनुसार, कई पुरुषों में यह समस्या जन्मजात भी होती है। ऐसे मामलों में सामान्य तरीके से शुक्राणु प्राप्त करना संभव नहीं हो पाता। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से अब इसका उपचार संभव है। सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल प्रक्रिया के तहत शल्य चिकित्सा के जरिए पुरुष के प्रजनन मार्ग से सीधे शुक्राणु प्राप्त किए जाते हैं। इस उपचार में सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल के साथ आईवीएफ और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। आईसीएसआई प्रक्रिया में प्राप्त किए गए शुक्राणुओं में से एक शुक्राणु को सीधे महिला के अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। इसके बाद प्रयोगशाला में विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए गर्भधारण संभव हो पाता है और दंपती को संतान सुख मिल सकता है। चिकित्सकों ने बताया कि बांझपन की समस्या केवल महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी हो सकती है। कई मामलों में यह समस्या दोनों में भी मौजूद होती है। ऐसे में सही कारण का पता लगाने और प्रभावी उपचार के लिए पति-पत्नी दोनों की समय पर संपूर्ण चिकित्सकीय जांच जरूरी है। रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के क्षेत्र में लगातार हो रही प्रगति से अब बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए कई नए उपचार विकल्प उपलब्ध हुए हैं। इनकी मदद से अपने ही शुक्राणु और अंडाणु के जरिए संतान प्राप्ति की संभावना बन रही है। एम्स जोधपुर के सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) केंद्र में पिछले दो वर्षों से सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और इससे जुड़े प्रजनन उपचार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। संस्थान में पहली बार इस तकनीक की मदद से सफल प्रसव होना चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे उन दंपतियों को भी उपचार की नई उम्मीद मिलेगी, जिनके लिए शुक्राणुओं की कमी या प्रजनन मार्ग में रुकावट के कारण प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्त करना मुश्किल होता है। इस जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया को सफल बनाने में एम्स जोधपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंह के मार्गदर्शन में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में आईवीएफ विशेषज्ञ एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनु गोयल, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक भिरुड और भ्रूणविज्ञानी डॉ. गिरीश शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों के साझा प्रयास, गहन चिकित्सकीय निगरानी और आधुनिक तकनीकों के सटीक इस्तेमाल से यह सफलता मिली। एम्स जोधपुर के इतिहास में पहली बार इस तरह की प्रक्रिया के जरिए सफल प्रसव होना संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
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Amar Ujala
Nov 5, 2026, 05:25 AM
हरिपर्वत में प्रदर्शनी में छात्रों की प्रतिभाओं के प्रदर्शन के रूप में नवीन परियोजनाओं का प्रदर्शन

हरिपर्वत में प्रदर्शनी में छात्रों की प्रतिभाओं के प्रदर्शन के रूप में नवीन परियोजनाओं का प्रदर्शन

बुधवार को एमडी जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत में आयोजित प्रदर्शनी में 67 विद्यालयों के 214 विद्यार्थियों ने मॉडल प्रस्तुत किए। इनमें स्मार्ट सिटी, चंद्रयान-3, ऑटोमेटिक ब्रिज, ब्लाइंड स्टिक, रोड सेफ्टी और कचरा प्रबंधन के मॉडल भी आकर्षण का केंद्र रहे। जिला विज्ञान क्लब की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ जिलाधिकारी मनीष बंसल ने किया।विज्ञापनप्रदर्शनी में एमडी जैन इंटर कॉलेज के कक्षा 12 के छात्र आकाश चौरसिया ने वज्र-एक्स 3000 मॉडल बनाया। आकाश ने बताया कि खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए आकाशीय बिजली गंभीर खतरा है। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने यह टोपी तैयार किया है। इसमें तीन लेयर वाला इंसुलेटर लगाया गया है। पहली लेयर लेदर, दूसरी फोम और तीसरी एडवांस्ड लेदर की बनाई गई है। इसके साथ एल्युमिनियम फॉयल का भी इस्तेमाल किया गया है। उनका उद्देश्य इन परतों के माध्यम से बिजली गिरने के प्रभाव को कम करने वाली तकनीक विकसित करना है।विज्ञापनगोपीचंद शिवहरे सनातन धर्म कॉलेज की कक्षा 11 की छात्रा दिव्यांशी ने स्पेस स्टैबलिस क्लीनर सैटेलाइट का मॉडल प्रस्तुत किया। दिव्यांशी ने बताया कि अंतरिक्ष में विभिन्न प्रयोगों और उपग्रहों के संचालन के कारण स्पेस डेब्रिस यानी अंतरिक्ष में कचरे की समस्या बढ़ रही है। इससे उपग्रहों के संचालन में बाधा आ सकती है। इसके समाधान के लिए उन्होंने चुंबक आधारित तकनीक का मॉडल बनाया है। इसमें अंतरिक्ष में मौजूद धातु के टुकड़ों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे को चुंबकीय आकर्षण से एकत्र करने की परिकल्पना की गई है।जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक डॉ. निखिल जैन ने बताया कि प्रतियोगिता में आकाश चौरसिया ने पहला, सेंट जोसेफ गर्ल्स इंटर कॉलेज की बुलबुल और अनुष्का ने दूसरा और गणेशराम नागर सरस्वती बालिका विद्या मंदिर की साक्षी शर्मा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शाहगंज की कनिष्का और डीएवी इंटर कॉलेज की रानी व तनिष्का को संयुक्त रूप से सांत्वना पुरस्कार मिला। 10 अन्य मॉडल भी मंडल स्तर के लिए चुने गए। निर्णायक मंडल में डॉ. रामनाथ गौतम, डॉ. प्रभात किरण वार्ष्णेय, डॉ. रामवीर सिंह चौहान, डॉ. सुनील कुमार पाठक और डॉ. राखी गुप्ता शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीनेश मित्तल ने किया। प्रधानाचार्य डॉ. संजय गर्ग सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 04:30 AM
जियो ने प्रीपेड उपयोगकर्ताओं के लिए ₹15 का अनलिमिटेड 5जी डेटा पैक पेश किया

जियो ने प्रीपेड उपयोगकर्ताओं के लिए ₹15 का अनलिमिटेड 5जी डेटा पैक पेश किया

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप भी जियो का सिम कार्ड इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। Reliance Jio ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया सस्ता ऐड-ऑन डेटा पैक पेश किया है। जी हां, कंपनी का ये पैक सिर्फ 15 रुपये आता है, जिसमें यूजर्स को 24 घंटे के लिए अनलिमिटेड 5G डेटा दिया जा रहा है। ये प्लान 5 नवंबर यानी आज से एलिजिबल प्रीपेड यूजर्स के लिए उपलब्ध है। खास बात ये है कि इस पैक के लिए यूजर्स को लंबी वैलिडिटी वाले महंगे डेटा बूस्टर रिचार्ज प्लान लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर किसी यूजर को एक दिन के लिए ज्यादा इंटरनेट की जरूरत है, तो ऐसे में ये पैक काफी ज्यादा काम आ सकता है। साथ ही इसमें एक्स्ट्रा 200MB 4G डेटा भी मिल रहा है। चलिए इस प्लान के बारे में जानते हैं... Jio के इस खास 15 रुपये वाले डेटा बूस्टर प्लान को अपनी वेबसाइट पर 'Data Packs' वाले सेक्शन में ऐड किया है। प्लान की वैलिडिटी 24 घंटे की है। इसमें कंपनी के Standalone (SA) 5G नेटवर्क का यूज करने की सुविधा मिलने वाली है। यूजर्स हाई-स्पीड इंटरनेट के जरिए 4K वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और बड़ी फाइल डाउनलोड करने जैसे काम आसानी से कर पाएंगे। इसके अलावा यूजर्स इसके जरिए क्लाउड बैकअप, सॉफ्टवेयर अपडेट और बड़ी मीडिया फाइल ट्रांसफर करने में भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का लाभ ले सकेंगे। इतना ही नहीं इस पैक के जरिए यूजर्स मोबाइल हॉटस्पॉट की मदद से लैपटॉप और टैबलेट जैसे दूसरे डिवाइस में भी इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे। ऐसे में जिन यूजर्स को ऑफिस के काम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अचानक ज्यादा डेटा यूज करने की जरूरत पड़ती जाती है, उनके लिए ये पैक हेल्पफुल हो सकता है। Jio का ये 15 रुपये वाला नया पैक MyJio एप, कंपनी की वेबसाइट और ऑथॉरिजेड थर्ड पार्टी रिचार्ज प्लेटफॉर्म पर 5 नवंबर से उपलब्ध हो गया है। हालांकि अनलिमिटेड 5G डेटा का लाभ लेने के लिए आपके पास 5G सपोर्ट वाला फोन होना जरूरी है। इसके साथ ही यूजर Jio True 5G नेटवर्क कवरेज वाले एरिया में होना चाहिए और उसके नंबर पर एक एक्टिव बेस प्रीपेड प्लान भी होना जरूरी है। Jio का 84 दिन वाला प्लान: डेली 2GB हाई-स्पीड डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ JioHotstar भी
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Dainik Jagran
Nov 5, 2026, 03:02 AM
सी. एफ. मोटो ने ट्विन-सिलेंडर इंजन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ नए स्कूटर का अनावरण किया

सी. एफ. मोटो ने ट्विन-सिलेंडर इंजन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ नए स्कूटर का अनावरण किया

CF Moto ने ग्लोबल मार्केट में एक नया 124.9cc अर्बन स्कूटर पेश करने के साथ-साथ नए 550 प्लैटफॉर्म को भी पेश किया है। इस नए 550 प्लैटफॉर्म को एक नए ट्विन-सिलिंडर इंजन, एल्युमिनियम फ्रेम, इलेक्ट्रॉनिक क्लच और एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सूट के साथ तैयार किया गया है। इसे अलग-अलग सेगमेंट में ब्रांड की आने वाली बाइक्स को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस नए स्कूटर में कंपनी की SR लाइन-अप से इंस्पायर्ड होकर अलग दिखने वाले ट्विन-लेंस LED हेडलाइट्स और शार्प बॉडीवर्क के साथ एक कॉम्पैक्ट डिजाइन दिया गया है। यह एक नए 124.9cc लिक्विड-कूल्ड सिंगल सिलिंडर इंजन से पावर लेता है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर परफॉर्मेंस के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं लेकिन ऐसी उम्मीद है कि 125SC-F के 12.78hp की पावर और 12nm के टॉर्क से मिलता-जुलता हो सकता है। फीचर्स की बात करें को इस स्कूटर के इलेक्ट्रॉनिक सूट में डुअल-चैनल ABS, ट्रैक्शन कंट्रोल, ब्लूटूथ/NFC कीलेस इग्निशन और OTA अपडेट शामिल है। इसके अलावा इसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी से लैस 6.2 इंच की TFT डिस्प्ले दी गई है। नई CFMoto 550MT में 526cc का लिक्लिड-कूल्ड पैरेलल-ट्विन इंजन दिया गया है जो 54hp की पावर और 52nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस बाइक में बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर, ई-क्लच, तीन राइडिंग मोड्स, IMU-बेस्ड कॉर्नरिंग ABS और ट्रैक्शन कंट्रोल, रियर रडार सिस्टम और क्रूज कंट्रोल शामिल हैं। इसमें एप्पल कारप्ले के साथ 8-इंच की TFT डिस्प्ले दी गई है और 23 लीटर का बड़ा फ्यूल टैंक मिलता है। CFMoto 550MT में स्प्लिट सीट मिलता है जिसकी सीट हाईट 800 से 820mm के बीच एडजस्ट किया जा सकता है। इसका रोड-ओरिएंटेड चेसिस KYB सस्पेंशन के साथ 19-इंच के फ्रंट और 17-इंच के रियर व्हील्स को आपस में जोड़ता है। CFMoto 550MT-X में भी 526cc का पैरेलल ट्विन लिक्विड-कूल्ड इंजन दिया गया है। इसें 550MT की तुलना में एक स्लिम प्रोफाइल और 21-इंच का फ्रंट व्हील दिया गया है। इसके ऑफ-रोड फोकस्ड चेसिस में 21-इंच के फ्रंट और 18-इंच के रियर व्हील्स, एडजस्टेबल KYB सस्पेंशन और 250mm का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है। इसके अलावा CFMoto 550MT-X में वर्टिकली माउंटेड 6.2 इंच की TFT डिस्प्ले, बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर और राइड मोड्स मिलते हैं जिसमें ऑफ-रोड मोड ट्रैक्शन कंट्रोल और रियर व्हील ABS को डी-एक्टिवेट कर देता है। Hero ला रही है पहली इलेक्ट्रिक बाइक 'UBX 06', स्पोर्टी लुक और ABS के साथ मिल सकती है 150km की रेंज
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Nov 5, 2026, 02:50 AM
विदेश में उम्मीदवारों को रखने के लिए आई. टी. आई. संस्थानों को पुरस्कृत किया जाएगा

