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May 5, 2026, 02:34 PM
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई

विस्तारAdd as a preferredsource on googleहिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब सभी प्रवेश परीक्षा आधारित और मेरिट आधारित पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन 12 मई तक किए जा सकेंगे। तिथि बढ़ाने का लाभ उन अभ्यर्थियों को मिलेगा जो किसी कारणवश निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे। विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों की आवेदन तिथि बढ़ाई गई है। इनमें प्रवेश परीक्षा आधारित पाठ्यक्रमों के साथ-साथ मेरिट आधारित कोर्स भी शामिल हैं, जैसे पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन का प्रथम वर्ष एकीकृत पाठ्यक्रम और होटल प्रबंधन में स्नातक पाठ्यक्रम। आवेदन की अंतिम तिथि के अलावा प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े अन्य सभी नियम और शर्तें पूर्ववत रहेंगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।और पढ़ेंTrending Videosएचपीयू में डाटा साइंस, एआई इंटेलीजेंस समेत 3 पाठ्यक्रम होंगे शुरूहिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल की स्थायी समिति की बैठक में कई अहम शैक्षणिक फैसले लिए गए। बैठक में सत्र 2026-27 से जुड़े ढांचे, नए पाठ्यक्रमों और शोध संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। समिति ने महाविद्यालय स्तर पर क्षमता संवर्धन एवं विकास कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही बीएससी डाटा साइंस और बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित तीन नए पाठ्यक्रम शुरू करने को स्वीकृति दी गई। इससे तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नई शिक्षा नीति के तहत तीसरे से छठे सेमेस्टर के पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी गई। स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को भी स्वीकृति दी गई। महाविद्यालयों में क्रेडिट ढांचा लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे बहुविषयक अध्ययन प्रणाली को मजबूती मिलेगी।विज्ञापनविज्ञापनसमिति ने पार्टटाइम शोध डिग्री कार्यक्रम को भी अंतिम स्वीकृति दी। इससे नौकरीपेशा अभ्यर्थियों को शोध कार्य करने का अवसर मिलेगा। बैठक में कुलपति प्रो. महावीर सिंह, अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य बीके शिवराम, सभी संकाय अधिष्ठाता और कुलपति के नामित सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा विभागों के वरिष्ठ शैक्षणिक अधिकारी और समिति के सदस्य भी शामिल हुए। 2026-27 के सत्र से महाविद्यालयों में क्षमता संवर्धन एवं विकास कार्यक्रम लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों के कौशल, संचार क्षमता और व्यावहारिक समझ को विकसित करना है। कार्यक्रम के तहत सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और कौशल आधारित प्रशिक्षण को भी शामिल किया जाएगा। इससे पारंपरिक पढ़ाई के साथ छात्रों के समग्र विकास पर जोर रहेगा और उन्हें प्रतिस्पर्धी माहौल के लिए तैयार किया जा सकेगा।प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा ढांचे में बदलावबैठक में स्नातकोत्तर स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को मंजूरी दी गई। इसके साथ परीक्षा ढांचे को नई शिक्षा नीति के अनुरूप ढालने पर सहमति बनी। इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मानकीकृत होने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में एकरूपता लाने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।शोध में बढ़ेगी भागीदारी, नई व्यवस्था लागूपार्टटाइम शोध डिग्री कार्यक्रम को मंजूरी मिलने के बाद अब नौकरीपेशा अभ्यर्थी भी शोध कार्य कर सकेंगे। इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों का दायरा बढ़ने की संभावना है। कई क्षेत्रों में कार्यरत पेशेवरों के जुड़ने से शोध की गुणवत्ता और उपयोगिता में सुधार आएगा। इससे अकादमिक और व्यावहारिक क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
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May 5, 2026, 02:08 PM
श्रीनगर में अत्याधुनिक कैथ लैब खोली गई, जिससे दिल की देखभाल घर के करीब आ गई

श्रीनगर में अत्याधुनिक कैथ लैब खोली गई, जिससे दिल की देखभाल घर के करीब आ गई

श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय में लंबे समय से प्रतीक्षित कैथ लैब अब शुरू होने जा रही है। 8 मई से इस अत्याधुनिक सुविधा का संचालन होगा जिसके साथ ही अस्पताल में हृदय रोग से जुड़े ऑपरेशन और जांचें भी शुरू हो जाएंगी।और पढ़ेंTrending Videosदून अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमर उपाध्याय 8 मई और 9 मई को बेस अस्पताल में सेवाएं देंगे। वह ओपीडी में मरीजों की जांच के साथ-साथ कार्डियक ऑपरेशन भी करेंगे। विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता से स्थानीय मरीजों को अब बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने सभागार में मेडिसिन विभाग, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के साथ बैठक कर सभी दवा, ऑपरेशन संबंधित सभी जरूरतों के साथ अन्य व्यवस्थाएं बृहस्पतिवार तक पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश रावत समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी आदि मौजूद रहे। संवादविज्ञापनविज्ञापन
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May 5, 2026, 12:13 PM
ए. आई. मॉडलों के तेजी से विकास ने नौकरी की चिंताओं को जन्म दिया

ए. आई. मॉडलों के तेजी से विकास ने नौकरी की चिंताओं को जन्म दिया

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में पिछले महीने (अप्रैल 2026) में जो हुआ, उसने टेक एक्सपर्ट्स को भी चौंका दिया। महज 8-10 दिनों के अंदर 3 बड़ी कंपनियों ने अपने सबसे अडवांस AI मॉडल लॉन्च किए। ये मॉडल अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद सोच-समझकर पूरे काम को अंजाम दे सकते हैं। यही वजह है कि AI डिवेलपमेंट की इस तेज रफ्तार को बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इन मॉडलों के लॉन्च होने से खुश होने के बजाए चिंता अधिक है। सबसे बड़ी चिंता नौकरी पर असर को लेकर है। डेटा एंट्री, बेसिक कोडिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसी नौकरियां तेजी से प्रभावित हो सकती हैं।2 साल का काम, कुछ हफ्तों मेइन तीनों लॉन्च के बीच का समय बहुत कम था, इसी वजह से दुनियाभर के एक्सपर्ट टेंशन में हैं। पहले नई AI तकनीक आने में एक से दो साल का समय लगता था। अब कंपनियां हर कुछ हफ्तों या महीनों में नए और ज्यादा पावरफुल मॉडल लेकर आ रही हैं। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि AI डिवेलपमेंट में जो टाइमलाइन सेट की गई थीं, उससे काफी पहले रिजल्ट मिल सकते हैं। कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ने से AI की कीमत घटेगी और आम लोगों को बेहतर टूल्स कम दाम में मिलेंगे। इससे लोगों का समय बचेगा और काम की स्पीड बढ़ेगी। लेकिन, इस जल्दबाजी के कुछ खतरे भी हैं…।AI मॉडलों के कारण 4 प्रमुख चिंताएंसबसे बड़ी चिंता नौकरी पर असर को लेकर है, क्योंकि मार्केट इतनी तेजी से नौकरी में हुए बदलाव को स्वीकार करने लायक अभी नहीं है। डेटा एंट्री, बेसिक कोडिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसी नौकरियां तेजी से प्रभावित हो सकती हैं।AI पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, इसलिए गलत जानकारी या गलत फैसलों का खतरा बना रहता है, जो बिजनेस या अन्य जरूरी कामों में नुकसान पहुंचा सकता है। तेजी से डिवेलपमेंट हुआ तो यह खतरा और ज्यादा बढ़ सकता है।प्राइवेसी भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि AI को काम करने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा चाहिए होता है, जिससे निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ता है। जल्दबाजी में ट्रेन हुए मॉडल के डेटा सैंपल पर भी सवाल उठ रहे हैं।तेजी के साथ नए मॉडल्स लॉन्च होने की वजह से लोगों की AI पर निर्भरता काफी रफ्तार में बढ़ रही है। इससे उनकी खुद सोचने और सीखने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। तेजी से हो रहे बदलाव के कारण लोगों में भ्रम और दबाव भी बढ़ सकता है।लॉन्‍च हुए ये मॉडल: GPT-5.5सबसे पहले 23 अप्रैल के आसपास OpenAI के ChatGPT ने अपना नया मॉडलGPT-5.5पेश किया। इस मॉडल की सबसे खास बात है इसकी एजेंटिक क्षमता है। यानी GPT-5.5 सिर्फ आपकी बात समझकर जवाब नहीं देता, बल्कि खुद तय करता है कि काम कैसे पूरा करना है। अगर उसे कोई टास्क दें, जैसे रिपोर्ट बनाना, कोड लिखना या डेटा एनालिसिस तो यह खुद प्लान बनाकर, जरूरी टूल्स का इस्तेमाल करके काम पूरा कर सकता है। OpenAI इसे एजेंट-ड्रिवन इकॉनमी की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, जहां AI सिर्फ सहायक नहीं बल्कि काम करने वाला डिजिटल कर्मचारी बन जाएगा।Claude Opus 4.7इसी के कुछ ही दिनों बाद Anthropic ने Claude Opus 4.7 लॉन्च किया। यह मॉडल खासतौर पर जटिल समस्याओं को समझने और लंबे समय तक लगातार काम करने में माहिर है। इसे ऐसे समझिए जैसे कोई इंसान घंटों बैठकर किसी कठिन समस्या का हल निकालता है। कोडिंग और सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट में यह मॉडल अल्टीमेट है। SWE-bench जैसे टेस्ट, जहां AI को असली कोडिंग समस्याएं हल करनी होती हैं, उसमें इसका प्रदर्शन काफी शानदार रहा।DeepSeek V4फिर 24 अप्रैल को चीन की कंपनी DeepSeek ने अपना V4 मॉडल पेश किया। इसने सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि यह ओपन-सोर्स है। मतलब कोई भी इसे इस्तेमाल कर सकता है। इसमें करीब 1.6 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं, जो इसे बेहद पावरफुल बनाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह GPT-5.5 और Claude जैसे मॉडल्स के करीब प्रदर्शन करता है, लेकिन GPT-5.5 और Claude इससे करीब 6 गुना ज्यादा खर्चिले हैं। यह मॉडल Huawei के चिप्स पर चलता है, जिससे टेक्नोलॉजी के ग्लोबल मुकाबले में भी नई हलचल देखने को मिल रही है।
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May 5, 2026, 11:22 AM
अंडा फ्रीजिंग क्रेजः भारत में महिलाओं के लिए एक नया विकल्प