विदेश में उम्मीदवारों को रखने के लिए आई. टी. आई. संस्थानों को पुरस्कृत किया जाएगा

मिशन निदेशक ने कहा है कि यदि प्रशिक्षित अभ्यर्थी को तीन माह के अनिवार्य सेवायोजना के बाद विदेश में रोजगार मिला है और वो 40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन साल भर प्राप्त करता है तो संबंधित आईटीआई को सम्मानित भी किया जाएगा। मिशन की ओर से निजी आईटीआई को ट्रेनिंग पार्टनर बनाने के लिए जारी दिशा-निर्देश को जल्द से जल्द प्रभावी बनाने व रोजगार को बढ़ाने पर फोकस होकर काम करने को कहा है।
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Nov 4, 2026, 09:18 PM
पेक पहल आई. ओ. टी. कौशल वाले छात्रों को सशक्त बनाती है

पेक पहल आई. ओ. टी. कौशल वाले छात्रों को सशक्त बनाती है

विद्यार्थियों ने सीखा कि सेंसर को रास्पबेरी पाई से कैसे जोड़ा जाता है और उनसे मिलने वाले डेटा को कैसे इकट्ठा किया जाता है। इसके अलावा स्मार्ट होम, स्वास्थ्य सेवा, खेती, उद्योग और स्मार्ट सिटी में आईओटी के उपयोग की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को नई तकनीक को समझने और खुद प्रयोग करके सीखने का अवसर मिला। पेक की यह पहल विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान और रोजगार से जुड़े कौशल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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Nov 4, 2026, 09:02 PM
भारत को दीर्घायु विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव प्रौद्योगिकी में अग्रणी होना चाहिएः भाजपा विधायक

भारत को दीर्घायु विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव प्रौद्योगिकी में अग्रणी होना चाहिएः भाजपा विधायक

लखनऊ। सरोजनीनगर के भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा है कि भारत को दीर्घायु विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नेतृत्वकर्ता बनना चाहिए। उन्होंने युवाओं से इस क्षेत्र में ज्ञान, कौशल और नवाचार के लिए तैयार होने का आह्वान किया। सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष दीर्घायु बायोटेक कंपनियों ने 18.4 अरब डॉलर का निवेश जुटाया। यह राशि पिछले दस वर्षों के कुल निवेश से भी अधिक है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को अब केवल प्राकृतिक नियति नहीं माना जाता। इसे वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार से बेहतर बनाने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। कहा कि एआई, स्वास्थ्य सेवा और बायोलॉजी का संगम आने वाले दशकों की सबसे बड़ी औद्योगिक और आर्थिक क्रांतियों में से एक बन सकता है। एआई आधारित दवा अनुसंधान, बायोलॉजिकल एजिंग क्लॉक्स और एपिजेनेटिक रीप्रोग्रामिंग जैसी तकनीकें महत्वपूर्ण हैं। भारत को स्वास्थ्य तकनीक, एआई आधारित औषधि अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और निवारक स्वास्थ्य सेवा में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमरता नहीं, बल्कि हर नागरिक को स्वस्थ और सम्मानजनक दीर्घायु जीवन देना लक्ष्य होना चाहिए।
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Nov 4, 2026, 08:49 PM
कश्मीरी केसर की खेती को समृद्ध करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी

कश्मीरी केसर की खेती को समृद्ध करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी

श्रीनगर। दुनिया भर में अपनी खुशबू और रंग के लिए पहचान रखने वाले कश्मीरी केसर की खेती को समृद्ध करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। केसर की खेती के लिए मशहूर पांपोर में किसानों की श्रम संबंधी दिक्कतों और घटते उत्पादन के बीच शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट-के) ने आधुनिक केसरबॉट (एग्रीबॉट) का सफल परीक्षण किया है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सहयोग से विकसित इस रोबोटिक तकनीक से केसर के फूलों की कटाई से लेकर रेशे अलग करने तक का काम आसान होगा।केसर की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फूलों की सीमित अवधि में कटाई है। फूल खिलने के महज 15 दिनों के भीतर उनकी तुड़ाई करनी होती है। इस दौरान कुशल श्रमिकों की उपलब्धता बड़ी समस्या बन जाती है। प्रस्तावित रोबोटिक सिस्टम खरपतवार प्रबंधन, फूलों की पहचान और कटाई के साथ उनसे केसर के रेशे अलग करने जैसे काम भी कर सकेगा। इससे किसानों को हाथों से किए जाने वाले कठिन और समय लेने वाले कामों से राहत मिलेगी।विज्ञापनnघटते उत्पादन और रकबे ने बढ़ाई चिंता : सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कश्मीरी केसर उद्योग चुनौतियों का सामना कर रहा है। वर्ष 2021 में केसर का उत्पादन 17.33 मीट्रिक टन था, जो 2022 में घटकर 14.87 मीट्रिक टन रह गया। वर्ष 2023 में यह 14.94 मीट्रिक टन दर्ज किया गया। जलवायु परिवर्तन और लंबे समय तक सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण उत्पादन पर और असर पड़ने की आशंका है। वहीं, केसर की खेती का रकबा भी पहले के 5,700 हेक्टेयर से अधिक के स्तर से घटकर करीब 3,700 हेक्टेयर रह गया है।विज्ञापनn अखरोट और सेब की तुड़ाई में भी मिलेगी मदद : इस परियोजना के तहत अखरोट और सेब की सुरक्षित तुड़ाई तथा एआई आधारित इमेज प्रोसेसिंग से उनकी सटीक ग्रेडिंग पर भी काम किया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।
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Nov 4, 2026, 08:37 PM
सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय मेले में किसानों ने कृषि की आधुनिक तकनीकों को सीखा

सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय मेले में किसानों ने कृषि की आधुनिक तकनीकों को सीखा

संवाद न्यूज एजेंसीबिनौली। बिनौली क्षेत्र के किसानों ने मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने आधुनिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।सहायक विकास अधिकारी कृषि डॉ. प्रदीप सहरावत के नेतृत्व में किसानों का यह दल मेले में पहुंचा। किसानों ने वहां विभिन्न कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और नई तकनीकों के बारे में जानकारी ली। मेले में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों ने स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉलों पर उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक और आधुनिक कृषि यंत्र प्रदर्शित किए गए। नवीन कृषि तकनीकों की भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को रबी फसलों की बोआई के तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने उन्नत प्रजातियों के चयन, बीज उपचार और संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर भी विस्तार से बताया।
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Nov 4, 2026, 08:30 PM
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में समुद्री क्षेत्र महत्वपूर्णः एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में समुद्री क्षेत्र महत्वपूर्णः एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने बुधवार को कहा कि आज की दुनिया तेज प्रतिस्पर्धा और खींचतान, बदलते शक्ति-समीकरणों, बड़े तकनीकी बदलावों और परस्पर प्रतिस्पर्धी रणनीतिक हितों के दौर से गुजर रही है। समुद्री क्षेत्र इन घटनाक्रमों से अछूता नहीं है, बल्कि इनके केंद्र में है। दिल्ली में आयोजित हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) में उन्होंने समुद्र में सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों की सामूहिक समझ बढ़ाने और क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की भी पैरवी की। नौसेना प्रमुख ने कहा कि नवंबर 2019 में बैंकाक में 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआइ) शुरू की थी। इसने सात स्तंभों के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग का एक ढांचा दिया। आईपीआरडी 2026 का विषय-विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग सीधे तौर पर इन्हीं स्तंभों में से एक से जुड़ा है।” उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत शब्द के रणनीतिक शब्दावली में शामिल होने से बहुत पहले ही प्रकृति ने दोनों महासागरों को पूरी तरह सामंजस्य के साथ जोड़ दिया था-सतह के नीचे जलधाराओं के जरिये और सतह के ऊपर जलवायु के माध्यम से। इंडोनेशियाई द्वीपसमूह से होकर समुद्री धाराएं हर सेकंड प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में करीब 1.5 करोड़ घन मीटर पानी ले जाती हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईपीआरडी 2026 के एक सत्र में हिस्सा लिया। नौसेना प्रमुख ने कहा कि साझा हितों को सकारात्मक और व्यावहारिक नतीजों में बदलने तथा दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने की जरूरत है। आईपीआरडी 2026 इसमें छोटी, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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Nov 4, 2026, 08:29 PM
उत्तर प्रदेश के किसानों से आय बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने का आग्रह किया गया

उत्तर प्रदेश के किसानों से आय बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने का आग्रह किया गया

कृषि विभाग की ओर से ब्लॉक परिसर में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विनय कुमार राय उर्फ बंटी शामिल हुए। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने, उन्नत बीजों का प्रयोग करने और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस दौरान कृषि विभाग के एडीओ रमेश यादव ने किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक अंगद प्रसाद, अवधेश राय, डॉ. आकांक्षा, रमेश यादव, आलोक यादव और प्रहलाद दास आदि मौजूद रहे।
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Nov 4, 2026, 07:17 PM
दो दिन बंद रहने के बाद मंडी परीक्षण केंद्र फिर से खुला, रोगियों को मिली राहत

दो दिन बंद रहने के बाद मंडी परीक्षण केंद्र फिर से खुला, रोगियों को मिली राहत

संवाद न्यूज एजेंसीमंडी। दो महीने से वेतन का इंतजार कर रहे क्रस्ना लैब कर्मचारियों को बकाया वेतन मिलने और कंपनी का टेंडर नवीनीकृत होने के बाद बुधवार को राज्यभर में चल रही दो दिवसीय हड़ताल समाप्त हो गई। इसके साथ ही क्षेत्रीय अस्पताल मंडी सहित प्रदेश के अन्य अस्पतालों में लैब जांच सेवाएं सुचारु हो गई हैं। दो दिन से जांच सुविधा बंद होने के कारण परेशान हो रहे मरीजों और उनके तीमारदारों ने सेवाएं बहाल होने पर राहत की सांस ली है। वहीं, बकाया वेतन मिलने से कर्मचारियों ने भी राहत महसूस की है।बॉक्सदोपहर 12:35 बजे, क्षेत्रीय अस्पताल मंडीहड़ताल के बाद बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी की क्रस्ना लैब में फिर मरीजों की आवाजाही बढ़ गई। सुबह से ही जांच करवाने के लिए मरीज अस्पताल पहुंचने लगे थे। दोपहर 12 : 35 बजे सरकारी सामान्य लैब का समय समाप्त होते ही क्रस्ना लैब के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। कोई हाथ में जांच की पर्ची लिए अपनी बारी का इंतजार करता नजर आया तो कोई सैंपल देने के लिए काउंटर पर पहुंचा। लैब में कर्मचारी मरीजों के सैंपल एकत्रित करने में जुटे रहे। जबकि तकनीशियन सैंपलों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने में व्यस्त दिखे।विज्ञापनबॉक्सदो दिन रही परेशानीमंडी शहर के समीप सकोर निवासी दया राम और प्रेमी देवी, कटौला की चंचल देवी, खलियार के राहुल और पैलेस कॉलोनी के राजेंद्र कुमार ने बताया कि दो दिनों तक क्रस्ना लैब की सेवाएं बंद रहने से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। सरकारी सामान्य लैब में मरीजों की अधिक भीड़ होने के कारण जांच करवाने में काफी समय बर्बाद हुआ। बुधवार को भी अस्पताल पहुंचने तक सामान्य लैब का समय समाप्त हो गया था। ऐसे में क्रस्ना लैब की सेवाएं बहाल होने की सूचना मिलने पर उन्होंने यहां पहुंचकर अपने सैंपल दिए। कहा कि लैब सेवाएं शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
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Nov 4, 2026, 07:15 PM
शामली में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए नियुक्त चिकित्सक

शामली में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए नियुक्त चिकित्सक

चार नवंबर को जारी आदेश के अनुसार, मुजफ्फरनगर जिला महिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. नीरज कुमार सोमवार, मंगलवार और बुधवार को शामली में जांच करेंगे। वहीं, डॉ. मनोज कुमार बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को मरीजों का अल्ट्रासाउंड करेंगे। दोनों चिकित्सक सप्ताह में बाकी दिनों में मुजफ्फरनगर में सेवाएं देंगे।विज्ञापनसीएमएस डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियमित तैनाती होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। इससे मरीजों को सप्ताह के छह दिन अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा मिल सकेगी।
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Nov 4, 2026, 06:45 PM
हिन्द-प्रशांत देशों से समुद्री सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया गया

हिन्द-प्रशांत देशों से समुद्री सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया गया

नौसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा हालात में यह समझना बेहद जरूरी है कि समुद्र की सुरक्षा किन-किन चीजों से प्रभावित होती है। इसके लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।विज्ञापनएडमिरल स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें ईस्ट एशिया समिट के दौरान इस पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सात प्रमुख क्षेत्रों के तहत समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। इस साल के संवाद की थीम विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग भी इसी पहल के एक प्रमुख स्तंभ से जुड़ी है।विज्ञापननौसेना प्रमुख ने कहा कि हिंद-प्रशांत की अवधारणा रणनीतिक चर्चाओं में लोकप्रिय होने से बहुत पहले ही प्रकृति इन दोनों महासागरों को जोड़ चुकी थी। समुद्र की धाराएं और जलवायु दोनों महासागरों के बीच गहरा संबंध बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के रास्ते हर सेकंड करीब 1.5 करोड़ घन मीटर पानी प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में पहुंचता है। यह दोनों महासागरों के बीच प्राकृतिक जुड़ाव की एक बड़ी मिसाल है।ये भी पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट: 'गलत नंबर मिला रहे, धरने का मौसम है, आप भी कीजिए', आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सीजेआई की सलाहएडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि अब जरूरत केवल साझा हितों की बात करने की नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की है। इससे क्षेत्रीय देशों के बीच लंबे समय तक सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संवाद इस दिशा में छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी IPRD 2026 के एक सत्र में हिस्सा लिया।
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Nov 4, 2026, 03:34 PM
ग्रेटर नोएडा में कार की चपेट में आने से बी. टेक के दो छात्र गंभीर रूप से घायल

ग्रेटर नोएडा में कार की चपेट में आने से बी. टेक के दो छात्र गंभीर रूप से घायल

ग्रेटर नोएडा। नालेज पार्क थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े बीटेक के दो छात्रों को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उनको शारदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां आईसीयू में उनका इलाज चल रहा है। पीड़ित के चाचा की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। मेरठ निवासी राजीव तोमर ने केस दर्ज कराया है कि उनका भतीजा प्रणव नॉलेज पार्क के एक कॉलेज में बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र है। दो नवंबर 2026 की सुबह करीब 9 बजे वो अपने दोस्त सत्यम कुमार के साथ टेंपो से उतरकर सड़क किनारे काॅलेज जाने के लिए खड़ा था। आरोप है कि तभी सफेद रंग की एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। टक्कर लगने पर दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि केस दर्ज कर कार की तलाश की जा रही है। ब्यूरो
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Nov 4, 2026, 02:51 PM
एंथ्रोपिक ने कुशल ए. आई. वार्तालापों के लिए संदेश सूत्र सुविधा शुरू की

एंथ्रोपिक ने कुशल ए. आई. वार्तालापों के लिए संदेश सूत्र सुविधा शुरू की

AI से लगातार काम कराने के दौरान कई बार एक परेशानी सामने आती है. जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ती है, AI को पहले दिए गए निर्देशों और बातचीत को पूरा समझाने के लिए बार-बार पुरानी चैट भेजनी पड़ती है.इससे जवाब मिलने में देरी हो सकती है.अब Anthropic ने इस परेशानी को कम करने के लिए एक नया फीचर पेश किया है. कंपनी ने Claude Platform पर Message Threads को पब्लिक बीटा में उपलब्ध करा दिया है. इसकी मदद से डेवलपर्स को हर बार पूरी बातचीत दोबारा भेजने की जरूरत नहीं होगी. इससे लंबे समय तक चलने वाले AI सेशन में जवाब मिलने की स्पीड बेहतर हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि Claude AI में आया नया फीचर क्या है. Anthropic ने अपने ब्लॉग पोस्ट के जरिए Message Threads की घोषणा की. यह फीचर खासतौर पर उन AI एजेंट्स के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें एक ही सेशन में कई बार मैसेज भेजने पड़ते हैं. पहले हर नए API रिक्वेस्ट के साथ पूरी बातचीत का रिकॉर्ड दोबारा भेजना पड़ता था. लेकिन अब डेवलपर्स पिछली बातचीत की जगह सिर्फ नए मैसेज भेजकर काम आगे बढ़ा सकते हैं. इस प्रक्रिया में डेवलपर को नए मैसेज के साथ पिछले जवाब की ID भी देनी होगी. इससे सिस्टम को पता रहेगा कि बातचीत किस जगह से आगे बढ़ानी है. डेवलपर्स Messages API रिक्वेस्ट में Thread पैरामीटर जोड़कर इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. पहली रिक्वेस्ट में पूरी बातचीत भेजकर एक नया थ्रेड शुरू करना होगा. इसके बाद हर बार केवल नए मैसेज और पिछले जवाब की ID भेजनी होगी, हालांकि इस थ्रेड की एक समय सीमा भी है. Anthropic के अनुसार, बातचीत का रेफरेंस रिक्वेस्ट के बीच अस्थायी रूप से मेमोरी में रखा जाता है. आखिरी रिक्वेस्ट के पांच मिनट बाद थ्रेड अपने आप एक्सपायर हो जाता है. इसके बाद नया सेशन शुरू करने के लिए पूरी बातचीत फिर से भेजनी होगी. Android Phone Crash Problem : बार-बार क्रैश होकर परेशान कर रहा Android फोन? इन तरीकों से करें ठीक Anthropic के मुताबिक, Message Threads लंबे समय तक चलने वाले कोडिंग एजेंट्स, कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले AI एजेंट्स और डॉक्यूमेंट या इमेज पर आधारित वर्कफ्लो के लिए यूजफुल है. यह सुविधा Claude Platform के अलावा Amazon Web Services (AWS), Microsoft Foundry और Google Cloud पर Anthropic से मैनेज किए जाने वाले Claude मॉडल्स में भी उपलब्ध है. Anthropic के मुताबिक, Message Threads से AI के जवाब देने में लगने वाला समय कम हो सकता है. कंपनी का कहना है कि Claude Code के ज्यादातर यूजर्स के लिए यह फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू है. इसके इस्तेमाल से 5 लाख से 10 लाख टोकन वाले मैसेज में औसत रिस्पॉन्स लेटेंसी करीब 35 फीसदी तक कम हुई है. OnePlus 16 Price : OnePlus 16 खरीदने के लिए खर्च करने होंगे 1.4 लाख? लॉन्च से पहले दावा मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.
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Nov 4, 2026, 02:20 PM
क्रास्ना लैब्स ने हड़ताल समाप्त की, हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोगियों को राहत दी

क्रास्ना लैब्स ने हड़ताल समाप्त की, हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोगियों को राहत दी

हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में क्रस्ना लैब की हड़ताल खत्म होने से मरीजों ने बड़ी राहत की सांस ली है। स्वास्थ्य सचिव से वार्ता में कंपनी की मांगों पर सहमति बन गई है। इसके साथ ही बुधवार से अस्पतालों में जांच सेवाएं पूरी तरह बहाल हो गई हैं। हड़ताल के कारण प्रदेशभर के अस्पतालों में मरीजों को जरूरी जांच करवाने में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। डॉक्टरों द्वारा लिखे गए टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को मजबूरन निजी लैब का रुख करना पड़ रहा था। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी ज्यादा आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा था।
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Nov 4, 2026, 01:36 PM
भारत ने शोधकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक उपकरण साझा करने के लिए पोर्टल का शुभारंभ किया

भारत ने शोधकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक उपकरण साझा करने के लिए पोर्टल का शुभारंभ किया

इसके अलावा वे शिक्षकों और शोधार्थियों को दूसरे संस्थानों के वैज्ञानिक उपकरणों का साझा इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और हरियाणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय के साथ तालमेल रखना और पोर्टल से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी कर जरूरी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य शोध की लागत घटाना और उपलब्ध वैज्ञानिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। ब्यूरो
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Nov 4, 2026, 12:43 PM
एम्स ने किफायती कैंसर उपचार विकल्पों की खोज की

एम्स ने किफायती कैंसर उपचार विकल्पों की खोज की

अमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। एम्स कम खर्च में बेहतर कैंसर इलाज के तरीके खोज रहा है। इसके लिए संस्थान के शोधकर्ता सस्ती दवाओं, कम डोज में उपचार, इम्यूनोथेरेपी और बीमारी की शुरुआती पहचान जैसे विकल्पों पर अध्ययन कर रहे हैं। कोशिश है कि कैंसर मरीजों को आधुनिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के साथ इलाज पर होने वाले खर्च को भी कम किया जा सके। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है, जो आर्थिक तंगी के कारण पूरा उपचार नहीं करा पाते।एम्स के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. समीर बख्शी के अनुसार, कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलने के कारण मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। दवाओं के अलावा बार-बार होने वाली जांच, अस्पताल में भर्ती और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं पर भी बड़ी रकम खर्च होती है। कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मरीज उपचार बीच में ही छोड़ देते हैं। ऐसे में कम कीमत वाली प्रभावी दवाओं की उपलब्धता इलाज को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मददगार हो सकती है।विज्ञापनकम डोज से खर्च घटाने की संभावनाशोधकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या कुछ विशेष प्रकार के कैंसर में दवाओं की कम मात्रा देकर भी बेहतर उपचार परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। यदि शोध में इसके सकारात्मक नतीजे मिलते हैं तो दवाओं पर होने वाला खर्च कम हो सकता है। हालांकि, यह तरीका सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होगा। इसका निर्णय कैंसर के प्रकार और मरीज की स्थिति के अनुसार ही किया जाएगा।विज्ञापनइम्यूनोथेरेपी को सुलभ बनाने पर जोरइम्यूनोथेरेपी में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर से लड़ने के लिए सक्रिय किया जाता है। उपचार की इस पद्धति ने नई संभावनाएं पैदा की हैं, लेकिन इसकी कुछ दवाएं काफी महंगी हैं। इसलिए इनके बेहतर इस्तेमाल और अधिक मरीजों तक पहुंच बनाने के विकल्पों पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा कैंसर की शुरुआती पहचान पर जोर दिया जा रहा है। समय रहते बीमारी का पता चलने से उपचार की जटिलता कम करने और इलाज की सफलता की संभावना बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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Aaj Tak
Nov 4, 2026, 12:04 PM
ऊंचाई बढ़ाने वाली सर्जरीः बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद एक जोखिम भरी प्रक्रिया

ऊंचाई बढ़ाने वाली सर्जरीः बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद एक जोखिम भरी प्रक्रिया

मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है. अब लोग अपनी हाइट भी सर्जरी से बढ़वा रहे हैं. हालांकि,विशेषज्ञों का कहना है कि कद बढ़ाने की सर्जरी कोई नॉर्मल प्रोसीजर नहीं है. इसमें कई तरह के रिस्क हैं और मरीज को लंबे समय तक सावधानी बरतने की जरूरत होती है, लेकिन फिर भी अच्छा दिखने की चाहत और कद को बढ़ा हुआ दिखाने के लिए लोग सर्जरी करा रहे हैं. जिसमें हड्डियों को काटना भी पड़ रहा है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि हाइट बढ़ाने वाली सर्जरी कराना कितना सेफ है. दिल्ली के जेएमसी हॉस्पिटल में हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) राजेश भल्ला ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि कद बढ़ाने की सर्जरी में हड्डियों की लंबाई बढ़ाई जाती है. इसके लिए इलिजारोव तकनीक का इस्तेमाल होता है. शुरुआत में इसका इस्तेमाल उन मरीजों के इलाज में किया जाता था, जिनकी हड्डियां फ्रैक्चर के बाद सही तरीके से नहीं जुड़ती थीं या जिनके पैरों की लंबाई में अंतर होता था. लेकिन अब लोग हाइट बढ़ाने के लिए भी इस सर्जरी को करा रहे हैं. डॉ. भल्ला बताते हैं कि इस सर्जरी में सबसे पहले हड्डी को काटकर उसके दो हिस्से किए जाते हैं. इसके बाद एक विशेष उपकरण लगाया जाता है, जिसकी मदद से दोनों हिस्सों के बीच धीरे-धीरे दूरी बढ़ाई जाती है. यह दूरी रोजाना करीब एक मिलीमीटर बढ़ाई जाती है. जैसे-जैसे हड्डी के दोनों हिस्से दूर होते हैं, उनके बीच खाली जगह में शरीर खुद नई हड्डी बनाने लगता है. साथ ही आसपास की नसों, मांसपेशियों और दूसरे टिश्यू को भी इस बढ़ती लंबाई के अनुसार ढलने का समय मिलता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की टांग की हड्डी की लंबाई 5 सेंटीमीटर बढ़ानी है, तो इसे रोजाना थोड़ा-थोड़ा बढ़ाकर पूरा करने में करीब 50 दिन लग सकते हैं, लेकिन इतने में इलाज पूरा नहीं होता. इसके बाद नई बनी हड्डी को मजबूत होने के लिए करीब 100 दिन या इससे ज्यादा समय देना पड़ता है. यानी 5 सेंटीमीटर लंबाई बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है. हालांकि, यह समय मरीज की उम्र, हड्डियों की स्थिति और शरीर की रिकवरी पर निर्भर करता है. डॉ. भल्ला के अनुसार, कुछ चुनिंदा मामलों में जांघ की हड्डी को लगभग 7.5 से 8 सेंटीमीटर और पिंडली की हड्डी को करीब 5 से 6 सेंटीमीटर तक लंबा करने का भी प्लान किया जाता है. दोनों हड्डियों में अलग-अलग चरणों में सर्जरी करके कुल 12 से 15 सेंटीमीटर तक लंबाई बढ़ाने की संभावना भी हो सकती है. हालांकि, इसे हर मरीज के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता है. इसमें जोड़ों में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव, हड्डी के जुड़ने में देरी और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं. डॉ. भल्ला बताते हैं कि सर्जरी से पहले यह समझना जरूरी है कि मरीज आखिर अपनी लंबाई क्यों बढ़ाना चाहता है. क्या यह उसका अपना फैसला है या वह किसी दूसरे व्यक्ति के दबाव में ऐसा कर रहा है? इसके साथ ही मरीज की हड्डियों की मजबूती, मानसिक स्थिति की जांच भी होनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ की मदद ली जानी चाहिए.
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 05:24 AM
भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रः वित्त वर्ष 2023-24 और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शीर्ष राज्य और क्षेत्र

भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रः वित्त वर्ष 2023-24 और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शीर्ष राज्य और क्षेत्र

राज्य संख्या तमिलनाडु 44,611 उत्तर प्रदेश 29,298 महाराष्ट्र 28,947 कर्नाटक 27,970 दिल्ली 24,417 पश्चिम बंगाल 18,280 पंजाब 15,565 तेलंगाना 15,253 उत्तराखंड 11,169 गुजरात 10,503 क्षेत्र वित्त वर्ष 2023-24 वित्त वर्ष 2024-25 खेती 16,491 18,428 एआई व साइबर 19,274 20,505 जैव तकनीक 13,361 14,595 दुर्लभ खनिज 38,997 44,630 इलेक्ट्रॉनिक, सेमीकंडक्टर 16,433 18,605 स्वच्छ ऊर्जा 10,618 12,524 अंतरिक्ष विज्ञान 2,921 3,526 फार्मा व स्वास्थ्य 55,886 59,633 संचार व नेटवर्क 5,819 7,503 परिवहन 6,082 7,382 समुद्र व भूमि संसाधन 11,062 12,536
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 04:35 AM
आई. आई. टी. जोधपुर ने धुंधली ऐतिहासिक पांडुलिपियों को खोलने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली विकसित की

आई. आई. टी. जोधपुर ने धुंधली ऐतिहासिक पांडुलिपियों को खोलने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली विकसित की

आईआईटी जोधपुर में सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश मोहन जोशी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम एआई, संगणकीय भाषाविज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा को एक साथ जोड़कर इस दिशा में नया शोध कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उन ऐतिहासिक ग्रंथों को पढ़ने और समझने की तकनीक विकसित करना है, जिनके अक्षर धुंधली स्याही, फटे पन्नों और अपूर्ण लिखावट के कारण स्पष्ट नहीं रह गए हैं।विज्ञापनभारत की पांडुलिपि विरासत में खगोल शास्त्र, गणित, दर्शन, चिकित्सा, साहित्य, धातु शास्त्र और वास्तुकला जैसे विषयों का विशाल ज्ञान मौजूद है। हालांकि, इन पांडुलिपियों में धुंधले अक्षर, धब्बे और जटिल हस्तलिखित संरचनाएं शोधकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती पेश करती हैं। पारंपरिक ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) तकनीक भी ऐसी ऐतिहासिक पांडुलिपियों को ठीक से पढ़ने और समझने में सक्षम नहीं है।विज्ञापनइसी समस्या का समाधान खोजने के लिए आईआईटी जोधपुर की टीम एक विशेष एआई प्रणाली विकसित कर रही है। यह प्रणाली केवल पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में बदलने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षतिग्रस्त सामग्री की गुणवत्ता सुधारने, प्राचीन हस्तलेखन की पहचान करने, भाषाई संरचनाओं को समझने और अनुवाद में भी मदद करेगी। शोधकर्ता इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मूल पांडुलिपि के स्रोत और उसकी प्रामाणिकता को सुरक्षित रखने पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं।इस शोध का एक प्रमुख नवाचार एडैप्टिव एआई ऑर्केस्ट्रेटर प्रणाली है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म के अलग-अलग तकनीकी घटकों के बीच केंद्रीय समन्वय का काम करेगी। इसकी खासियत यह है कि यह हर पांडुलिपि पर एक जैसी प्रक्रिया लागू नहीं करेगी, बल्कि उसकी स्थिति और जरूरत का आकलन करने के बाद सबसे उपयुक्त प्रसंस्करण पद्धति चुनेगी।इस प्रक्रिया की शुरुआत शोधकर्ताओं की ओर से पांडुलिपि की प्राथमिक पहचान और उसकी प्रोफाइलिंग से होगी। इसमें पृष्ठ पर मौजूद संभावित लिपियों, भाषाओं और एक से अधिक लिपियों की मौजूदगी का विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद एआई प्रणाली पांडुलिपि को कई तकनीकी चरणों से गुजारेगी। इनमें गुणवत्ता का आकलन, छवि सुधार, पृष्ठ की संरचना का विश्लेषण, पाठ का विभाजन, हस्तलिखित सामग्री की पहचान और भाषाई प्रसंस्करण शामिल हैं।आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता इस एआई प्लेटफॉर्म को छह प्रमुख भारतीय लिपियों के लिए तैयार कर रहे हैं। इनमें देवनागरी, शारदा, ग्रंथ, नंदिनागरी, मोडी और तुलु-तिगलारी शामिल हैं। इसके साथ ही टीम शास्त्रीय और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रमाणित भाषा पैक के माध्यम से बहुभाषीय प्रसंस्करण की सुविधा विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है।इन सभी लिपियों की अपनी अलग-अलग तकनीकी चुनौतियां हैं। देवनागरी लिपि में अक्षरों के ऊपर बनी शिरोरेखा की संरचना को समझना जरूरी है। वहीं, शारदा, ग्रंथ और नंदिनागरी लिपियों में ऐतिहासिक अक्षर रूपों और जटिल संयुक्ताक्षरों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण है। मोडी लिपि में प्रवाहमयी हस्तलेखन को समझना पड़ता है, जबकि तुलु-तिगलारी में अक्षरों के संयोजन और पांडुलिपि की संरचना पर विशेष ध्यान देना होता है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ता अलग-अलग लिपियों के लिए विशेष पाठ विभाजन पद्धतियां और पहचान मॉडल विकसित कर रहे हैं, ताकि हर लिपि की विशिष्ट बनावट और लिखने की शैली को बेहतर ढंग से समझा जा सके।ऐतिहासिक ग्रंथों को पढ़ने में केवल अक्षरों की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है। इनमें प्राचीन शब्दावली, वर्तनी के अलग-अलग रूप, विशिष्ट पारिभाषिक शब्द और जटिल व्याकरणिक संरचनाएं भी होती हैं। ऐसे में किसी शब्द का सही अर्थ समझने के लिए उसके संदर्भ और भाषा की संरचना का विश्लेषण करना जरूरी होता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ता एआई प्लेटफॉर्म में पाठ का मानकीकरण, शब्द विभाजन और संदर्भ के आधार पर व्याख्या करने जैसी सुविधाएं जोड़ रहे हैं। इसके अलावा, प्राचीन ग्रंथों की सामग्री को आधुनिक भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में अनुवाद करने की सुविधा विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है। इससे अलग-अलग भाषाओं के जानकारों और शोधकर्ताओं के लिए इन ग्रंथों का अध्ययन आसान हो सकेगा।सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश मोहन जोशी के अनुसार, भारत की प्राचीन पांडुलिपियों में हजारों वर्षों का असाधारण बौद्धिक ज्ञान सुरक्षित है। हालांकि, भौतिक क्षति और भाषाई जटिलताओं के कारण यह ज्ञान आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता। इस पहल के जरिये शोधकर्ता एआई तकनीक और पारंपरिक पांडुलिपि अध्ययन को एक साथ ला रहे हैं।इसमें विद्वानों की विशेषज्ञता का भी सहयोग लिया जा रहा है, ताकि प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने, समझने और उनकी व्याख्या करने में तकनीक के साथ मानवीय ज्ञान का इस्तेमाल किया जा सके। आईआईटी जोधपुर का यह शोध भारत की प्राचीन ज्ञान संपदा को संरक्षित करने और उसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 04:08 AM
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने सुरक्षित बिजली लाइन रखरखाव के लिए उच्च-वोल्टेज डिटेक्टरों का अधिग्रहण किया

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने सुरक्षित बिजली लाइन रखरखाव के लिए उच्च-वोल्टेज डिटेक्टरों का अधिग्रहण किया

देश में बिजली की लाइनों की मरम्मत और रखरखाव का काम करने वाले कर्मचारियों की जान अब खतरे में नहीं रहेगी। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने आधुनिक तकनीक से लैस नए हाई वोल्टेज डिटेक्टर (एचवीडी) खरीदे हैं। इनके जरिये बिजली की लाइन में अचानक करंट आने पर पोल पर चढ़ने वाले कर्मचारी को कुछ फीट की दूरी से ही इसका पता चल जाएगा। डिटेक्टर में लगा अलार्म कर्मचारियों को सतर्क करेगा। इससे अब तक अनजाने में लाइन चार्ज होने से कर्मचारियों की जान पर बना रहने वाला खतरा काफी हद तक कम होगा।
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Amar Ujala
Nov 4, 2026, 04:03 AM
आधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार में भारत का उत्थानः ए. आई. सबसे आगे

आधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार में भारत का उत्थानः ए. आई. सबसे आगे

केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने कहा कि भारत आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में अनुसंधान और तकनीकी विकास को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की केंद्रीय भूमिका रहेगी और युवा प्रतिभाएं इस बदलाव की प्रमुख ताकत बनेंगी। मंत्री ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और सुशासन के क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन का मुख्य जरिया बन रही है। ऐसे में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और बेहतर अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है।विज्ञापनएनआईटी रायपुर में स्थापित सातों केंद्र विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और उद्योग जगत को साझा मंच प्रदान करेंगे। जिन सात केंद्रों का उद्घाटन हुआ है, उनमें एमईआईटीवाई इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, और सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन शामिल हैं। इनके अलावा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एयरोस्पेस एंड ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजीज, मैराल सेंटर फॉर इनोवेशन इन रूरल एंड ट्राइबल हेल्थ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स तथा सेंटर फॉर नैनोसाइंस एंड सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज की भी शुरुआत की गई है। ये सभी केंद्र व्यावहारिक समस्याओं का समाधान खोजने तथा नए स्टार्टअप को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।विज्ञापनछत्तीसगढ़ की समृद्धखनिज संपदा का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, आधुनिक उद्योग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार में महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। खनिजों के वैज्ञानिक उपयोग और संबंधित नई तकनीकों पर किया जाने वाला शोध देश को आर्थिक व तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा। इसके साथ ही, ग्रामीण तथा जनजातीय स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी नवाचार दूरस्थ इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में मददगार होंगे। इन केंद्रों की स्थापना से शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच आपसी सहयोग बढ़ेगा। उन्होंने युवा शोधार्थियों से वैज्ञानिक सोच और उद्यमिता अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
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Nov 4, 2026, 03:03 AM
भारतीय मुख्य सचिव नए लक्ष्यों और रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे

भारतीय मुख्य सचिव नए लक्ष्यों और रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे

देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की अगले महीने होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर मंथन होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष नए लक्ष्यों व रणनीति का एजेंडा रखा जाएगा। सम्मेलन में अब राज्यों को केवल योजनाएं नहीं, बल्कि परिणाम देने पर ज्यादा जोर होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के साथ प्रशासनिक जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति विकसित करने पर चर्चा होगी। विकसित भारत-2047 के लिए अब यह प्रशासनिक सुधार, संघीय सहयोग और राज्यों की जवाबदेही-तीनों को एक साथ जोड़ कर आगे बढ़ा जाएगा। हर राज्य को पांच विशिष्ट प्राथमिकता वाले विकास लक्ष्यों की पहचान करनी होगी ब्यूरो सम्मेलन में खनन और कोयला क्षेत्रों की संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल पर विचार होगा। जैव प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक नागरिक केंद्रित बनाने पर चर्चा होगी। सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में आने वाली अड़चनों के उपाय भी तलाशे जाएंगे।
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Nov 4, 2026, 02:29 AM
भारत ने सौर ऊर्जा प्रभावों का अध्ययन करने के लिए उच्च तकनीक विकिरण प्रणाली स्थापित की

भारत ने सौर ऊर्जा प्रभावों का अध्ययन करने के लिए उच्च तकनीक विकिरण प्रणाली स्थापित की

चंडीगढ़ सेक्टर-39 के मौसम केंद्र में हाईटेक रेडिएशन सिस्टम लगाया गया है। इसमें लगे विशेष सेंसर सूर्य से आने वाले विकिरण की मात्रा और तीव्रता मापेंगे। इससे दिनभर धरती तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड तैयार होगा। इन आंकड़ों से मौसम, तापमान, कृषि, पर्यावरण और वायु गुणवत्ता पर सूर्य के प्रभाव का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।विज्ञापनअभी तक मौसम की निगरानी में तापमान, हवा की गति, नमी और बारिश जैसे मानकों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। नए सिस्टम से सौर विकिरण के आंकड़े भी उपलब्ध होंगे। इससे मौसम के व्यवहार को समझने के लिए वैज्ञानिकों को एक और महत्वपूर्ण आधार मिलेगा। मौसम केंद्र के निदेशक सुरेंद्र पाल के अनुसार सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा का मौसम और धरती के वातावरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है। नए सिस्टम से इस प्रभाव को आंकड़ों के रूप में समझना आसान होगा।
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Nov 3, 2026, 09:24 PM
नगर निगम आयुक्त ने मेडिकल रोड पर प्रौद्योगिकी का भौतिक सत्यापन किया

नगर निगम आयुक्त ने मेडिकल रोड पर प्रौद्योगिकी का भौतिक सत्यापन किया

नगर आयुक्त प्रेमप्रकाश मीणा ने मंगलवार दोपहर नगर निगम के मुख्य अभियंता वीके सिंह व इंजीनियरिंग विभाग के साथ इस तकनीकी का मेडिकल रोड पर जाकर भौतिक सत्यापन किया।विज्ञापननगर आयुक्त ने बताया कि इस तकनीक की विशेषता यह है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ बारिश के पानी की निकासी के लिए भूमिगत पाइपलाइन एवं मैनहोल आधारित व्यवस्थित ड्रेनेज नेटवर्क विकसित किया जाता है। इससे सड़कें खुले नालों से रहित रहती हैं और ज्यादा चौड़ी रहती हैं।विज्ञापनसड़क पर जमा होने वाले बारिश के पानी को विशेष इनलेट एवं कैच पिट के माध्यम से भूमिगत पाइपलाइन में पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली में सीमित दूरी एवं आवश्यकता के अनुसार मैनहोल बनाए जाते हैं।मैनहोल भूमिगत पाइपलाइन के निरीक्षण, सफाई, रखरखाव एवं आवश्यकता पड़ने पर मरम्मत के लिए उपयोग किए जाते हैं। अमेरिका और यूरोप में इस्तेमाल होने वाली इस तकनीक से सड़क किनारे खुले नालों की जरूरत कम होगी और आवागमन के लिए ज्यादा जगह मिल सकेगी।
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Nov 3, 2026, 09:00 PM
छात्र कैनसैट और मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता में मूल्यवान सबक सीखते हैं

छात्र कैनसैट और मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता में मूल्यवान सबक सीखते हैं

घर लौटने की तैयारी में जुटे युवाओं के हाथों में कहीं पुरस्कार थे तो कहीं टूटे-बिखरे कैनसैट और मॉडल रॉकेट के पुर्जे। पुरस्कार नहीं जीतने वाले प्रतिभागियों के लिए भी ये पुर्जे खाली हाथ लौटने की निशानी नहीं थे। इनमें महीनों की मेहनत, कई रातों की तैयारी और नारायणी तट पर किए गए प्रयोगों की कहानी दर्ज थी।विज्ञापनकिसी को 31 अक्तूबर को हुए जूरी रिव्यू के दौरान अपनी तकनीकी कमियां समझ में आईं तो किसी ने उड़ान से पहले मिली सलाह के आधार पर अपनी तैयारी में बदलाव किया। वहीं, कुछ युवाओं के लिए समापन समारोह में विशेषज्ञों के सुझाव आगे की राह बने।विज्ञापनइन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता के समापन समारोह में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी प्रयोग का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलना सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं है। अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करना ही वैज्ञानिक सोच का अहम हिस्सा है।कार्यक्रम में इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार गोयनका, निदेशक डॉ. विनोद कुमार, इसरो के पूर्व सहयोगी रॉय एम. चेरियन और कैनसैट मूल्यांकन समिति के प्रमुख डॉ. सुरेंद्र पाल समेत अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे। ड्रोन तकनीक से जुड़े सत्यनारायण मूर्ति और सीएसआईआर-एनएएल की ओर से भी युवाओं को तकनीकी सुझाव दिए गए।देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्यार्थियों ने कई महीनों की मेहनत से मॉडल रॉकेट और कैनसैट तैयार किए थे। प्रतियोगिता में उन्हें अपने उपकरणों का प्रदर्शन करने के साथ जूरी के सामने तकनीकी पहलुओं को समझाने और विशेषज्ञों से सीधे सुझाव पाने का अवसर मिला। कई टीमें पहली बार प्रतियोगिता में शामिल हुई थीं। कुछ के प्रयोग उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुए। पैराशूट के खुलने और कैनसैट को निर्धारित स्थान पर वापस लाने में आई चुनौतियों से उन्हें अपनी तैयारियों की कमियां समझने का मौका मिला।
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Nov 3, 2026, 08:59 PM
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में छात्र प्रतियोगिताओं का समापन ड्रोन से प्रक्षेपित उपग्रह और मॉडल रॉकेटों के साथ हुआ

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में छात्र प्रतियोगिताओं का समापन ड्रोन से प्रक्षेपित उपग्रह और मॉडल रॉकेटों के साथ हुआ

प्रतियोगिता के दौरान चार दिनों तक कहीं ड्रोन से कैनसैट लॉन्च किए जा रहे थे तो कहीं लॉन्चपैड पर तैयार रॉकेट आसमान की ओर उड़ान भर रहे थे। जमीन पर बने ग्राउंड स्टेशन की स्क्रीन पर उड़ान से जुड़े आंकड़े लगातार बदल रहे थे। पूरा दृश्य किसी वैज्ञानिक प्रयोगशाला जैसा नजर आ रहा था।विज्ञापनइन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता का समापन हो गया। इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्यार्थियों ने अपने तकनीकी प्रयोगों का प्रदर्शन किया। दोनों प्रतियोगिताओं की प्रक्रिया अलग-अलग रही। कैनसैट यानी कैन के आकार के छोटे उपग्रह को ड्रोन की मदद से ऊंचाई तक पहुंचाया गया, जबकि मॉडल रॉकेट को लॉन्चपैड से प्रक्षेपित किया गया। इन प्रयोगों के दौरान लगे सेंसर से मिलने वाले आंकड़े टेलीमेट्री के माध्यम से ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचते रहे। विद्यार्थी स्क्रीन पर ऊंचाई, गति, तापमान, दबाव और लोकेशन जैसे आंकड़ों को देखते और उनका विश्लेषण करते रहे।
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Nov 3, 2026, 07:51 PM
भारतीय व्यक्ति को सोलर पैनल इंस्टॉलर के रूप में सफलता मिली

भारतीय व्यक्ति को सोलर पैनल इंस्टॉलर के रूप में सफलता मिली

नदीगांव थाना क्षेत्र के ग्राम खुर्द निवासी भानु परिहार (26) पुत्र महेश सोलर पैनल लगाने का काम करता है। सोमवार को वह काम के सिलसिले में कोंच आया था। देर शाम बाइक से घर लौटते समय ग्राम सदूपुरा के पास पीछे से आए चार पहिया वाहन ने उसकी बाइक में टक्कर मार दी। टक्कर लगने से वह बाइक समेत सड़क पर गिर पड़ा। हादसे में उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। सूचना पर पहुंची पीआरवी घायल को सीएचसी ले गई। चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज उरई रेफर कर दिया। पुलिस टक्कर मारकर भागे वाहन की पहचान करने में जुटी है। (संवाद)
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Nov 3, 2026, 07:46 PM
अवध विश्वविद्यालय के जिला स्तरीय विज्ञान मेले का उद्घाटनः जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए 14 बाल वैज्ञानिकों का चयन किया गया

अवध विश्वविद्यालय के जिला स्तरीय विज्ञान मेले का उद्घाटनः जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए 14 बाल वैज्ञानिकों का चयन किया गया

प्रतियोगिता का शुभारंभ बीएसए लालचंद्र ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ उन्हें प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं। निर्णायक मंडल में अवध विश्वविद्यालय के प्रो. आरके तिवारी, प्रो. जीआर मिश्रा, डॉ. विभा तिवारी और डॉ. गया प्रसाद तिवारी शामिल रहे। कृषि विश्वविद्यालय के प्रो. एसआर मिश्रा और साकेत कॉलेज के डॉ. राजेश वर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया।विज्ञापनइन 14 बाल वैज्ञानिकों को मिला प्रदेश स्तर का मौकाचयनित विद्यार्थियों में रौनक कुमार भीमराव, अमृत अक्षिता सक्सेना, सृष्टि, अपूर्व, जस्मिन सिंह, परिधि, हसनी, माज यासीन खान, प्रांजल तिवारी, तान्या त्रिपाठी, सूर्यांश तिवारी, शिवानी, शुचि तिवारी और गौरी पांडेय शामिल हैं। ये सभी प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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Nov 3, 2026, 07:40 PM
भारतीय प्रोफेसर ने किसानों के लिए मिट्टी में जैव कीटनाशकों के स्तर की निगरानी के लिए उपकरण विकसित किया