अंडा फ्रीजिंग क्रेजः भारत में महिलाओं के लिए एक नया विकल्प

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाओं की प्राथमिकता तेजी से बदल रही है. पढ़ाई, करियर और आर्थिक स्थिरता के बीच मां बनने का फैसला अक्सर टलता जा रहा है, लेकिन शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है जो समय के साथ बदलती रहती है. ऐसे में आधुनिक मेडिकल तकनीक ने महिलाओं को एग फ्रीजिंग का एक नया ऑप्शन दिया है. पिछले कुछ सालों में भारत के बड़े शहरों में एग फ्रीजिंग की तकनीक को लेकर रुचि तेजी से बढ़ी है और अब ज्यादा महिलाएं इसे अपने लगी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एग फ्रीजिंग का क्रेज तेजी से कैसे बढ़ रहा है और यह तरीका कितना दर्दनाक होता है. एग फ्रीजिंग, जिसे मेडिकल भाषा में ओओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन कहा जाता है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें महिला के अंडों को निकालकर बहुत कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है. बाद में जब महिला मां बनने के लिए तैयार होती है तो इन्हीं अंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका मकसद अंडों की मौजूदा गुणवत्ता को सुरक्षित रखना होता है, ताकि बढ़ती उम्र का असर उन पर न पड़े. एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया की शुरुआत फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लेने से होती है. इसके बाद महिलाओं को कुछ समय तक हार्मोनल दवाएं दी जाती है, जिससे अंडों का उत्पादन बढ़ाया जा सके. जब अंडे तैयार हो जाते हैं तो एक छोटी मेडिकल प्रक्रिया के जरिए उन्हें शरीर से निकाला जाता है. इसके बाद इन अंडों को विशेष तकनीक से फ्रिज करके सुरक्षित स्टोर कर लिया जाता है. एग फ्रीजिंग को आमतौर पर सुरक्षित प्रक्रिया माना जाता है और यह बहुत दर्दनाक नहीं होती है. हालांकि हार्मोनल दवाओं के कारण कुछ महिलाओं को सूजन, मूड स्विंग, सिर दर्द या थकान जैसी समस्या हो सकती है. अंडे निकालने के बाद अगला हल्का दर्द या असहजता महसूस हो सकती है. लेकिन यह लक्षण आमतौर पर कुछ समय में ठीक हो जाते हैं. हालांकि गंभीर समस्याएं बहुत कम मामलों में देखने को मिलती है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार एग फ्रीजिंग के लिए 30 से 34 साल की उम्र सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस समय अंडों की गुणवत्ता और संख्या बेहतर होती है. 35 साल के बाद फर्टिलिटी में गिरावट शुरू हो जाती है, जिससे सफलता की संभावना कब हो सकती है. आजकल कई महिलाएं करियर या पर्सनल कारणों से देर से शादी या मां बनने का फैसला करती है. इसके अलावा कुछ मेडिकल स्थितियों जैसे कैंसर या हार्मोनल समस्याओं के कारण भी एग फ्रीजिंग एक ऑप्शन बन जाता है. यही वजह है कि बड़े शहरों में इस तकनीक को लेकर जागरूकता और मांग दोनों बढ़ रही है. वहीं आपको बता दे की एग फ्रीजिंग का खर्च अलग-अलग क्लीनिक और शहरों के हिसाब से बदल सकता है. आमतौर पर एक साइकिल का खर्च करीब 1 लाख से 2.5 लख रुपये के बीच होता है. इसके अलावा अंडों को स्टोर करने का सालाना खर्च भी अलग से देना पड़ता है. कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.
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May 5, 2026, 10:00 AM
ओपनएआई एआई-संचालित स्मार्टफोन के साथ एप्पल और सैमसंग को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है

ओपनएआई एआई-संचालित स्मार्टफोन के साथ एप्पल और सैमसंग को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है

ChatGPT को बनाने वाली एआई कंपनी OpenAI अब Apple और Samsung को चुनौती देने की तैयारी कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी पहले एआई फोन पर काम कर रही है, इसमें, कई ऐप्स के बीच नेविगेट करने के बजाय, यूजर्स अपने काम पूरे करने के लिए AI पर निर्भर रहेंगे. एनालिस्ट मिंग-ची कुओ ने एक X पोस्ट में बताया है कि OpenAI अपने पहले AI एजेंट स्मार्टफोन के डेवलपमेंट को तेजी से आगे बढ़ा रही है और उम्मीद है कि 2027 की पहली छमाही तक इसका बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. कुओ के अनुसार, AI पावर्ड स्मार्टफोन या एजेंट फोन के क्षेत्र में बढ़ता मुकाबला है, जहां कंपनियां ज्यादा एडवांस्ड AI फ़ीचर्स देने की होड़ में लगी हैं. X पर अपनी पिछली पोस्ट में, Kuo ने बताया था कि OpenAI ने स्मार्टफोन के लिए प्रोसेसर बनाने के लिए MediaTek और Qualcomm दोनों के साथ पार्टनरशिप की है. हालांकि, ऐसा लगता है कि बेहतर स्पेसिफिकेशन्स की वजह से OpenAI ने स्मार्टफोन के प्रोसेसर के लिए MediaTek को ही एकमात्र सप्लायर के तौर पर फाइनल कर लिया है. स्मार्टफोन का प्रोसेसर Dimensity 9600 पर आधारित होगा और इसे TSMC N2P नोड (2nm-क्लास सेमीकंडक्टर नोड) का इस्तेमाल कर बनाया जाएगा उम्मीद है कि इसका प्रोडक्शन 2026 की दूसरी छमाही में शुरू हो सकता है. अन्य मुख्य फीचर्स की बात करें तो AI कंप्यूट के लिए डुअल-NPU आर्किटेक्चर, मेमोरी की रुकावटों को दूर करने के लिए LPDDR6 + UFS 5.0 और सुरक्षा के लिए pKVM और इनलाइन हैशिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. मिंग-ची कुओ ने एक X पोस्ट में लिखा है कि अगर डेवलपमेंट सही रफ्तार से चलता रहा, तो 20272028 में कुल शिपमेंट लगभग 30 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकता है. Kuo ने फोन के बारे में अपनी पिछली पोस्ट में कहा कि OpenAI अब AI एजेंट फोन पर फ़ोकस कर रहा है, क्योंकि फोन में लोकेशन, एक्टिविटी, कम्युनिकेशन और कॉन्टेक्स्ट तक पहुंच होती है; जिसकी वजह से AI एजेंट किसी भी दूसरे डिवाइस के मुकाबले फोन पर ज्यादा बेहतर काम करते हैं. बिज़नेस मॉडल की बात करें तो, OpenAI हार्डवेयर के साथ सब्सक्रिप्शन को बंडल कर सकता है और डेवलपर्स को शामिल करते हुए एक नया AI एजेंट इकोसिस्टम बना सकता है. ये भी पढ़ें-12,000 रुपए तक की छूट, OnePlus Summer Sale में सस्ता मिल रहा ये फोन टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.
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May 5, 2026, 07:58 AM
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य दीनदयाल गाय विज्ञान अनुसंधान केंद्र का दौरा करेंगे

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य दीनदयाल गाय विज्ञान अनुसंधान केंद्र का दौरा करेंगे

विस्तारAdd as a preferredsource on googleउत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 13 मई को दीनदयाल गो विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र गऊग्राम परखम आएंगे। वह यहां दीनदयाल कामधेनु गोशाला समिति के तत्वावधान में संचालित विभिन्न प्रकल्पों का लोकार्पण करेंगे।और पढ़ेंTrending Videosरविवार को परखम स्थित अशोक सिंघल सभागार में आयोजित बैठक में समिति के मंत्री हरिशंकर शर्मा ने बताया कि 13 मई को हवन, गृह प्रवेश एवं भूमि पूजन कार्यक्रम प्रातः 10ः30 से केंद्र पर होगा। लोकार्पण कार्यक्रम दोपहर 1 एक बजे से नवधा सभागार में रखा गया है। इस अवसर पर निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर डॉ स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज और कथा मर्मज्ञ विजय कौशल महाराज का आशीर्वचन प्राप्त होगा।विज्ञापनविज्ञापनउपमुख्यमंत्री छात्राओं के हॉस्टल, पशु चिकित्सालय, स्टूडियो व हर्बल गार्डन का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर कन्वेशन सेंटर और स्टाफ क्वार्टर के भूमि पूजन और बुनकर केंद्र में स्थापित नवीन मशीन के पूजन का कार्यक्रम भी होगा।भोजन व्यवस्था में शिवकुमार शर्मा, जगमोहन पाठक, महिपाल, नत्थीलाल, अमित जैन, पूजन व्यवस्था में राकेश शर्मा, अतिथि व्यवस्था में शशिकांत, विनीत शर्मा, मनोज, राम पाठक रहेंगे। मंच व्यवस्था चंदशेखर एवं मीडिया प्रबंधन मुकेश शर्मा देखेंगे। अन्य व्यवस्थाओं में गोविंद, देवेंद्र प्रताप सिंह, ब्रजेश, नरेंद्र पाठक, उमेश शर्मा, जगदीश रहेंगे। बैठक में संयोजक अजीत महापात्र, डॉ अनुराग शर्मा, डॉॅॅ. केएमएल पाठक, मनोज एवं चंद्रशेखर आदि उपस्थित रहे।
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May 5, 2026, 06:41 AM
छत्तीसगढ़ सरकार ने अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया

छत्तीसगढ़ सरकार ने अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleछत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर आंशिक बदलाव करते हुए कुछ अधिकारियों के प्रभार में परिवर्तन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में विभागीय जिम्मेदारियों के पुनर्विन्यास की जानकारी दी गई है।और पढ़ेंTrending Videosआदेश के मुताबिक, अंकिता गर्ग को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। वे अब केवल कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग में उप सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी।विज्ञापनविज्ञापनवहीं, खनिज साधन विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत सरोज उईके को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव के साथ अब वे दोनों विभागों के कार्यों का समन्वय संभालेंगी।यहां देखें आदेश की कॉपी
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May 5, 2026, 06:31 AM
एएसआई ने वृंदावन में ठाकुर मदन मोहन मंदिर में काली दीवारों का जीर्णोद्धार पूरा किया

एएसआई ने वृंदावन में ठाकुर मदन मोहन मंदिर में काली दीवारों का जीर्णोद्धार पूरा किया

विस्तारAdd as a preferredsource on googleवृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर मदन मोहन मंदिर की दीवारें चमक गई हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की विज्ञान शाखा ने पानी के कारण दीवारों पर जमा काई और प्रदूषण से काले पड़े पत्थरों का केमिकल ट्रीटमेंट किया है, जिसके बाद मंदिर पहले जैसा नजर आने लगा है। एएसआई ने मदन मोहन मंदिर की बाहरी दीवारों पर केमिकल ट्रीटमेंट में पहले चरण में 22 लाख रुपये खर्च किए हैं।और पढ़ेंTrending Videosभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीक्षण रसायन पुरातत्वविद रंजना पुष्कर की निगरानी में वृंदावन के ठाकुर मदन मोहन मंदिर की दीवारों से काई हटाने का काम किया गया। उन्होंने बताया कि बीते साल शुरू किया गया पहले चरण का काम अब पूरा हो गया है। विज्ञान शाखा की टीम ने मंदिर की दीवारों पर वर्षों से प्रदूषण, धूल और कालिख जमा होने से काले पड़ गए लाल पत्थरों की दीवारों का साफ किया। वैज्ञानिक विधि से सफाई कर उन्हें मूल स्वरूप में लाया गया है।विज्ञापनविज्ञापनमंदिर के शिखर से नीचे तक बाहरी दीवारों पर जमा काई और प्रदूषण की काली परत को हटाने के लिए विशेष रसायनों का इस्तेमाल किया गया। उसके बाद दीवारों के संरक्षण के लिए विशेष लेप लगाया गया। करीब 6 माह तक मंदिर की बाहरी दीवारों पर काम चला है। एएसआई मंदिर के अंदर की दीवारों को भी साफ करने की योजना बना रहा है, जिससे दीवारें फिर से बेहतर नजर आ सकें। यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है।37 लाख रुपये से होगा दीवार का संरक्षणभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मदन मोहन मंदिर की उत्तरी दीवार की ओर बाउंड्री के निर्माण की योजना बनाई है। इस पर 37 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस वित्तीय वर्ष में यह काम पूरा कर लिया जाएगा। एएसआई की निर्माण शाखा ने उत्तरी दीवार के संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की है।
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May 4, 2026, 01:30 PM
अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों का ध्यान तकनीक से हट गया क्योंकि ए. आई. युग सामने आ रहा है

अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों का ध्यान तकनीक से हट गया क्योंकि ए. आई. युग सामने आ रहा है

Study in US:भारतीय छात्र जब अमेरिका पढ़ने जाते हैं, तो वो ज्यादातर उन कोर्सेज को चुनते हैं, जिनसे टेक सेक्टर में आसानी से जॉब मिल जाए। तभी तो कंप्यूटर साइंस समेत टेक फील्ड में जॉब के लिए जरूरी ज्यादातर कोर्स भारतीयों के बीच पॉपुलर रहे हैं। मगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद से टेक सेक्टर अपनी चमक खो रहा है। जहां पहले फ्रेश ग्रेजुएट्स को भी मोटी सैलरी वाली जॉब मिल जाती थी, अब उन्हें नौकरियों के लिए दर-दर भटकने लगा है। कंप्यूटर साइंस, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे कोर्स अब अपनी पॉपुलैरिटी गंवा रहे हैं।USCIS को कोर्ट का बड़ा झटका: ग्रीन कार्ड applications में अनिश्चित देरी को गैरकानूनी बतायाफेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की एक स्टडी में बताया गया किकंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्सके बीच बेरोजगारी दर 6.1% से 7.5% के बीच है। AI आने के बाद टेक सेक्टर में लाखों की संख्या में छंटनी हुई है। गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट समेत हर कंपनी ने लोगों को नौकरियों से निकाला है। पहले जहां एंट्री-लेवल की जॉब्स पर नए ग्रेजुएट्स को रखा जाता था, वहीं अब उनकी जगह सिर्फ AI से ही काम लिया जा रहा है। वीजा को लेकर भी बुरा हाल है। टेक सेक्टर में जॉब के लिए H-1B वीजा जरूरी होता है, जिसे पाना स्टूडेंट्स के लिए नामुमकिन हो चुका है, क्योंकि लॉटरी सिस्टम खत्म होने के बाद जिसकी ज्यादा सैलरी होगी, उसे वीजा देने में प्राथमिकता दी जाएगी।STEM कोर्सेज ने US में नहीं खोयी अपनी चमक: एक्सपर्टस्टडी अब्रॉड एक्सपर्ट रितिका गुप्ताका कहना है कि भारतीय छात्रों को अमेरिका में पढ़ने के दौरान स्पेशलाइजेशन पर जोर देना चाहिए, खासतौर पर AI, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसी फील्ड में। उनका मानना है कि अमेरिका में अभी भी 'साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स' (STEM) कोर्सेज की पढ़ाई की जा सकती है, क्योंकि इनमें अभी भी स्कोप है। रितिका गुप्ता के मुताबिक, हाई-टेक इंडस्ट्री में सफल होने का फॉर्मूला स्किल होना है। उन्होंने उन फील्ड्स के बारे में भी बताया है, जहां अभीवर्क वीजापाना ज्यादा मुश्किल नहीं है।US में किस तरह के कोर्स चुनें भारतीय छात्र? एक्सपर्ट से जानेंअमेरिकी स्टूडेंट वीजा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में नौकरियों की लगातार कटौती की वजह से, अमेरिका में पढ़ने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों के लिए स्कूल चुनने के तरीके और उनके लंबे समय के लक्ष्यों में बड़े बदलाव आए हैं।जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था रीपीट मोड वाले कामों (वही काम जो प्रोग्रामर और सपोर्ट टीमें संभालती हैं) के लिए ऑटोमेटेड समाधानों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे कंप्यूटर साइंस जैसे सामान्य कोर्सेज पढ़ने वाले छात्रों के लिए जोखिम बढ़ गया है। अगर स्टूडेंट AI, साइबर सिक्योरिटी, डेटा इंजीनियरिंग या सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसी खास फील्ड में विशेषज्ञता (एक्सपर्टीज) हासिल नहीं करते हैं, तो वे अमेरिकी कंपनियों के पास नौकरी के लिए आवेदन करते समय पिछड़ सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि STEM करियर की पॉपुलैरिटी या महत्व कम हो गया है, बल्कि यह संकेत देता है कि उन विदेशी ग्रेजुएट्स के लिए कॉम्पिटिशन और अवसर बढ़ गए हैं, जिनके पास हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी स्किल हैं और जो नौकरी के जरिए वीजा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।साथ ही, कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां वर्क वीजा मिलना आसान है (जैसे कि पब्लिक हेल्थ, हेल्थ केयर, फाइनेंस, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, आदि)। इनकी पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ेगी क्योंकि इन क्षेत्रों में मांग हमेशा बनी रहती है और यहां नौकरियां मिलना तुलनात्मक रूप से आसान और स्थिर होता है। अमेरिका विदेशी छात्रों के लिए कई अवसर प्रदान करना जारी रखे हुए है। हालांकि, उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छात्र अपने कोर्स की फील्ड को कितनी समझदारी और रणनीतिक तरीके से चुनते हैं। छात्रों को ऐसे प्रासंगिक कोर्सेज पर फोकस करना चाहिए जो तेजी से बढ़ते ग्लोबल जॉब मार्केट्स के लिए उनके स्किल को तैयार करें, न कि इस बात पर कि पारंपरिक शिक्षा का इस्तेमाल नौकरी पाने के लिए कैसे किया जाता रहा है।रितिका गुप्ता (CEO और काउंसलर, AAera Consultants)कुल मिलाकर एक्सपर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर आप अपने लिए सही कोर्स और फील्ड चुनते हैं और स्किल हासिल करने पर फोकस करते हैं, तो अभी अमेरिका में कामयाब होने की गुंजाइश है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी है कि वो सिर्फ पारंपरिक कोर्स जैसे कंप्यूटर साइंस पर फोकस ना करें, बल्कि उसके साथ स्पेशलाइजेशन करने पर जोर दें, तभी कामयाबी हासिल हो पाएगी।
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Live Hindustan
May 4, 2026, 10:17 AM
पूरी तरह से पकाए गए आटे के चावल का रहस्यः सफलता के लिए युक्तियाँ और तरकीबें

पूरी तरह से पकाए गए आटे के चावल का रहस्यः सफलता के लिए युक्तियाँ और तरकीबें

प्रेशर कुकर में चावल बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। इसमें मुश्किल से 5 मिनट लगते हैं और चावल बनकर तैयार हो जाते हैं। लेकिन जब बात हो खिले-खिले चावल बनाने की, तो वो हर किसी के बस की बात नहीं। आपने खुद नोटिस किया होगा कि कभी-कभी चावल या तो जरूरत से ज्यादा गीले हो जाते हैं, या कभी चिपचिपे बनते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पानी का माप कहीं ना कहीं गलत होता है। खिले-खिले चावल बनाने का सीक्रेट यही है कि चावल में पानी का अनुपात बिल्कुल सही हो। बहुत से लोगों को यही कन्फ्यूजन रहती है और इसी वजह से उनके चावल कभी भी ठीक नहीं बनते। अगर आप पहली बार चावल बनाने जा रहे हैं या आपके चावल परफेक्ट नहीं बनते, तो ये टिप्स आपको फटाफट नोट कर लेनी चाहिए। इसके बाद आप पानी की मात्रा को ले कर कभी कन्फ्यूज नहीं होंगे। Shri & SamEveryday Stainless Steel Pressure Cooker, 3 Litre, Mirror Finish, Inner Lid Design, Gas and Induction Compatible ButterflyButterfly Cute Ss Induction Compatible Outer Lid Stainless Steel Pressure Cooker With Glass Lid 3 liter, Silver PigeonPigeon by Stovekraft Stainless Steel Pressure Cooker Combo with Induction Base, Outer Lid 2 Liter and 3 Liter - 12710 (Silver) PigeonPigeon by Stovekraft Favourite Outer Lid Non Induction Aluminium Pressure Cooker, 3 Litres PigeonPigeon by Stovekraft Titanium 3 Ltrs Outer Lid Pressure Cooker - Black, Aluminium PigeonPigeon Titanium Hard Anodized Aluminium Outer Lid Pressure Cooker - 5 Litres - Black The Indus ValleyThe Indus Valley Stainless Steel Pressure Cooker Outer Lid 5 Litres| Induction Friendly | Tri-Ply Heavy Bottom | 100% Toxin-Free, Naturally Non-Stick GREENCHEFGreenchef Marco Aluminium pressure cooker combo(5ltrs + 3ltrs + 2ltrs pan) Induction compatible - ISI Certified ButterflyButterfly Cordial 3 Litres Pressure Cooker | Outer Lid | Food Grade Virgin Aluminium | Induction & Gas Stove Compatible | ISI Certified | 2 Years Manufacturer's Warranty | Silver PigeonPigeon by Stovekraft 101 Deluxe Aluminium Pressure Cooker, 2 Litres कुकर में चावल पकाते हुए या तो वो ज्यादा चिपचिपे हो जाते हैं या फिर जरूरत से ज्यादा गीले। ऐसा पानी की गलत मात्रा की वजह से होता है। या हो आपका पानी कम रह जाता है या फिर कुछ ज्यादा ही हो जाता है। इसके लिए एक अनुपात नोट कर लें। अगर आप 1 गिलास चावल ले रहे हैं तो उसी गिलास से आपको डेढ़ गिलास (1 और आधा गिलास) पानी लेना है। इससे नॉर्मल चावल एकदम परफेक्ट बनेंगे। वहीं अगर आप फ्राइड राइस या पुलाव के लिए चावल बना रहे हैं, तो आधा गिलास की जगह सवा गिलास पानी रखें। कुकर में परफेक्ट खिले-खिले चावल बनाने की एक और ट्रिक है, जो आपको फॉलो करनी चाहिए। इसके लिए बस जब भी चावल बनाएं, उसमें 2-3 बूंद नींबू का रस जरूर एड करें। इससे चावल का एक एक दाना अलग हो जाता है और वो आपस में चिपकते नहीं। इसके अलावा आप आधा-एक चम्मच देसी घी भी मिला सकते हैं, इससे चावल काफी खुशबूदार और स्वादिष्ट बनते हैं। अब एक और सवाल काफी कॉमन रहता है कि चावल बनाने के लिए कुकर में कितनी सीटी लगाएं। परफेक्ट चावल बनें, इसके लिए आपको सिर्फ एक सीटी लगानी है और इस दौरान गैस की फ्लेम को तेज ही रखना है। सीटी आते ही गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर पूरी तरह निकालने के बाद ही ओपन करें। इससे चावल अच्छी तरह सेट हो जाएंगे और एकदम खिले खिले बनकर तैयार होंगे। (Images Credit- Pinterest)
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Dainik Jagran
May 4, 2026, 09:26 AM
क्लस्टरों और वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से खेती को लाभदायक बनाने की रणनीति