भारतीय प्रोफेसर ने किसानों के लिए मिट्टी में जैव कीटनाशकों के स्तर की निगरानी के लिए उपकरण विकसित किया

फसलों की खेती से पहले अब किसान मिट्टी में जैव कीटनाशक की मात्रा का पता लगा सकेंगे। काशी नरेश विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रणजीत सिंह की ओर से तैयार डिवाइस को भारत सरकार के महानियंत्रक से पेटेंट मिला है। उन्होंने ट्राइकोडर्मा की संख्या के आधार पर बायोपेस्टिसाइड की मात्रा का पता लगाने के लिए ट्राइकोडर्मा बेस्ड बायोपेस्टिसाइड मॉनीटरिंग डिवाइस विकसित की है। डॉ. रणजीत सिंह ने बताया कि इस डिवाइस की मदद से मिट्टी में ट्राइकोडर्मा की संख्या के आधार पर बायोपेस्टिसाइड की मात्रा का पता लगाया जा सकता है। इससे किसान मिट्टी का उचित उपचार कर खेती कर सकेंगे। बेहतर रणनीति और प्रबंधन से अच्छी पैदावार प्राप्त करने में मदद मिलेगी। साथ ही फसलों में लगने वाले रोगों के प्रति पहले से सतर्क हुआ जा सकेगा। डॉ. रणजीत सिंह की इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के मान-सम्मान में वृद्धि करने वाला बताया गया।
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Nov 3, 2026, 07:06 PM
सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान रिक्त सीटों को ऑन-द-स्पॉट प्रवेश के माध्यम से भरते हैं

सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान रिक्त सीटों को ऑन-द-स्पॉट प्रवेश के माध्यम से भरते हैं

प्राचार्य विजयकांत मिश्रा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश की पूर्व निर्धारित प्रक्रिया 30 अक्तूबर तक पूरी कर ली गई थी। इसके बाद रिक्त रह गई सीटों को भरने के लिए शासनादेश के तहत मौके पर प्रवेश नीति के अनुसार प्रवेश दिए जाएंगे। नए अभ्यर्थियों को प्रवेश लेने के लिए एससीवीटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। यह पोर्टल 15 नवंबर की रात 12 बजे तक खुला रहेगा।
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Nov 3, 2026, 09:56 AM
वन विभाग ने लाहौल-स्पीति में भोजपत्रा और जुनिपर प्रजातियों के संरक्षण के प्रयास शुरू किए

वन विभाग ने लाहौल-स्पीति में भोजपत्रा और जुनिपर प्रजातियों के संरक्षण के प्रयास शुरू किए

संवाद न्यूज एजेंसीकेलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन विभाग ने भोजपत्र और जूनिपर प्रजातियों के संरक्षण की पहल की है। इसके लिए वैज्ञानिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। मुख्यालय केलांग में हिमालयन फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई) शिमला के सहयोग से एक प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ।यह एक दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को आयोजित किया गया। इसमें वन विभाग के फील्ड कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इन प्रजातियों के संरक्षण और पौध तैयार करने की तकनीकी जानकारी हासिल की। एचएफआरआई के वैज्ञानिक पीतांबर सिंह नेगी ने प्रशिक्षण दिया। उन्होंने भोजपत्र और जूनिपर के पारिस्थितिक एवं पर्यावरणीय महत्व को समझाया। नेगी ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन में इनकी अहम भूमिका है। वैज्ञानिक पीतांबर सिंह नेगी ने प्रतिभागियों को बीज संग्रहण, बीज उपचार और अंकुरण की तकनीकें समझाईं। कार्यक्रम के समापन पर एचएफआरआई ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को उपयोगी बताया, जिससे संरक्षण प्रयासों को वैज्ञानिक आधार मिलेगा। संवाद
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Nov 3, 2026, 08:30 AM
नोकिया वाइब 2 5जीः 15,000 रुपये से कम में एक बजट-अनुकूल 5जी स्मार्टफोन विकल्प

नोकिया वाइब 2 5जीः 15,000 रुपये से कम में एक बजट-अनुकूल 5जी स्मार्टफोन विकल्प

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी 15 हजार रुपये से कम कीमत में कोई नया 5G फोन खरीदने की सोच रहे हैं? तो Nokia फोन बनाने वाली कंपनी का HMD Vibe 2 5G डिवाइस आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। कंपनी ने इस फोन को इस साल मई में लॉन्च किया था। अभी इस फोन पर न सिर्फ फ्लिपकार्ट बल्कि कंपनी की वेबसाइट पर भी डिस्काउंट मिल रहा है। फोन में 6000 mAh बैटरी, 50MP का प्राइमरी कैमरा और 120Hz डिस्प्ले जैसे बेहतरीन फीचर्स मिल रहे हैं। ऐसे में अगर आप भी इस फोन को खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले इसकी कीमत और ऑफर के बारे में जान लें... HMD Vibe 2 5G की कीमत कंपनी की वेबसाइट पर सिर्फ ₹13,999 रुपये है। जबकि फ्लिपकार्ट पर इस फोन की कीमत ₹14,499 है। यानी ऑफिसियल वेबसाइट पर फोन ज्यादा सस्ता मिल रहा है। हालांकि ई कॉमर्स वेबसाइट पर बैंक ऑफर्स के साथ छूट मिल रही है। फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक कार्ड के साथ 1200 रुपये की छूट और फ्लिपकार्ट SBI क्रेडिट कार्ड के साथ 1,675 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसके अलावा फोन पर फ्लिपकार्ट खास एक्सचेंज ऑफर भी दे रहा है जहां से आप अपने पुराने फोन के बदले 12,500 रुपये तक की एक्सचेंज वैल्यू ले सकते हैं। एक्सचेंज ऑफर में एक्स्ट्रा 500 रुपये तक का डिस्काउंट भी मिल रहा है। स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो फोन में 6.7-इंच की HD+ डिस्प्ले है। साथ ही इसमें 120Hz तक का रिफ्रेश रेट सपोर्ट मिल रहा है। ये फोन ऑक्टा-कोर Unisoc प्रोसेसर पर रन करता है और इसकी क्लॉक स्पीड 2.3GHz तक है। हैंडसेट में स्टैंडर्ड तौर पर 4GB RAM है और साथ ही 128GB तक की स्टोरेज मिल रही है। फोटोग्राफी के लिए HMD Vibe 2 5G में AI-बेस्ड रियर कैमरा है, जिसमें LED फ्लैश सपोर्ट के साथ 50-मेगापिक्सल कैमरा मिल रहा है। जबकि सामने की तरफ सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 8-मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा है। धूल और पानी की छींटों से बचाव के लिए फोन में IP64 रेटिंग मिल रही है। डिवाइस में Bluetooth 5.0, Wi-Fi 5 और एक USB Type-C पोर्ट मिल रहा है। फोन में एक्सेलेरोमीटर, प्रॉक्सिमिटी सेंसर और एम्बिएंट लाइट सेंसर जैसे सेंसर भी मिल रहे हैं। डिवाइस में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर है। फोन में 6000mAh की बैटरी और 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी है। Jio का 84 दिन वाला प्लान: डेली 2GB हाई-स्पीड डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ JioHotstar भी
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Nov 3, 2026, 08:25 AM
दिवाली त्योहारों से पहले घरों की सफाई में रोबोटों ने की मदद

दिवाली त्योहारों से पहले घरों की सफाई में रोबोटों ने की मदद

दिवाली का त्योहार करीब है ऐसे में सभी लोग अपने-अपने घरों की सफाई में लगे हुए हैं. दिवाली पर पूरे साल की गंदगी इत्मिनान से साफ की जाती है. लेकिन घर की साफ-सफाई करना काफी थका देने वाला काम होता है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं किसी का सहारा मिल जाए तो क्या ही बात बने. तो आपको बता दें आजकल घरों की सफाई में लोगों का साथ रहे हैं रोबोट्स. यह दिखने में भले ही बहुत बड़ा न हो लेकिन इसके अंदर का दिमाग एकदम स्मार्ट तरीके से काम करता है.बिना किसी इंसान के सहारे यह रोबोट पूरे घर के कमरों को पहचान लेता है. फर्नीचर से टकराने से बचता है और सीढ़ियों से नीचे गिरे बिना चुपचाप अपना काम निपटा लेता है. चलिए आपको बताते हैं इस रोबोटिक सफाईकर्मी के पीछे कौन सी टेक्नोलॉजी काम करती है. आप सोच रहे होंगे कि बिना आंखों के यह रोबोट घर का रास्ता कैसे ढूंढता है. दरअसल इसके ऊपरी हिस्से में LiDAR' यानी लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग नाम की एक खास लेजर टेक्नोलॉजी लगी होती है. यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल बिना ड्राइवर वाली कारों में किया जाता है. जब रोबोट चलना शुरू करता है तो इसका लेजर सेंसर तेजी से घूमकर पूरे कमरे में न दिखने वाली लाइट फेंकता है और दीवारों, सोफे, बेड या मेज की दूरी का हिसाब लगाकर अपने दिमाग में घर का एक सटीक 3D मैप तैयार कर लेता है. इसके अलावा इसमें Anti-Collision और Cliff Sensors भी लगे होते हैं. Anti-Collision सेंसर इसे दीवारों और घर की बाकी चीजों से टकराने से बचाते हैं. जबकि इसके नीचे लगे Cliff Sensors तुरंत भांप लेते हैं कि आगे सीढ़ियां हैं और कितनी गहराई है. जिससे यह तुरंत अपने कदम पीछे खींच लेता है और गिरने से बच जाता है. घर का नक्शा बनाने के बाद रोबोट काम करता है धूल-मिट्टी साफ करने का. इस रोबोट के नीचे की तरफ घूमने वाले छोटे-छोटे साइड ब्रश लगे होते हैं. जो दीवारों के किनारों और कोनों से कचरा समेटकर मशीन के बीच वाले हिस्से में लाते हैं. इसके ठीक बीच में एक मेन रोलर ब्रश और तगड़ा वैक्यूम मोटर होता है. जो अपनी Suction Power यानी खेंचने की ताकत से बारीक से बारीक धूल, बालों और कचरे को खींचकर अंदर बने डस्टबिन में जमा कर लेता है. वहीं पोछा लगाने के लिए इसमें एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक वॉटर टैंक और नीचे माइक्रोफाइबर पैड लगा होता है. यह साधारण पोछे की तरह पूरे फर्श पर एक साथ पानी नहीं फैलाता बल्कि इसकी स्मार्ट चिप तय करती है कि फर्श पर कितनी नमी की जरूरत है और उसी हिसाब से बूंद-बूंद करके कपड़ा गीला करती है. कई नए मॉडल्स में तो 'Carpet Detection सेंसर भी आता है. जो कालीन आते ही पोछा ऊपर उठा लेता है जिससे कालीन गीला न हो. आपको इस रोबोट के पीछे-पीछे घूमने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती. यह आपके घर के Wi-Fi से कनेक्ट होकर सीधे आपके फोन में ऐप से जुड़ जाता है. आप ऑफिस में बैठे-बैठे भी अपने फोन की स्क्रीन पर देख सकते हैं कि रोबोट ने घर के किस हिस्से की सफाई कर दी है और कौन सा कोना बाकी है. ऐप के जरिए आप No-Go Zones भी सेट कर सकते हैं, यानी अगर आप चाहते हैं कि रोबोट पूजा घर, बाथरूम के पास या बच्चों के खिलौनों वाले हिस्से में न जाए तो फोन पर बस सेट दीजिए और रोबोट उस एरिया से दूर रहेगा. इतना ही नहीं यह अपनी बैटरी का ख्याल भी खुद ही रखता है. सफाई करते वक्त अगर इसकी बैटरी 15-20 परसेंट से कम हो जाती है तो यह चुपचाप वापस अपने चार्जिंग डॉक पर जाकर खुद को चार्ज करता है और बैटरी फुल होते ही ठीक उसी जगह से दोबारा सफाई शुरू करता है जहां इसने काम छोड़ा था. तो बताइए है न एकदम कमाल की चीज. नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है. न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है.
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Nov 3, 2026, 07:50 AM
युवक की मौत की जांचः पुलिस को दर्द निवारक दवा के दुरुपयोग के सबूत मिले