क्लस्टरों और वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से खेती को लाभदायक बनाने की रणनीति

चयनित ब्लाकों में क्लस्टर बनाकर खेती को लाभ का सौदा बनाने की रणनीति तैयार की गई है। इन क्षेत्रों में मृदा परीक्षण से लेकर बीज चयन तक की प्रक्रिया को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ा जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य नकदी फसलों और बागवानी के जरिए किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करना है। संविदा व आउटसोर्सिंग के माध्यम से विशेषज्ञों और फील्ड सहायकों की तैनाती की जा रही है जो सीधे किसानों के संपर्क में रहकर उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे।
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Amar Ujala
May 4, 2026, 08:42 AM
आई. आई. टी. बी. एच. यू. ने पी. एच. डी., एम. टेक और एम. फार्मा कार्यक्रमों के लिए शुल्क संरचना की घोषणा की

आई. आई. टी. बी. एच. यू. ने पी. एच. डी., एम. टेक और एम. फार्मा कार्यक्रमों के लिए शुल्क संरचना की घोषणा की

विस्तारAdd as a preferredsource on googleIIT BHU:आईआईटी बीएचयू ने सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी, एमटेक और एम फार्मा की फीस की लिस्ट जारी कर दी है। कुल छह कैटेगरी में फीस ली जाएगी। दाखिले के दिन ही प्लेसमेंट के 1500 रुपये, दीक्षांत के 500 रुपये, आईकार्ड के 300 रुपये सहित अन्य कार्यक्रम के लिए फीस एक ही बार में जमा होगी।और पढ़ेंTrending Videosहर छह महीने पर फेस्ट के 150 रुपये, जिम के 1000 रुपये और मेडिकल के 300 रुपये सेमेस्टर फीस के साथ ही लिए जाएंगे। आईआईटी में सत्र 2026-27 में पीएचडी और पीजी कोर्स के लिए पार्ट टाइम और फुल टाइम दो भाग में फीस की व्यवस्था की गई है।विज्ञापनविज्ञापनपीएचडी करने के लिए 30 हजार से लेकर 1.16 लाख रुपये, वहीं एमटेक और एम फार्मा के लिए 30,100 रुपये से लेकर 65,100 रुपये चुकाने होंगे। इसमें एडमिशन, कॉशन मनी, एक सेमेस्टर की फीस और मेडिकल इंश्योरेंस जुड़ा हुआ है।प्रोजेक्ट फेलो को 62,100 रुपये :एमटेक और एम फार्मा में फुल टाइम रजिस्ट्रेशन के तहत रेगुलर को 30,100 रुपये, एससी-एसटी को 19,800 रुपये, स्पॉन्सर्ड में 65100 रुपये देने होंगे।एससी-एसटी के लिए ट्यूशन फीस से छूटपीएचडी में रेगुलर और प्रोजेक्ट से जुड़े छात्रों को 30600 रुपये, एससी व एसटी को 20300 रुपये, स्पॉन्सर्ड कैटेगरी को 65600 रुपये, एक्सटर्नल में 62400 रुपये, एग्जीक्यूटिव कैटेगरी में 1,16,900 रुपये और इंटरनल प्लेसमेंट 13900 रुपये फीस देनी होगी। एससी और एसटी छात्रों को ट्यूशन और हॉस्टल की फीस में छूट मिलेगी। सामान्य में रेगुलर छात्रों, प्रोजेक्ट फेलो और कैंपस के प्रोफेसर-कर्मचारियों की ट्यूशन फीस 10 हजार है। एग्जीक्यूटिव वर्ग को एक लाख रुपये, स्पॉन्सर्ड, एक्सटर्नल कैटेगरी को 45 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।पीएचडी और एमटेक-एमफार्मा की फीसएडमिशन के 200 रुपये, आई कार्ड के 300 रुपये, स्टूडेंट वेलफेयर फंड के 1000 रुपये, प्लेसमेंट फीस 1500 रुपये, पब्लिकेशन के 250 रुपये, दीक्षांत के 500 रुपये और थीसिस शुल्क के रूप में 1000 रुपये देने होंगे। इंस्टीट्यूट, हॉस्टल और लाइब्रेरी की कॉशन मनी के ताैर पर 9000 रुपये देने होंगे।परीक्षा शुल्क 500 रुपये, रजिस्ट्रेशन के 200 रुपये, जिमखाना फीस 1000 रुपये, फेस्टिवल फीस 200 रुपये, मेडिकल फीस 300 रुपये, छात्र सुविधा सेवा के 250 रुपये, हॉस्टल बेड किराया 300 रुपया, पंखा, पानी और बिजली चार्ज 1200 रुपये है। इसके अलावा हॉस्टल डेवलपमेंट फंड 2250 रुपये और कैंपस सर्विसेज फीस 200 रुपये निर्धारित किया गया है।
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Amar Ujala
May 4, 2026, 06:39 AM
इसरो ने प्रतिष्ठित युविका कार्यक्रम के लिए 10वीं कक्षा के छात्र सार्थक तंवर का चयन किया

इसरो ने प्रतिष्ठित युविका कार्यक्रम के लिए 10वीं कक्षा के छात्र सार्थक तंवर का चयन किया

पीएम श्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय छुरी कला के लिए गौरव का क्षण है। यहां कक्षा 10वीं के छात्र सार्थक तंवर का चयन इसरो के प्रतिष्ठित ‘युविका - युवा विज्ञानी कार्यक्रम’ के लिए हुआ है। इस उपलब्धि पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सार्थक को सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं। सार्थक फिलहाल 10वीं कक्षा का छात्र है और उसने 9वीं कक्षा में रहते हुए इस कार्यक्रम की तैयारी की थी।और पढ़ेंTrending Videosकलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि सार्थक तंवर का चयन पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। उनका यह कदम अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगा। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर जाना किसी भी छात्र के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है। उन्होंने आशा जताई कि सार्थक भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।विज्ञापनविज्ञापनभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा युविका कार्यक्रम कक्षा 9वीं के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की गहन जानकारी देने के लिए चलाया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं में विज्ञान-तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें भविष्य का वैज्ञानिक बनाना है। सार्थक का चयन हरिकोटा, आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में 10 मई से 22 मई 2026 तक आयोजित कार्यक्रम के लिए हुआ है।सार्थक की उपलब्धि से विद्यालय परिवार में उत्साह है। प्राचार्य डॉ. असद अहमद ने प्रार्थना सभा में सार्थक को सम्मानित किया और सभी विद्यार्थियों को ऐसे अवसरों के लिए सतत प्रयास करने को प्रेरित किया। सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने कहा कि छात्र की सफलता न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है।सार्थक तंवर ने कहा कि युविका में चयन से वह बेहद खुश हैं। अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का यह सुनहरा मौका है। वह इस प्रशिक्षण से सीखकर आगे भी इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं।
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Dainik Jagran
May 4, 2026, 06:32 AM
भारतीय छात्रों ने विज्ञान परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया

भारतीय छात्रों ने विज्ञान परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया

साइंस संकाय में जिला कांगड़ा के छतड़ी न्यू ईरा स्कूल की शायला कश्यप प्रथम रही है। शायला ने 500 में से 495 अंक हासिल किए। जिला ऊना के अंब की संचिता दूसरे स्थान पर रही हैं। गुरुकुल स्कूल पक्का परोह की संचिता ने 493 अंक हासिल किए। हमीरपुर के आर्यन पब्लिक स्कूल झंडी की काशी शर्मा ने भी 493 अंक हासिल कर दूसरा स्थान पाया है।
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Navbharat Times
May 4, 2026, 05:41 AM
ए. आई. ने रोगियों के निदान में डॉक्टरों को पीछे छोड़ा, अध्ययन से पता चलता है

ए. आई. ने रोगियों के निदान में डॉक्टरों को पीछे छोड़ा, अध्ययन से पता चलता है

AI अब सिर्फ रेसिपी बताने और फोटो बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि मरीजों का इलाज करने में अपना योगदान निभा रहा है। हाल ही में सामने आई हार्वर्ड की एक नई स्टडी से पता चला है कि एडवांस्ड AI मॉडल मरीजों की बीमारी की पहचान करने में डॉक्टरों से बेहतर परफॉर्म कर सकता है। यहां तक कि इमरजेंसी रूम (ER) में भी। रिसर्चर ने कहा कि OpenAI के एडवांस्ड o1 लैंग्वेज मॉडल को कई अलग-अलग डायग्नोस्टिक स्थितियों में सैकड़ों डॉक्टरों के साथ सीधे मुकाबले में उतारा गया और पाया कि AI ने बीमारी पहचानने और उसके इलाज करने की प्लानिंग करने दोनों ही मामलों में डॉक्टरों से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।डॉक्टर से अच्छा काम कर रहा एआई'साइंस' जर्नल में छपी नई रिसर्च में बताया गया कि इजराइल डिकनेस मेडिकल सेंटर के इमरजेंसी रूम से 76 क्लिनिकल केस OpenAI के o1 मॉडल और दो एक्सपर्ट डॉक्टरों को दिए गए। रिसर्च करने वालों ने पाया कि o1 ने कई तरह के कामों में इंसानी एक्सपर्ट्स के बराबर या उनसे काफी बेहतर परफॉर्म किया। जब सबसे कम जानकारी उपलब्ध थी, तब o1 ने 67.1% मामलों में एकदम सही या उसके बहुत करीब की बीमारी की पहचान की। जबकि दोनों डॉक्टरों की सटीकता 55.3% और 50% रही।जैसे-जैसे डॉक्टर को मरीज के बारे में ज्यादा जानकारी मिलती गई। मॉडल की सटीकता बढ़कर 72.4% हो गई, जबकि दोनों डॉक्टरों की सटीकता 61.8% और 52.6% थी। जब मरीजों को मेडिकल फ्लोर या ICU में भर्ती किया गया तो o1 की सटीकता 81.6% तक पहुंच गई। इस बार भी इसने दोनों डॉक्टरों को पीछे छोड़ दिया।जोखिम वाला हो सकता है कामस्टडी में यह भी पाया गया कि जबAIसे इलाज करने की प्लानिंग जैसे एंटीबायोटिक लिखना या जीवन के अंतिम समय के फैसले लेने को कहा गया तो वो डॉक्टर से आगे था। पांच केस स्टडीज में, AI ने 89% का औसत स्कोर हासिल किया, जो डॉक्टरों के स्कोर से काफी ज्यादा था। डॉक्टरों ने ट्रेडिशनल तरीकों का इस्तेमाल करते हुए लगभग 34% और GPT-4 का इस्तेमाल करते हुए 41% स्कोर किया था।रिसर्चर ने कहा कि क्लिनिकल फैसले लेने में मदद करने के लिए AI का इस्तेमाल करना कभी-कभी एक ज्यादा जोखिम वाला काम माना जाता है, लेकिन इन उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल, जांच में गलती, देरी और इलाज तक पहुंच की कमी को कम करने में मददगार हो सकता है।ऐसी रिसर्च की है जरूरतहालांकि, रिसर्चर ने यह चेतावनी भी दी है कि क्लिनिकल मेडिसिन में बिना टेक्स्ट के इनपुट की भरमार होती है। जैसे कि मरीजों की शारीरिक तकलीफ का लेवल या मेडिकल इमेजिंग की जानकारी। उनका सुझाव है कि इसका मतलब यह है कि भविष्य में ऐसे रिसर्चर की जरूरत है जो यह आकलन कर सके कि इंसान और मशीनें किस तरह प्रभावी ढंग से मिलकर काम कर सकते हैं।
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Dainik Jagran
May 4, 2026, 01:22 AM
कैंट में साई कंप्यूटर सेंटर में रहस्यमय घटना की सूचना मिली

कैंट में साई कंप्यूटर सेंटर में रहस्यमय घटना की सूचना मिली

कैंट के सदर बाजार निवासी विकास ने पुलिस को बताया कि, रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे वह सदर बाजार स्थित सांई कंप्यूटर सेंटर पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मदारी की पुलिया की तरफ से चार बाइकों से कई अज्ञात युवक पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए जा रहे थे।
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Dainik Jagran
May 4, 2026, 12:00 AM
भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के बाद पाकिस्तान में नुकसान की तस्वीरों का खुलासा करने के लिए शक्ति प्राप्त की

भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के बाद पाकिस्तान में नुकसान की तस्वीरों का खुलासा करने के लिए शक्ति प्राप्त की

बता दें कि पिछले साल पहलगाम हमले की प्रतिक्रिया स्वरूप शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान में स्थित तमाम आतंकी अड्डों को तहस नहस कर डाला था। हालांकि, इस दौरान पाकिस्तान में नुकसान की सटीक तस्वीरें सामने नहीं आ सकी थीं और जो देर से मिलीं भी, वे अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी वेंटोर, जिसे पहले मैक्सर कहा जाता था, के जरिये ही मिल सकी थीं। हालांकि, अमेरिका ने भारत-पाक सैन्य संघर्ष से जुड़ी तस्वीरें साझा करने से कंपनी को रोक दिया था। लेकिन भारतीय स्टार्टअप गैलेक्सआई के ऐतिहासिक ऑप्टोसार उपग्रह के होते अब ऐसा नहीं हो सकेगा क्योंकि भारत को ऐसी ताकत मिल चुकी है, जिसके चलते सेना बादलों और अंधेरे को चीरते हुए हालात की साफ तस्वीर पा सकेगी।
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Amar Ujala
May 3, 2026, 08:23 PM
रेलवे ने चालकों की सतर्कता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली आई-ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की

रेलवे ने चालकों की सतर्कता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली आई-ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की

बाराबंकी। रेल हादसों पर लगाम कसने के लिए रेलवे अब सुरक्षा के अगले स्तर पर पहुंचने की तैयारी में है। बाराबंकी से छपरा तक 425 किमी लंबे एनई रेलवे के मुख्य मार्ग की पटरियों व सिग्नल के बाद अब फोकस सीधे ट्रेन चालक की सतर्कता पर है।और पढ़ेंTrending Videos‘कवच’ तकनीक लागू करने के बाद रेलवे एक ऐसा एआई आधारित सिस्टम विकसित कर रहा है, जो ड्राइवर की झपकती आंखों को पढ़कर संभावित खतरे को पहले ही टाल देगा। ‘कवच’ के बाद यह तकनीक सुरक्षा के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।विज्ञापनविज्ञापनबाराबंकी से छपरा तक का रेलखंड बहुत व्यस्त रूट है। इस ट्रैक पर पहले से ही ‘कवच’ सिस्टम लगाया जा रहा है, जो ट्रेनों के बीच टक्कर की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा देता है। इसमें जीपीएस और रेडियो फ्रिक्वेंसी तकनीक का इस्तेमाल कर ट्रेनों की टक्कर को रोका जाता है। यह तकनीकी बदलाव साफ दिखने लगा है।अब इसके साथ ही एक नई चालक सहायता प्रणाली जोड़ने की तैयारी है। रेल अधिकारियों के अनुसार यह अत्याधुनिक उपकरण सीधे लोको पायलट के केबिन में लगाया जाएगा और ट्रेन के ब्रेक सिस्टम से जुड़ा रहेगा। इसमें लगे सेंसर और कैमरे ड्राइवर की आंखों की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे।जैसे ही सिस्टम को लगेगा कि चालक की सतर्कता कम हो रही है या उसे झपकी आ रही है, तुरंत अलर्ट जारी होगा। अगर चेतावनी के बावजूद ड्राइवर प्रतिक्रिया नहीं देता, तो यह सिस्टम खुद ही ट्रेन की रफ्तार कम करते हुए उसे रोक देगा।रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक पर पिछले वर्ष जून में निर्णय लिया गया था और अब यह परीक्षण के अंतिम चरण में है। बाराबंकी स्टेशन के अधीक्षक अरुण रायदाजा के अनुसार, रेलवे सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। नए एआई सिस्टम को पहले चरण में 20 इंजनों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया जाएगा। इसके परिणाम संतोषजनक रहने पर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।---ट्रैक की सेहत भी अब एआई के भरोसेरेलवे केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि पटरियों की सेहत पर भी हाईटेक नजर रखने जा रहा है। निरीक्षण वाहनों में अब ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (जीपीआर) से लैस एआई डिवाइस लगाए जाएंगे। यह तकनीक ट्रैक की नींव के भीतर की खामियों को भी पहचान सकेगी, जो सामान्य निरीक्षण में दिखाई नहीं देतीं। इससे संभावित खतरे को पहले ही चिह्नित कर समय रहते मरम्मत संभव हो सकेगी।
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Amar Ujala
May 3, 2026, 07:40 PM
यमुनानगर का जिला सिविल अस्पताल सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से एम. आर. आई. सुविधा शुरू करेगा

यमुनानगर का जिला सिविल अस्पताल सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से एम. आर. आई. सुविधा शुरू करेगा

संवाद न्यूज एजेंसीऔर पढ़ेंTrending Videosयमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में जल्द ही एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और चयनित एजेंसी को कार्य आवंटित कर दिया गया है।अस्पताल प्रशासन के अनुसार अगले माह तक मशीन लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मरीजों को एमआरआई की सुविधा मिलने लगेगी। एमआरआई मशीन को अस्पताल परिसर में अल्ट्रासाउंड विभाग के पास खाली कमरे में लगाने की योजना बनाई गई है। यह सुविधा शुरू होने के बाद यमुनानगर जिले के मरीजों को जांच के लिए अन्य शहरों या बड़े अस्पतालों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।विज्ञापनविज्ञापनकरीब 200 बेड वाले इस जिला नागरिक अस्पताल में वर्तमान में रोजाना 2200 से 2500 मरीज ओपीडी और आईपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद यहां एमआरआई जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं थी। गंभीर मरीजों को अक्सर पीजीआई चंडीगढ़ या अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता था। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को इस प्रक्रिया में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।अस्पताल में फिलहाल पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे शुरुआती जांच की जाती है, लेकिन कई जटिल मामलों में एमआरआई अनिवार्य हो जाती है। सिर या रीढ़ की हड्डी में चोट, मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां, नसों की समस्याएं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के सटीक निदान के लिए एमआरआई बेहद जरूरी मानी जाती है। एमआरआई तकनीक के माध्यम से स्ट्रोक, एन्यूरिज्म, आंख और कान से जुड़ी आंतरिक समस्याएं, मल्टीपल स्केलेरोसिस और स्पाइनल इंजरी जैसी बीमारियों का विस्तार से पता लगाया जा सकता है। अभी तक मरीजों को इन जांचों के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता था, जहां एक जांच पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को राहत मिलेगी, बल्कि समय पर सही इलाज मिलने से जान भी बचाई जा सकेगी।जिला नागरिक अस्पताल में एमआरआई के लिए एजेंसी को कार्य आवंटित कर दिया गया है। इससे जिला स्तर पर ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। जल्द ही मशीन स्थापित कर सेवा शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. पुनीत कालड़ा, डिप्टी सिविल सर्जन यमुनानगर।
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May 3, 2026, 07:34 PM
आजमगढ़ में भगोड़ा कैदी आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए गिरफ्तार

आजमगढ़ में भगोड़ा कैदी आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए गिरफ्तार

आजमगढ़। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए रौनापार थाना पुलिस ने भागे बंदी उदय को गिरफ्तार कर लिया। बंदी हत्या के मामले में निरुद्ध है और उस पर 25 हजार रुपये का इनामी आरोपी उदय को पुलिस ने पकड़ लिया। रौनापार थाना प्रभारी सुनील कुमार दुबे ने बताया कि उक्त आरोपी 12 दिसंबर 2025 को जिला कारागार से मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था। पुलिसकर्मियों को चकमा देकर भाग निकला था। इसे लेकर शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।और पढ़ेंTrending Videosथाना प्रभारी सुनील कुमार दुबे ने बताया कि गिरफ्तारी न होने पर एक मई को पुलिस अधीक्षक ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में विकसित यक्ष एप और फेस रिकग्निशन तकनीक से मिले अलर्ट के आधार पर पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए रविवार को हैदराबाद बंधा चौराहे से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।विज्ञापनविज्ञापनआरोपी उदय के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हैं। उसे न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अस्थायी पता गोरखपुर जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के अमीना नगर पादरी बाजार का है। उसका स्थायी पता गुजरात के अहमदाबाद जनपद के इशनपुर थाना क्षेत्र के सत्ताधर नगर, विशाल नगर के पीछे महावीर स्कूल का है।
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May 3, 2026, 07:14 PM
कुलपति ने काशीपुर में कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया

कुलपति ने काशीपुर में कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा किया

काशीपुर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने रविवार को कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर पर भ्रमण किया। कुलपति केंद्र के प्रत्येक वैज्ञानिक, कार्मिक से मिले और उनकी समस्याओं को जाना। वहीं, केंद्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों और फार्म का अवलोकन भी किया।और पढ़ेंTrending Videosकेंद्र प्रभारी ने कुलपति के समक्ष संचालित विभिन्न प्रसार कार्यों, परियोजनाओं की जानकारी दी। कुलपति ने केंद्र की ओर से अंगीकृत ग्रामों की समीक्षा और कृषकों की आय वृद्धि करने पर जोर दिया गया।विज्ञापनविज्ञापनप्रभारी अधिकारी ने केंद्र पर विभिन्न इकाइयों जैसे मत्स्य पालन के अंतर्गत एक्वापोनिक यूनिट, हाइड्रोपोनिक यूनिट, वर्मी कंपोस्ट यूनिट, गाय, बकरी, मुर्गी, गृह विज्ञान के अंतर्गत इनफार्म सेंटर, कृषि विज्ञान का एजुकेशनल सेंटर और अन्य विषय की जानकारी दी।केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. शिव कुमार शर्मा, गन्ना अनुसंधान के प्रभारी अधिकारी डॉ. संजय कुमार, डॉ. अनिल सैनी, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. अनिल चंद्रा, कु. सबा मसऊद, रमेश कुमार, मनीष वाजपेई आदि मौजूद रहे।
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May 3, 2026, 11:34 AM
भारत का गैलेक्सी स्पेसएक्स के साथ पहला सैटेलाइट विजन मिशन लॉन्च करेगा