युवक की मौत की जांचः पुलिस को दर्द निवारक दवा के दुरुपयोग के सबूत मिले

अगस्त 2025 में घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम युवक के किराए के कमरे पर पहुंची। गहन जांच के दौरान कमरे से दर्द निवारक दवाओं की 2 खाली स्ट्रिप, पाउडर के अवशेष लगा हुआ एक चम्मच, लाइटर और एक इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद की गई। इन भौतिक साक्ष्यों के आधार पर विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि युवक ने दवा का असामान्य रूप से सेवन किया था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, संबंधित दर्द निवारक दवा का उपयोग बेहद गंभीर स्थितियों में केवल योग्य डॉक्टर की सलाह और चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाता है। बिना किसी डॉक्टर की सलाह के इसका स्वयं इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है।विज्ञापनमामले की विस्तृत जांच के लिए पुलिस ने मृतक युवक का मोबाइल फोन जब्त कर उसकी डिजिटल गतिविधियों की जांच की। मोबाइल की यूट्यूब सर्च हिस्ट्री खंगालने पर कई ऐसे वीडियो और सामग्रियां मिलीं, जिनमें टैबलेट को चम्मच पर गर्म कर सिरिंज के माध्यम से शरीर में इंजेक्ट करने का तरीका बताया गया था। इस डिजिटल साक्ष्य ने जांच टीम को एक स्पष्ट दिशा दी। वैज्ञानिक जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि युवक ने इंटरनेट पर दिखाए गए जानलेवा तरीके को अपनाया और दवा की ओवरडोज के कारण उसकी जान चली गई।विज्ञापनइस दुखद मामले को डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया ने अपने शोध अध्ययन का मुख्य विषय बनाया। उनके शोधपत्र का शीर्षक 'Accidental Death Due to Internet Abuse of Therapeutic Drug: The Emerging Threat: A Case Report' रखा गया। इस पत्र में इंटरनेट पर बिना किसी प्रमाणिकता के मौजूद अधूरी या भ्रामक जानकारियों के आधार पर दवाओं के इस्तेमाल से पैदा होने वाले जानलेवा खतरों का गहन फॉरेंसिक और वैज्ञानिक विश्लेषण पेश किया गया। शोध में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि ऑनलाइन उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारियों का बिना डॉक्टरी समझ के प्रयोग कितना घातक हो सकता है।फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देशभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र शामिल हुए थे। कॉन्फ्रेंस की पेपर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया के शोधपत्र को सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हुए पहला स्थान प्रदान किया गया। उन्होंने अपना यह महत्वपूर्ण शोध कार्य फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. बजरंग कुमार सिंह, डॉ. जेएस तोमर तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों के कुशल निर्देशन और मार्गदर्शन में पूरा किया।
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Nov 3, 2026, 06:30 AM
स्मार्टफोन की बैटरी की निकासी और चार्जिंग की धीमी गतिः एक शीतकालीन वास्तविकता

स्मार्टफोन की बैटरी की निकासी और चार्जिंग की धीमी गतिः एक शीतकालीन वास्तविकता

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आ गया है और अब ऐसे में स्मार्टफोन यूज करने वाले लोगों को कई तरह की दिक्कत आ सकती है। इसमें फोन की बैटरी जल्दी खत्म होना और चार्जिंग में ज्यादा टाइम लगना भी शामिल है। जी हां, कभी-कभी ठंड के मौसम में मोबाइल को चार्जिंग पर लगाने के बाद भी बैटरी नॉर्मल दिनों के मुकाबले स्लो चार्ज होती है। ऐसे में हर एक के मन में यही सवाल उठता है कि क्या वाकई ठंड की वजह से स्मार्टफोन की चार्जिंग स्लो हो गई है? तो इसका सीधा जवाब हां है, क्योंकि कम टेम्परेचर का असर फोन की बैटरी और चार्जिंग पर पड़ सकता है। आजकल ज्यादातर फोन्स में लिथियम-आयन बैटरी देखने को मिलती है। इस तरह की बैटरी में चार्ज और डिस्चार्ज होने के प्रोसेस के दौरान आयनों की मोमेंट होती है। कम टेम्परेचर में ये प्रोसेस स्लो हो सकता है। इसकी वजह से बैटरी की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और फोन चार्ज होने में ज्यादा टाइम ले सकता है। इतना ही नहीं ज्यादा ठंड होने पर स्मार्टफोन का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम बैटरी को सेफ रखने के लिए चार्जिंग स्पीड को कम भी कर सकता है। कुछ मामलों में तो फोन चार्जिंग को टेम्पररी रोक भी सकता है। इतना ही नहीं सर्दियों में न सिर्फ चार्जिंग स्लो हो सकती है, बल्कि मोबाइल की बैटरी लाइफ भी प्रभावित हो सकती है। कम टेम्परेचर में बैटरी की कैपेसिटी टेम्पररी तौर से कम हो सकती है। ऐसे में मोबाइल की बैटरी परसेंट तेजी से गिर सकती है। कई बार बहुत ज्यादा ठंड में तो फोन अचानक बंद भी हो सकता है, जबकि उसमें कुछ परसेंट बैटरी बची हो सकती है। Jio का 84 दिन वाला प्लान: डेली 2GB हाई-स्पीड डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ JioHotstar भी
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Dainik Jagran
Nov 3, 2026, 06:06 AM
एम्स पटना ने बिना कान के पैदा हुए बच्चे की अस्थि चालन प्रत्यारोपण सर्जरी की

एम्स पटना ने बिना कान के पैदा हुए बच्चे की अस्थि चालन प्रत्यारोपण सर्जरी की

जन्म से ही बाहरी कान नहीं होने का मतलब यह नहीं कि बच्चा कभी सुन नहीं सकेगा। आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने ऐसे बच्चों के लिए भी सुनने का रास्ता खोल दिया है। एम्स पटना में पहली बार बोन कंडक्शन इम्प्लांट सर्जरी की गई है। इसमें आवाज कान के बाहरी हिस्से और कान की नली से होकर नहीं, बल्कि खोपड़ी की हड्डियों के कंपन के माध्यम से अंदरूनी कान तक पहुंचाई जाती है। इससे जन्मजात रूप से बाहरी कान नहीं होने या कान की नली बंद होने की समस्या से जूझ रहे बच्चों को सुनने में मदद मिल सकती है। शुक्रवार को एम्स के ईएनटी विभाग में एक छोटे बच्चे की यह सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। बच्चे के जन्म से ही दोनों बाहरी कान नहीं थे। इसी दिन सुनने की गंभीर समस्या से जुड़े दो अन्य मरीजों की काक्लियर इम्प्लांट सर्जरी भी की गई। इनमें एक बच्चा और एक वयस्क है। एम्स पटना के हियरिंग इम्प्लांट कार्यक्रम में अबतक 400 से अधिक सर्जरी हो चुकी हैं। सर्जरी का नेतृत्व डॉ. क्रांति भावना ने किया। मौके पर ईएनटी विभाग ने हियरिंग साल्यूशंस पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) का आयोजन किया। इसमें डॉ. क्रांति भावना, अतिथि विशेषज्ञ डॉ. राजेश विश्वकर्मा व डा. लीना विश्वकर्मा ने सुनने से जुड़ी समस्याओं और उनके आधुनिक उपचार पर प्रकाश डाला। बोन कंडक्शन इम्प्लांट की सर्जरी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत की गई। सामान्य तौर पर आवाज हवा के माध्यम से कान की नली, पर्दे और मध्य कान की छोटी हड्डियों से गुजरते हुए अंदरूनी कान तक पहुंचती है। कुछ बच्चों में जन्म से ही बाहरी कान या कान की नली पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसे मेडिकल भाषा में माइक्रोटिया और एट्रेसिया कहा जाता है। ऐसे बच्चों में आवाज अंदरूनी कान तक पहुंचने में बाधा आती है। बोन कंडक्शन इम्प्लांट इस बाधा को दूर करने में मदद करता है। यह उपकरण आवाज को कंपन में बदलता है। ये कंपन खोपड़ी की हड्डियों के माध्यम से सीधे अंदरूनी कान तक पहुंचते हैं। इस तरह बाहरी और मध्य कान की खराबी को दरकिनार कर सुनने में मदद मिलती है। यह तकनीक सिर्फ सुनने तक सीमित नहीं है। बचपन में सुनने की समस्या की पहचान और समय पर उपचार नहीं होने से बच्चे के बोलने, भाषा सीखने और पढ़ाई करने की क्षमता प्रभावित होती है। बाहरी या मध्य कान की बनावट में कमी होने पर खोपड़ी की हड्डियों के कंपन से आवाज अंदरूनी कान तक पहुंचाता है। जब अंदरूनी कान की सुनने वाली कोशिकाएं ठीक से काम नहीं करतीं और सामान्य हियरिंग एड से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता, तब यह तकनीक उपयोगी होती है। इसमें आवाज को विद्युत संकेतों में बदलकर सुनने की नस तक पहुंचाया जाता है। - दोनों ही मामलों में सर्जरी के बाद डिवाइस की सेटिंग, नियमित जांच और सुनने-बोलने का अभ्यास महत्वपूर्ण होता है। इम्प्लांट से सामान्य सुनने की क्षमता की गारंटी नहीं होती। परिणाम मरीज की स्थिति और उपचार बाद मिलने वाले प्रशिक्षण पर निर्भर करते हैं। 9 हजार एकड़ खेतों को मिलेगा पानी, बिहार में डोर नदी पर बनेगा चेक डैम, किसानों को फायदा मुंगेर वानिकी कॉलेज के छात्रों को 25 हजार मानदेय! वन विभाग में मिलेगी इंटर्नशिप, BAU के VC ने दी बस और एंबुलेंस
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Nov 3, 2026, 04:31 AM
छात्र के ड्रोन फंडिंग के दावे को झूठा बताया गया

छात्र के ड्रोन फंडिंग के दावे को झूठा बताया गया

ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर होने का दावा करने वाले छात्र सर्वेश शर्मा के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सर्वेश न तो जोधपुर गया था और न ही आईआईटी जोधपुर की ओर से ड्रोन प्रतियोगिता में उसका पंजीकरण मिला है। आईआईटी के जनसंपर्क विभाग ने प्रतियोगिता में उसकी भागीदारी से मना किया है। ऐसे में चौथा स्थान हासिल करने का दावा भी सवालों के घेरे में आ गया है।
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Amar Ujala
Nov 3, 2026, 03:35 AM
भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में 75 दिनों की इंटर्नशिप की पेशकश की

भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में 75 दिनों की इंटर्नशिप की पेशकश की

यह इंटर्नशिप कुल 75 दिनों की होगी। इसके शुरुआती 15 दिनों में ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि अगले 60 दिनों में प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और व्यावहारिक कार्यों का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के लिए उधमपुर, श्रीनगर और लेह केंद्र निर्धारित किए गए हैं। यह अवसर युवाओं को अपने विषय से जुड़े कौशल को निखारने में मदद करेगा।विज्ञापनइंटर्नशिप के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी एवं एथिकल हैकिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग एवं क्रिप्टोग्राफी, ड्रोन एवं अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स एवं ऑटोनॉमस सिस्टम, स्पेस एवं सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड वेपन सिस्टम, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, 5जी/6जी एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, फिनटेक, मंदारिन भाषा अनुवाद तथा मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया जैसे प्रमुख क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। इस तरह यह कार्यक्रम तकनीकी विषयों के अलावा भाषा, वित्त और मीडिया में रुचि रखने वाले योग्य अभ्यर्थियों के लिए भी अवसर प्रदान करता है।विज्ञापनसभी क्षेत्रों के लिए समान शैक्षणिक योग्यता, आयु-सीमा और चयन प्रक्रिया निर्धारित होने की पुष्टि उपलब्ध घोषणा में नहीं की गई है। ऐसे में, इच्छुक अभ्यर्थियों को अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के अनुसार संबंधित इंटर्नशिप की पात्रता शर्तें, आवश्यक दस्तावेज, चयन प्रक्रिया और कार्यस्थल से जुड़ी जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर अवश्य जांच लेनी चाहिए। इस कार्यक्रम के तहत चयनित अभ्यर्थियों को इंटर्नशिप के लिए 75,000 रुपये स्टाइपेंड दिए जाएंगे।इंटर्नशिप की शुरुआत एक दिसंबर, 2026 से होगी।आवेदन करने की अंतिम तिथि पांच नवंबर, 2026 निर्धारित की गई है।इच्छुक उम्मीदवार आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल internship.aicte-india.org/dashboards/indianarmy पर विजिट करें।
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Nov 3, 2026, 03:31 AM
स्मार्ट गैजेट्स दिवाली की सफाई को आसान बनाते हैंः रोबोट वैक्यूम क्लीनर और बहुत कुछ