भारत का गैलेक्सी स्पेसएक्स के साथ पहला सैटेलाइट विजन मिशन लॉन्च करेगा

बेंगलुरु स्थित भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप गैलेक्सआई अपना पहला उपग्रह दृष्टि मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है। इस सैटेलाइट को अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स के फाल्कॉन 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह प्रक्षेपण कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से किया जाएगा। इस मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश की तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी। दृष्टि उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक ऑप्टो SAR तकनीक है। यह टेक्नोलॉजी ऑप्टिकल इमेजिंग और सिंथेटिक अपर्चर रडार का कॉम्बिनेशन है, जिससे यह उपग्रह दिन-रात और हर मौसम में काम करने में सक्षम है। सामान्य उपग्रह बादलों, बारिश या अंधेरे में स्पष्ट तस्वीरें नहीं ले पाते, लेकिन दृष्टि इन सभी बाधाओं के बावजूद सटीक और साफ फोटो ले सकता है। इससे पृथ्वी की सतह की लगातार निगरानी संभव हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत जानकारी मिल पाएगी। करीब 190 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह भारतीय निजी क्षेत्र की ओर से विकसित प्रमुख उपग्रहों में से एक है। इसमें अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस करने के लिए एआई आधारित सिस्टम लगाया गया है, जो तेजी से उपयोगी जानकारी तैयार करता है। इस तकनीक का उपयोग कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी योजना, समुद्री निगरानी और रक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में किया जा सकेगा। खासकर आपदा के समय रियल-टाइम इमेजिंग से राहत और बचाव कार्यों में काफी मदद मिलेगी। यह मिशन भारत के बढ़ते अंतरिक्ष स्टार्टअप कदम को और मजबूत बनाता है। दृष्टि के सफल प्रक्षेपण के बाद गैलेक्सआई भविष्य में ऐसे कई उपग्रह बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे पूरी पृथ्वी की निरंतर निगरानी की जा सके। इससे भारत को रणनीतिक और आर्थिक दोनों तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, देश वैश्विक अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। यह मिशन भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन की भी टेंशन बढ़ाने वाला है।
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May 3, 2026, 10:34 AM
भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया

नई दिल्ली:भारत ने ओडिशा तट पर लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल ( LR-AShM ) का सफल टेस्ट किया है। DRDO की बनाई इस मिसाइल ने 1,500 km की रेंज में तय टारगेट पर सटीक निशाना लगाया, जो समुद्र में देश की सुरक्षा बढ़ाने में एक बड़ा मील का पत्थर है। मिसाइल को Mach 5 से ज्यादा स्पीड वाले टारगेट को हिट करने के लिए डिजाइन किया गया है। (यह Mach 10 की स्पीड तक पहुंच सकती है।DRDO ने जारी नहीं किया ऑफिशियल बयानइस टेस्ट ने इसके एडवांस्ड टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम की सटीकता को साबित कर दिया। इसने लॉन्च से लेकर आखिरी असर तक मिशन के सभी लक्ष्यों को पूरा किया, जिसमें बीच रास्ते में किए गए दांव-पेच और लगातार तेज रफ्तार से उड़ान भरना भी शामिल था। हालांकि DRDO ने अभी तक कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है, लेकिन BJP ने X पर इस टेस्ट का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसके साथ लिखा है कि भारत की हाइपरसोनिक बढ़त अब और भी तेज हो गई है। ओडिशा के तट पर DRDO का LR-AShM Phase-II टेस्ट एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारत के लिए PM मोदी के विजन को दिखाते हुए, यह स्वदेशी रक्षा इनोवेशन में एक जबरदस्त छलांग है।क्या है LR-AShM मिसाइल की खासियतLR-AShM एक स्वदेशी दो-चरणों वाला सॉलिड-प्रोपेल हाइपरसोनिक ग्लाइड हथियार है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है।यह अपनी तरह का पहला और एक शक्तिशाली हथियार है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) क्षमताओं को बढ़ाता है।यह मिसाइल हाइपरसोनिक रेंज में काम करती है। इसकी गति Mach 10 से शुरू होती है और अपनी उड़ान के दौरान यह औसतन Mach 5.0 की गति बनाए रखती है।यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो कम ऊंचाई पर, कई बार उछलते हुए (skips) एक अर्ध-बैलिस्टिक (quasi-ballistic) मार्ग का अनुसरण करती है, जिससे यह अपनी उड़ान के अधिकांश समय तक रडार की पकड़ से बची रहती है।यह अपने अंतिम चरण (terminal phase) में अत्यधिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित सेंसर का उपयोग करते हुए, स्थिर और गतिशील दोनों तरह के लक्ष्यों (जैसे कि विमान वाहक पोत) को निशाना बना सकती है।यह मिसाइल उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे DRDO की एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) और अलग-अलग औद्योगिक भागीदारों द्वारा विकसित किया गया है।
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May 3, 2026, 10:19 AM
तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने से भारत गर्मी की चपेट में

तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने से भारत गर्मी की चपेट में

Weather Update Health Tips: जैसे-जैसे पारा 40 के पार जा रहा है, अस्पतालों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और चक्कर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है.मौसमविभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ हफ्ते सेहत के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. लेकिन घबराने की बात नहीं है, अगर हम अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो इस मौसम में भीस्वस्थरह सकते हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा,"मई के दूसरे (8-14 मई) और चौथे (22-28 मई) सप्ताह में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूर्वी तट में लू चल सकती है.सरकार ने कहा-केंद्रीय मंत्री जीतेन्द्र सिंह के मुताबिक,"सरकारगर्मीसे उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. राज्य और जिला स्तर पर पेयजल की उपलब्धता, सुचारू शीतलन व्यवस्था और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहल जरूरी. बच्चों, बुजुर्गों और बाहरी कार्यों में लगे श्रमिकों सहित संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.लू और गर्मी में सेहत का ख्याल कैसे रखें? (How to take care of your health during heatwave)​खूब पानी पिएं- प्यास न भी लगे, तब भी पानी पीते रहें. नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी को अपनी डाइट में शामिल करें.​दोपहर में बाहर न निकले- कोशिश करें कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलें.​हल्के कपड़े पहनें- गहरे रंग के और टाइट कपड़ों के बजाय सूती (Cotton) और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें.​खान-पान का ध्यान- ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना खाने से बचें. ताजे फल जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा खाएं.​ओआरएस- अगर ज्यादा पसीना आए या कमजोरी महसूस हो, तो ओआरएस का घोल पिएं.बच्चे और बुजुर्ग क्या सावधानी रखें- (What precautions should children and the elderly)बच्चों की त्वचा नाजुक होती है और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कम, इसलिए उन्हें लू जल्दी लगती है. उन्हें दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर न जाने दें. अगर जाना जरूरी हो, तो सिर को गीले कपड़े या टोपी से जरूर ढकें.​स्किन और आंखों का ख्याल​तेज धूप और पसीने से घमौरियां, फंगल इन्फेक्शन और आंखों में जलन (Red eyes) की समस्या आम है.बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का सनस्क्रीन और सनग्लासेस जरूर लगाएं.हीट स्ट्रोक के लक्षण- (Symptoms of heat stroke)​बहुत तेज सिरदर्द होना​चक्कर आनाआंखों के सामने अंधेरा छाना​पसीना आना बंद हो जानास्किन एकदम लाल और गर्म हो जाना​तेज बुखार के साथ उल्टी महसूस होना.ये भी पढ़ें-Experience: 30 दिन रोज दही खाया, पेट की परेशानी में बड़ा फर्क दिखाकैसे करें असली और नकली आम की पहचान? (How to identify if the mango is naturally or artificially ripened?)(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)मैं सुन रहा हूँ, क्या जानना चाहेंगे?
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May 3, 2026, 10:15 AM
अफवाह स्मार्टफोन कैमरा सेटअपः उच्च-रिज़ॉल्यूशन सेंसर के साथ ट्रिपल-लेंस डिज़ाइन

अफवाह स्मार्टफोन कैमरा सेटअपः उच्च-रिज़ॉल्यूशन सेंसर के साथ ट्रिपल-लेंस डिज़ाइन

कैमरे की बात करें तो, इस फोन में ट्रिपल-कैमरा सेटअप हो सकता है, जिसमें 200-मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर, 50-मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस और 10-मेगापिक्सल का टेलीफोटो लेंस मिल सकता है। जबकि सेल्फी के लिए फोन में 10-मेगापिक्सल का कैमरा होने की उम्मीद है।
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May 3, 2026, 10:02 AM
नाखून अनुकूल टचस्क्रीन प्रौद्योगिकीः फोन उपयोगकर्ताओं के लिए एक गेम-चेंजर

नाखून अनुकूल टचस्क्रीन प्रौद्योगिकीः फोन उपयोगकर्ताओं के लिए एक गेम-चेंजर

लंबे नाखून के साथ टचस्क्रीन फोन को यूज करना काफी मुश्किल होता है. लंबे नाखून इस टेक्नोलॉजी के साथ ठीक से काम नहीं करते, जिस कारण टाइप करने से लेकर किसी ऐप को सेलेक्ट करने जैसे बेसिक काम भी जटिल हो जाते हैं. हालांकि, कुछ समय बाद लोग लंबे नाखूनों के साथ फोन यूज करना सीख लेते हैं, लेकिन फिर भी कुछ झंझट रहते ही हैं. अब वैज्ञानिकों ने इस झंझट का समाधान ढूंढ लिया है. उन्होंने एक ऐसा तरीका निकाला है, जिससे नाखून स्टाइलस की तरह काम करेंगे. आइए जानते हैं कि यह तरीका क्या है और कैसे फोन यूज करने के एक्सपीरियंस को आसान बना सकता है. इस नए तरीके के बारे में जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि टचस्क्रीन टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है. टचस्क्रीन डिवाइस की बात करें तो इनमें कंडक्टिव मैटेरियल की एक पतली लेयर के ऊपर ट्रांसपेरेंट ग्लास लगा होता है. कंडक्टिव लेयर पूरी स्क्रीन के ऊपर एक इलेक्ट्रिक फील्ड क्रिएट करती है. जब हम अपनी फिंगर या स्टाइलस की मदद से स्क्रीन को टच करते हैं तो यह इलेक्ट्रिक फील्ड डिस्टर्ब होता है और एक यूनीक इलेक्ट्रिक सिग्नल क्रिएट होता है. डिवाइस इस सिग्नल को डिजिटल रिएक्शन में बदल देता है. टचस्क्रीन डिवाइस फिंगर या स्टाइलस की मदद से ऑपरेट हो सकते हैं, लेकिन नाखून के साथ इनकी दोस्ती नहीं है. दरअसल, नाखून हमारी फिंगर की तरह कंडक्टिव नहीं होते. इसलिए जब ये स्क्रीन को टच करते हैं तो इलेक्ट्रिक फील्ड डिस्टर्ब नहीं होता. इसका समाधान करने के लिए रिसर्चर ने एक पॉलिश मिक्सचर तैयार किया है, जो इस इलेक्ट्रिक फील्ड को डिस्टर्ब कर सकता है. अमेरिका के Louisiana के Centenary College की दो रिसर्चर ने इस परेशानी का हल निकाल लिया है. उन्होंने ऐसा एडिटिव तैयार किया है, जो नेल पॉलिश में मिक्स किया जा सकता है. इस एडिटिव में ethanolamine और taurine को मिक्स किया गया है. ये दोनों ही स्क्रीन के ऊपर बने इलेक्ट्रिक फील्ड को डिस्टर्ब कर टच स्क्रीन के साथ इंटरेक्ट कर सकते हैं. यानी इस एडिटिव को नेल पॉलिश के साथ मिक्स कर नाखूनों पर लगाया जा सकता है. इसके बाद लंबे नाखून एक तरह से स्टाइलस का काम करेंगे और फोन को आसानी से ऑपरेट किया जा सकेगा. रिसर्चर का कहना है कि अभी इस पर काफी काम किया जाना बाकी है, लेकिन इसे जल्द ही अवेलेबल करवाया जा सकता है.
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May 3, 2026, 09:20 AM
रक्षा मंत्री सिंह संगम शहर में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 का उद्घाटन करेंगे

रक्षा मंत्री सिंह संगम शहर में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 का उद्घाटन करेंगे

विस्तारAdd as a preferredsource on googleकेंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रविवार से संगम नगरी के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वह ''रक्षा त्रिवेणी संगम'' की थीम पर आयोजित नार्थ टेक सिम्पोजियम-2026 का उद्घाटन करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रक्षा मंत्री रविवार शाम 5:10 बजे वायुसेना के विशेष विमान से बमरौली एयरपोर्ट पहुंचेंगे जहां से वे अरैल के लिए रवाना होंगे।और पढ़ेंTrending Videosअरैल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ रक्षा मंत्री के दौरे की शुरुआत होगी। इसमें सेना के बैंड की धुनों के बीच देशभक्ति का जज्बा देखने को मिलेगा। इस कार्यक्रम में तीनों सेनाओं के उच्चाधिकारी मौजूद रहेंगे। सुरक्षा और प्रोटोकॉल के चलते इस कार्यक्रम में आम जनता और मीडिया का प्रवेश वर्जित रखा गया है।विज्ञापनविज्ञापनएमईएस आईबी कैंट में रात्रि विश्राम के बाद चार मई सोमवार को रक्षा मंत्री न्यू कैंट में नार्थ टेक सिम्पोजियम-2026 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी शामिल होंगे। वह न्यू कैंट में होने वाली प्रदर्शनी में भी शिरकत करेंगे। प्रदर्शनी के आधिकारिक शुभारंभ, निरीक्षण, डेमो और अभिभाषण के बाद सुबह 11:35 बजे दिल्ली रवाना होंगे।सिम्पोजियम में जुट रहे हैं रक्षा विशेषज्ञसेना की उत्तरी और मध्य कमान की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन दिवसीय सिम्पोजियम में देशभर के रक्षा विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जुट रहे हैं। प्रदर्शनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली, एंटी-ड्रोन तकनीक, आर्टिलरी गन सिस्टम और उन्नत संचार प्रणालियों का सजीव प्रदर्शन किया जाएगा।रक्षा मंत्री उद्घाटन के बाद सैन्य रणनीतियों और नई तकनीकों पर आयोजित परिचर्चा में भी शामिल होंगे। चार से छह मई तक चलने वाले इस मुख्य आयोजन में रक्षा क्षेत्र के नवाचारी अपने अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों का लाइव डेमो देंगे। इस कार्यक्रम के समापन पर छह मई को सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे।
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May 3, 2026, 07:31 AM
आई. एम. डी. ने पूर्वी भारत, उत्तर पश्चिमी तट पर लू की स्थिति का पूर्वानुमान लगाया

आई. एम. डी. ने पूर्वी भारत, उत्तर पश्चिमी तट पर लू की स्थिति का पूर्वानुमान लगाया

नई दिल्ली:Weather Update IMD:अप्रैल में झुलसा देने वाली गर्मी के बाद मई में तेज आंधी और बारिश ने थोड़ा ही सही पर गर्मी के तेवर जरूर ढीले किए हैं. तापमान में 4 से 5 डिग्री की कमी आई है तो वहीं इस महीने मॉनसून को लेकर भी गुड न्यूज है. हालांकि आईएमडी के ताजा पूर्वानुमान रिपोर्ट के मुताबिक मई महीने के दौरान हिमालय के तलहटी (foothills) क्षेत्र, ओडिशा सहित पूर्वी तट के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में तेज गर्मी पड़ने की आशंका है, जिससे इन क्षेत्रों में सामान्य से लगभग 2-4 दिन अधिक लू चलने की संभावना है. इस बाबत एक एडवाइजरी भी जारी की गई है. वहीं भारत सरकार का कहना है कि घबराने की कोई बात नहीं है.कहां-कहां चलेगी लू?केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा,"मई के दूसरे (8-14 मई) और चौथे (22-28 मई) सप्ताह में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूर्वी तट में लू चल सकती है." इस खतरे को देखते हुए भारत मौसम विभाग ने सभी प्रभावित होने वाले राज्यों को हीट वेव एडवाइजरी जारी कर दी है.सरकार ने कहा- आपको घबराना नहीं हैकेंद्रीय मंत्री जीतेन्द्र सिंह के मुताबिक,"सरकार गर्मी से उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. राज्य और जिला स्तर पर पेयजल की उपलब्धता, सुचारू शीतलन व्यवस्था और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहल जरूरी होगा.बच्चों, बुजुर्गों और बाहरी कार्यों में लगे श्रमिकों सहित संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है."केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मई महीने के दौरान तापमान बढ़ने की स्थिति को लेकर घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि सावधानी से इसके असर से बचा जा सकता है. उन्होंने कहा कि देश के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान और लू की संभावना है, लेकिन यह स्थिति पूरे देश में एक समान नहीं है और समय पर भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की एडवाइजरी का पालन करके इससे प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है.आईएमडी ने जारी कर दिया अलर्टभारत मौसम विभाग के मुताबिक, खासकर शहरी और तटीय क्षेत्रों में रात के तापमान में वृद्धि से उमस बढ़ सकती है. पूर्वी तट, गुजरात और महाराष्ट्र में भी गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है.भारत मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में ईएनएसओ-तटस्थ स्थितियां बनी हुई हैं और दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति होने की संभावना है.इससे पहले 31 मार्च को अप्रैल-जून 2026 के दौरान मौसम का पूर्वानुमान जारी करते हुए भारत मौसम विभाग (IMD) के डायरेक्टर जनरल डॉ. एम मोहापात्रा ने एनडीटीवी से कहा था,"आमतौर पर मई और जून महीने में हर महीने 3 से 7 हीट वेव के दिन रिकॉर्ड किए जाते हैं. लेकिन इस साल हमारा पूर्वानुमान है की हीटवेव वाले दिनों की संख्या मईऔर जून में औसत से 5 से 7 दिन ज्यादा रहेगी यानी, इस साल मई और जून महीने में गर्मी औसत से ज्यादा पढ़ने की आशंका है".यह भी पढ़ें-मई में बारिश, लू का कोई अता पता नहीं, दिल्‍ली-उत्‍तराखंड के लिए IMD का अलर्ट, मौसम क्‍यों ले रहा फिरकी?यह भी पढ़ें-दिल्ली-एनसीआर में फिर बदला मौसम का मिजाज, कई इलाकों में हुई झमाझम बारिशमैं सुन रहा हूँ, क्या जानना चाहेंगे?
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May 3, 2026, 05:34 AM
उत्तर प्रदेश ने वास्तविक समय में सड़क निर्माण गुणवत्ता जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्विस प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया

उत्तर प्रदेश ने वास्तविक समय में सड़क निर्माण गुणवत्ता जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्विस प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया

लखनऊ:उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण और उसकी गुणवत्ता जांच के तरीके में बड़ा तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहा है। अब एक्सप्रेस-वे और हाईवे की क्वालिटी चेकिंग सिर्फ निर्माण पूरा होने के बाद नहीं, बल्कि काम के दौरान ही की जा रही है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्विट्जरलैंड की अत्याधुनिक सेंसर तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है।यूपीडा ने इस नई व्यवस्था के लिए स्विट्जरलैंड की ETH Zurich और RIT Laboratories AG के साथ करार किया है। इस तकनीक का हाल ही मेंगंगा एक्सप्रेस-वेपर सफल परीक्षण किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अब सड़क निर्माण की निगरानी अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी तरीके से संभव होगी।निर्माण के साथ ही हो रही गुणवत्ता की जांचपहले सड़क या एक्सप्रेस-वे बनने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच की जाती थी, जिससे अगर कोई खामी निकलती थी तो उसे सुधारने में समय और अतिरिक्त लागत लगती थी। लेकिन अब नई व्यवस्था में निर्माण के दौरान ही सड़क की निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को तुरंत ठीक किया जा सके।AI और स्विस सेंसर तकनीक से हो रही रियल टाइम मॉनिटरिंगइस हाईटेक सिस्टम के तहत सड़क पर एक विशेष वाहन चलाया जाता है, जिसमें सात अत्याधुनिक एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए होते हैं। यह वाहन सड़क की सतह, ऊंचाई में बदलाव और कंपन जैसे महत्वपूर्ण डेटा को लगातार रिकॉर्ड करता है।यह पूरा डेटा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर में प्रोसेस किया जाता है, जिससे सड़क की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण तुरंत किया जा सके।गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ में बांटा जा रहासेंसर से प्राप्त डेटा को AI सिस्टम प्रोसेस करके सड़क की गुणवत्ता को अलग-अलग कैटेगरी में बांटता है। इसमें ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियां शामिल हैं। इस सिस्टम की मदद से निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है और गुणवत्ता मानकों पर सख्ती से निगरानी रखी जाती है।गंगा एक्सप्रेस-वे में हुआ सफल परीक्षणहाल ही में शुरू हुए गंगा एक्सप्रेस-वे पर इस तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। निर्माण के साथ ही वहां सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की गई, जिससे यह साबित हुआ कि अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तकनीक का उपयोग काम को अधिक प्रभावी बना सकता है।निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही होगी तयनई प्रणाली से न केवल सड़क निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि निर्माण एजेंसियों पर भी अधिक जवाबदेही तय होगी। अगर किसी हिस्से में खामी पाई जाती है तो उसे तुरंत ठीक किया जा सकेगा, जिससे प्रोजेक्ट की समय सीमा और लागत दोनों पर नियंत्रण रहेगा।
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May 3, 2026, 04:45 AM
हार्वर्ड और आई. आई. टी. मद्रास ने संरचनाओं के निर्माण के लिए किराए नामक रोबोटिक चींटियों का विकास किया