स्मार्ट गैजेट्स दिवाली की सफाई को आसान बनाते हैंः रोबोट वैक्यूम क्लीनर और बहुत कुछ

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। दिवाली का त्योहार नजदीक आ रहा है और ऐसे में अभी घरों में साफ-सफाई का काम जारी है। घर के हर एक कोने से लेकर किचन, फर्नीचर और यहां तक की पंखे और फर्श तक की सफाई करना किसी बड़े टास्क जैसा लगता है। ऐसे में अगर आप भी दिवाली की सफाई को आसान और कम टाइम में पूरा करना चाहते हैं, तो मार्केट में आजकल कुछ स्मार्ट गैजेट्स आ गए हैं। इन गैजेट्स की मदद से आप न सिर्फ सफाई का काम आसान बना सकते हैं, बल्कि मेहनत और टाइम भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ जबरदस्त गैजेट्स के बारे में… दिवाली की सफाई के लिए रोबोट वैक्यूम क्लीनर एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। मार्केट में आपको 20 से 30 हजार रुपये की रेंज में एक अच्छा रोबोट वैक्यूम क्लीनर मिल जाएगा। ये बिना किसी की मदद के घर के फर्श से धूल, मिट्टी और छोटे कचरे को क्लीन कर देगा। कई मॉडल में मैपिंग और ऑटोमैटिक चार्जिंग जैसे फीचर्स भी देखने को मिल जाते हैं। जबकि कुछ रोबोट वैक्यूम क्लीनर में मॉपिंग की सुविधा भी ऑफर करते है। ऐसे में आप अपनी सुविधा और बजट के मुताबिक एक अच्छा रोबोट वैक्यूम क्लीनर चुन सकते हैं। बाथरूम की टाइल्स, किचन के कोने और जिद्दी दागों को अच्छे से क्लीन करने के लिए आप इलेक्ट्रिक स्पिन स्क्रबर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें घूमने वाले ब्रश देखने को मिलते हैं, जो कम मेहनत में गंदगी हटाने में काफी ज्यादा मदद कर सकते हैं। मार्केट और ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स जैसे Amazon, Flipkart या Meesho पर ये ₹1,500 से ₹3,000 की रेंज में मिल जाते हैं। ऐसे टाइम पर घर की विंडो और कांच के दरवाजों को क्लीन करना काफी मुश्किल काम लगता है। यहां आप विंडो क्लीनिंग रोबोट इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे कांच की सरफेस पर लगाकर सफाई की जा सकती है। हालांकि इस्तेमाल के दौरान कंपनी के सेफ्टी निर्देशों को जरूर फॉलो करें। ऐसे रोबोट आपको मार्केट में और ऑनलाइन 8 से 10 हजार रुपये की प्राइस रेंज में देखने को मिल जाएंगे। इस दिवाली की सफाई में हैंडहेल्ड वैक्यूम क्लीनर आपकी काफी मदद कर सकता है। इससे आप न सिर्फ सोफा, बेड और कार बल्कि घर के छोटे कोनों में जमी धूल भी अच्छे से क्लीन कर सकते हैं। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन इसे आसानी से यूज करने की सुविधा देता है। इससे उन एरिया की सफाई भी आसान हो जाती है, जहां बड़े वैक्यूम क्लीनर पहुंचने में दिक्कत होती है। दिवाली से पहले iPhone 16 पर डिस्काउंट: 48MP फ्यूजन कैमरा, A18 चिपसेट और बेहतर बैटरी लाइफ
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Nov 2, 2026, 09:27 PM
गोरखपुर की महिलाएं बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग इनोवेशन के साथ चमकती हैं, जिन्हें राष्ट्रीय मान्यता मिली है

गोरखपुर की महिलाएं बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग इनोवेशन के साथ चमकती हैं, जिन्हें राष्ट्रीय मान्यता मिली है

- कैबिनेट सचिवालय की पहल पर राष्ट्रीय स्तर पर हुआ चयन- यूपी के गोरखपुर समेत बहराइच व मिर्जापुर के नवाचारों को मिली जगहगोरखपुर। गांव की महिलाओं ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के दम पर गोरखपुर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। खजनी विकासखंड के छताई ग्राम पंचायत में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से बायोफ्लॉक तकनीक से किया जा रहा मछली पालन अब देशभर के लिए एक मिसाल बन गया है। महिलाओं की इस पहल को भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने देश की 27 सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक कार्यप्रणालियों में शामिल किया है। इसके साथ ही प्रदेश के मिर्जापुर और बहराइच जिले के नवाचारों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।छताई गांव में जलपरी प्रेरणा महिला फिशरीज प्रोड्यूसर ग्रुप की महिलाएं बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर रही हैं। इसके लिए गांव में पांच यूनिट स्थापित की गई हैं। खास बात यह है कि महिलाओं ने पारंपरिक तालाब आधारित मछली पालन के बजाय आधुनिक तकनीक को अपनाकर आजीविका का नया रास्ता तैयार किया है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के साथ उन्हें सामूहिक उद्यमी के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।विज्ञापनबायोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि इसमें कम जगह और सीमित पानी में भी वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन किया जा सकता है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन, मछलियों के पोषण और बीमारियों से बचाव पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। इससे उन महिलाओं के लिए भी मछली पालन का अवसर तैयार हुआ है, जिनके पास बड़े तालाब या पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध नहीं है।विज्ञापन--------------केंद्रीय टीम ने गांव पहुंचकर परखी कार्यप्रणालीराष्ट्रीय स्तर पर चयन से पहले केंद्रीय टीम ने छताई गांव पहुंचकर इस मॉडल का स्थलीय निरीक्षण किया था। टीम ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत कर यूनिट के संचालन, मछलियों के पोषण, पानी की गुणवत्ता, बिजली की उपलब्धता और बीमारियों से बचाव के तरीकों की जानकारी ली। महिलाओं ने भविष्य में यूनिट की संख्या बढ़ाने और उत्पादन क्षमता का विस्तार करने की इच्छा भी जताई। इसके लिए उन्होंने तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से बेहतर जुड़ाव की जरूरत बताई।चयनित हुए इन जिलों के भी मॉडलउत्तर प्रदेश से गोरखपुर के अलावा बहराइच और मिर्जापुर के मॉडल भी चयनित हुए हैं। बहराइच के मिहींपुरवा विकासखंड के घुमना भारू ग्राम पंचायत में 43 किलोवाट क्षमता का सामुदायिक सौर ऊर्जा माइक्रोग्रिड स्थापित किया गया है। इससे करीब 200 परिवारों की 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए 10 सोलर पंप संचालित हो रहे हैं। वहीं, मिर्जापुर के छानवे विकासखंड में महिलाओं की ओर से संचालित छंवर एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने कृषि क्षेत्र में सामूहिक उद्यम का मॉडल प्रस्तुत किया हैछताई ग्राम पंचायत में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह की यह पहल जिले के समूहों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे अन्य समूहों को भी पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़कर नए उद्यम अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।संजय कुमार नायक, उपायुक्त स्वत: रोजगार
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Nov 2, 2026, 08:29 PM
सिविल अस्पताल में देरी को कम करने और उपचार की सटीकता में सुधार के लिए स्वचालित रक्त संवर्धन मशीन

सिविल अस्पताल में देरी को कम करने और उपचार की सटीकता में सुधार के लिए स्वचालित रक्त संवर्धन मशीन

नागरिक अस्पताल में नवंबर में ही ऑटोमेटेड ब्लड कल्चर इक्विपमेंट मशीन स्थापित की जाएगी। इस मशीन से मरीज के खून में मौजूद बैक्टीरिया की पहचान होगी। साथ ही यह भी पता चलेगा कि उस बैक्टीरिया पर कौन सी एंटीबायोटिक दवा असर करेगी।विज्ञापनअभी जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर संक्रमण के मरीजों को कई बार जांच के लिए दूसरे अस्पतालों या निजी लैब का रुख करना पड़ता है। वहीं, कई मरीजों को शुरुआत में लक्षणों के आधार पर एंटीबायोटिक दे दी जाती है लेकिन पहली दवा असर नहीं करती तो डॉक्टर को दूसरी दवा देनी पड़ती है। इससे इलाज में देरी होती है। मरीज को दोबारा जांच और इलाज के लिए अस्पताल आना पड़ता है।विज्ञापननई मशीन शुरू होने से इस परेशानी को कम करने में मदद मिलेगी। डॉक्टरों को संक्रमण के कारण और प्रभावी दवा की जानकारी एक ही अस्पताल में मिल सकेगी। इससे मरीज का इलाज समय पर और अधिक सटीक तरीके से हो सकेगा।रोजाना 700 मरीजों की लैब में होती है जांचनागरिक अस्पताल में रोजाना 1700 से 1900 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या बुखार और संक्रमण से पीड़ित मरीजों की होती है। अस्पताल की लैब में प्रतिदिन करीब 700 मरीजों के रक्त के विभिन्न टेस्ट किए जाते हैं। ऐसे में ऑटोमेटेड ब्लड कल्चर इक्विपमेंट मशीन स्थापित होने से बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है।खून का नमूना डालते ही मशीन शुरू करेगी निगरानी, फिर होगी दवा की जांचऑटोमेटेड ब्लड कल्चर इक्विपमेंट मशीन में मरीज के खून का नमूना विशेष कल्चर बोतल में रखा जाएगा। इसके बाद मशीन लगातार उस नमूने की निगरानी करेगी। खून में बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीवों की वृद्धि होने पर मशीन संकेत देगी। इसके बाद उनकी पहचान की जाएगी। अगले चरण में एंटीबायोटिक सेंसिटिविटी टेस्ट होगा। इसमें अलग-अलग एंटीबायोटिक दवाओं का बैक्टीरिया पर असर जांचा जाएगा। रिपोर्ट से पता चल जाएगा कि कौन सी दवा प्रभावी है और कौन सी बेअसर। इसके आधार पर डॉक्टर मरीज की दवा तय कर सकेंगे।109 से बढ़कर 130 तरह की होंगी जांचअस्पताल की लैब में फिलहाल करीब 109 तरह की जांच की सुविधा है। पिछले 15 दिनों में रक्त कल्चर से संबंधित 20 तरह के अलग-अलग टेस्ट भी शुरू किए गए हैं। नई मशीन स्थापित होने के बाद जांच का दायरा बढ़कर करीब 130 तरह का हो जाएगा। इसमें ब्लड कल्चर, यूरिन कल्चर और संक्रमण से जुड़ी अन्य जांच शामिल होंगी।वर्जनऑटोमेटेड ब्लड कल्चर इक्विपमेंट मशीन स्थापित होने से लंबे समय से बुखार, गंभीर संक्रमण और खून में बैक्टीरिया होने की आशंका वाले मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्हें जांच के लिए दूसरे अस्पतालों या निजी लैब में जाने की जरूरत कम होगी। जांच से प्रभावी एंटीबायोटिक की पहचान हो सकेगी। इससे बेअसर दवाओं के इस्तेमाल और दवा बदलने में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलेगी।-डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
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