हार्वर्ड और आई. आई. टी. मद्रास ने संरचनाओं के निर्माण के लिए किराए नामक रोबोटिक चींटियों का विकास किया

RAnts Construction Robots :कैसा हो अगर छोटे-छोटे रोबोट्स चीटियों या दीमकों की तरह मिलकर खुद-ब-खुद घर बनाएं? ये कोई साइंस फिक्शन मूवी की कहानी नहीं बल्कि सच्चाई है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और आईआईटी मद्रास के रिसर्चर्स ने रोबोटिक चींटियां या कहें कि RAnts बनाकर इसे हकीकत बना दिया है। इन रोबोट्स की खासियत है कि ये बिलकुल असली चीटियों की तरह काम करते हैं।इसके लिए किसी इंसानी मदद की भी जरूरत नहीं रहती। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तकनीक को एक्सबॉडीड इंटेलिजेंस का जबरदस्त उदाहरण माना जा रहा है। ये रोबोट सिर्फ बुद्धि के मामले में खास नहीं है बल्कि इनका आपस में मिलकर खुद काम करना इन्हें खास बनाता है।क्या हैं चीटियों जैसे रोबोट्स RAnts?रिसर्चर्स के अनुसार एक्सबॉडीड इंटेलिजेंस का मतलब उस समझ से है जो सिर्फ रोबोट के अंदर नहीं बल्कि उनके आसपास के पर्यावरण में भी होती है। वैज्ञानिक रोबोट्स के आस-पास के पर्यावरण में कुछ ऐसे निशान छोड़ते हैं, जो उन्हें साथी के तौर पर अगला कदम उठाने में मदद करता है। इसे वैज्ञानिकों ने स्टिगर्मी का नाम दिया है।इसके लिए असली चीटियां फेरोमोन नाम के रसायन का इस्तेमाल करती हैं। RAnts इसके लिए फोटोर्मोन नाम के तरीके का इस्तेमाल करते हैं। इसमें जब एक रोबोट किसी जगह पर लाइट का निशान छोड़ता है, तो दूसरे उसे देखकर समझ जाते हैं कि वहां कुछ बनाना है या तोड़ना है।(Ref.)खुद कैसे काम करते हैं छोटे रोबोट्स?RAnts को खास बनाता है उनका खुद काम करने का फीचर। इसमें किसी सेंट्रल कमांड या कंट्रोलर की जरूरत नहीं होती। जब रोबोट किसी खास मार्कर के पास इकट्ठा होते हैं, तो वे अपनी गति बढ़ा देते हैं और निर्माण का काम शुरू कर देते हैं। आसान नियमों का पालन करते हुए ये रोबोट्स बिना किसी लीडर के मुश्किल संरचनाएं खड़ी कर लेते हैं।कहां काम आएंगे ये रोबोट्सकिस काम आएंगी रोबोट चीटियां?भविष्य में जब इंसान चांद या मंगल ग्रह पर बसने की तैयारी करेंगे, तो वहां का माहौल बेहद खतरनाक होगा। दरअसल रेडिएशन, ऑक्सीजन की कमी और भीषण तापमान के बीच इंसानों का घर बनाना लगभग नामुमकिन होगा। यहां RAnts जैसे रोबोट्स काम आएंगे।रिपोर्ट्स के अनुसार, इंसानों के ग्रहों पर बसने से पहले ये नन्हे इंजीनियर खुद ही बुनियादी ढांचे और रहने की जगह तैयार कर सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक अंतरिक्ष में भविष्य की बस्तियों को सच बनाने का सबसे भरोसेमंद रास्ता साबित हो सकती है।
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May 3, 2026, 04:09 AM
AI कोडिंग पावरहाउसः 80 प्रतिशत काम मशीनों द्वारा किया जाता है, सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरियों के बारे में सवाल उठते हैं

AI कोडिंग पावरहाउसः 80 प्रतिशत काम मशीनों द्वारा किया जाता है, सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरियों के बारे में सवाल उठते हैं

एआई में एडवांसमेंट की रफ्तार ने सबको चौंका दिया है. अगर कोडिंग की बात करें तो कुछ समय पहले तक इसे एक असिस्टेंट के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन अब यह कोडिंग पावरहाउस बन गई है. हाल ही में OpenAI के प्रेसिडेंट Greg Brockman ने बताया कि अब कोडिंग का लगभग सारा काम एआई से हो रहा है. इससे एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जरूरत खत्म हो जाएगी? बता दें कि पिछले काफी समय से ऐसा डर जताया जा रहा है कि एआई के कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरी पर खतरा है और कई एक्सपर्ट्स भी ऐसी बातें कह चुके हैं. Brockman ने बताया कि दिसंबर तक उनकी कंपनी में एआई से कोडिंग का लगभग 20 प्रतिशत काम हो रहा था, लेकिन अब करीब 80 प्रतिशत कोडिंग एआई से हो रही है. एआई की इस रफ्तार ने सबको चौंका दिया है. उन्होंने कहा कि दिसंबर में एआई सिर्फ कोडिंग में सिर्फ मदद कर रही थी, लेकिन अब एआई पूरी कोडिंग ही कर रही है. यह हाल सिर्फ OpenAI का ही नहीं है और बाकी कंपनियों भी एआई से कोडिंग करवा रही हैं. गूगल सीईओ सुंदर पिचई ने कहा था कि कोडिंग का लगभग 75 प्रतिशत काम एआई कर रही है. मेटा भी यह कोशिश कर रही है कि कोडिंग का ज्यादा से ज्यादा काम एआई से लिया जाए. एंथ्रोपिक के सीईओ का मानना है कि एआई जल्द ही कोडिंग का पूरा काम अकेले संभाल सकेगी. जब कोडिंग का पूरा काम एआई अपने हाथ में ले लेगी तो इंजीनियरों की जरूरत कहां रहेगी? इस सवाल का जवाब है कि इंजीनियरों की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं होने वाली है. अभी भी कंपनियों को एआई को इंस्ट्रक्शन देने, कोड को रिव्यू करने समेत कई कामों के लिए इंजीनियरों की जरूरत है. Brockman ने कहा कि इंजीनियरों की जिम्मेदारी भी जरूरी है. OpenAI में कोडिंग के लिए इंसान जिम्मेदार है. उसकी अप्रूवल के बाद ही एआई जनरेटेड कोड को किसी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाता है. एआई से कोडिंग भले ही आसान और तेज हो गई है, लेकिन अब इसके खतरे भी सामने आने लगे हैं. हाल ही में एक सॉफ्टवेयर कंपनी PocketOS ने दावा किया था कि कोडिंग के लिए यूज होने वाले एक एआई एजेंट ने कुछ ही सेकंड में उसका पूरा प्रोडक्शन डेटाबेस डिलीट कर दिया.
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May 3, 2026, 02:00 AM
पोर्टेबल एम. आर. आई. प्रणाली ने आसानी और सुलभता के साथ अस्पताल की जांच में क्रांति ला दी है

पोर्टेबल एम. आर. आई. प्रणाली ने आसानी और सुलभता के साथ अस्पताल की जांच में क्रांति ला दी है

यह पोर्टेबल एमआरआई प्रणाली स्वूप पोर्टेबल एमआरआई सिस्टम (हाइपरफाइन) पर आधारित है, जिसे पहियों की मदद से आसानी से एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाया जा सकता है। इसकी विशेषता यह है कि इसके लिए अलग एमआरआई कक्ष, शील्डिंग या उच्च विद्युत क्षमता की आवश्यकता नहीं होती, जिससे अस्पतालों में जांच प्रक्रिया अधिक तेज, सुरक्षित और सुलभ बनती है।
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May 2, 2026, 08:30 PM
भारत ने दुश्मन के युद्धपोतों और विमान वाहक पोतों को निशाना बनाने में सक्षम नई मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने दुश्मन के युद्धपोतों और विमान वाहक पोतों को निशाना बनाने में सक्षम नई मिसाइल का सफल परीक्षण किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिह ने डीआरडीओ के विज्ञानियों और नौसेना को इस मिसाइल के परीक्षण के लिए बधाई दी है। एलआर-एसएचएएम को भारत के समुद्री तटों पर तैनात किया जाएगा। मिसाइल से भारतीय तटों से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के युद्धपोत या एयरक्राफ्ट करियर को भी निशाना बनाया जा सकेगा। कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता और तेज गति से अपनी दिशा बदलने की खासियत के कारण यह मिसाइल दुनिया की दूसरी मिसाइलों से ज्यादा खतरनाक है।
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May 2, 2026, 07:05 PM
इंजीनियरिंग के छात्रों ने प्रदर्शनी में नवीन परियोजनाओं का प्रदर्शन किया

इंजीनियरिंग के छात्रों ने प्रदर्शनी में नवीन परियोजनाओं का प्रदर्शन किया

संवाद न्यूज एजेंसीऔर पढ़ेंTrending Videosजगाधरी। सेठ जय प्रकाश पॉलिटेक्निक में प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए नवाचार व व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स की प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए। प्रदर्शनी से विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता तथा समस्या समाधान क्षमता प्रदर्शित करने का मंच मिला।प्रदर्शनी में विद्युत अभियांत्रिकी विभाग में पीएलसी प्रशिक्षक किट ने प्रथम, एंटी स्लिप अलार्म ने द्वितीय और सौर प्रयोगशाला मॉडल ने तृतीय स्थान पाया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग में यांत्रिक रोबोटिक भुजा ने पहला, आरएफआईडी आधारित उपस्थिति प्रणाली ने दूसरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सक्षम स्मार्ट कार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।विज्ञापनविज्ञापनवहीं कंप्यूटर अभियांत्रिकी विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्टिच-फ्लो प्रणाली ने प्रथम, महाविद्यालय प्रबंधन प्रणाली ने द्वितीय स्थान पाया। वहीं, महाविद्यालय प्लेसमेंट प्रणाली और कालेसर मार्केटप्लेस (ऑनलाइन खरीद मंच) के मॉडल तीसरे स्थान पर रहे।प्राचार्य इंजीनियर अनिल कुमार के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक समझ का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने स्मार्ट गृह स्वचालन प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपस्थिति प्रणाली, रेखा का अनुसरण करने वाला रोबोट, सौर ऊर्जा संचालित जल पंप, स्वचालित सड़क प्रकाश व्यवस्था, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, यातायात प्रबंधन प्रणाली और कम लागत वाला जल शुद्धिकरण मॉडल प्रस्तुत किए।प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों के अध्यक्ष निर्णायक मंडल में शामिल रहे। इस दौरान प्राचार्य ने विद्यार्थियों के मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी सिद्धांत और व्यावहारिक ज्ञान के बीच की दूरी को कम करती हैं। इससे विद्यार्थियों में नवाचार, तकनीकी दक्षता और आत्मविश्वास का विकास करती हैं।
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