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Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 02:22 PM
धारहरा के छिपे हुए इतिहास का अनावरणः पुरातत्वविदों ने बिहार में 1500 साल पुराने रहस्य का खुलासा किया

धारहरा के छिपे हुए इतिहास का अनावरणः पुरातत्वविदों ने बिहार में 1500 साल पुराने रहस्य का खुलासा किया

बिहार के मुंगेर जिला अंतर्गत धरहरा की विशाल पहाड़ियों और दुर्गम वनांचलों में छिपी सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासत अब लोकमान्यताओं के दायरे से निकलकर वैज्ञानिक शोध और प्रमाणिकता के धरातल पर आने को तैयार है। देश-विदेश के पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों की टीम के हालिया दौरे के बाद क्षेत्र के अनछुए इतिहास की परतों को उघाड़ने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। पैसरा, खोपावर, बंगलवा, माताडीह और कोल काली जैसे स्थानों पर बिखरे प्राचीन शिलाखंड, काले पत्थर, पुरानी स्थापत्य संरचनाएं और सदियों से चली आ रही मान्यताओं ने इतिहास की नई कड़ियों की खोज के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हालांकि, इन पुरास्थलों को 1500 वर्ष पुराना बताने या किसी विशिष्ट कालखंड से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे और उत्खनन की आवश्यकता है। मुंगेर जिले के धरहरा की पहाड़ियों (पैसरा, खोपावर, बंगलवा, माताडीह व कोल काली) में दबे 1500 साल पुराने रहस्य से उठेगा पर्दा विशेषज्ञों के दौरे के बाद अब जियो-मैपिंग, जीपीएस लोकेशन ट्रेसिंग और काले पत्थरों की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया होगी शुरू भगवान बुद्ध के विश्राम व तपस्या से जुड़ी लोकमान्यताओं को प्रमाण के स्तर पर परखने के लिए विस्तृत पुरातात्विक शोध की आवश्यकता जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुकन्या के अनुसार राज्य स्तरीय अधिकारियों के दौरे के बाद सर्वे और उत्खनन पर मंथन तेज विशेषज्ञों के शुरुआती दौरे के बाद अब मुख्य जोर इस बात पर दिया जा रहा है कि इन पहाड़ियों का सुव्यवस्थित हेरिटेज सर्वे कब और कैसे शुरू होगा। आगामी योजना के तहत अत्याधुनिक जियो-मैपिंग (Geo-Mapping) के माध्यम से संभावित पुरास्थलों की सटीक जीपीएस लोकेशन दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही पहाड़ियों व गांवों में बिखरे दुर्लभ काले पत्थरों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा, जिससे उनके प्राकृतिक स्रोत, भूगर्भीय प्रकार और यह पता लगाया जा सके कि क्या इनका इस्तेमाल प्राचीन काल में मूर्तियों, शिलालेखों या ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में किया गया था। स्थानीय परंपराओं और पीढ़ियों से चली आ रही लोककथाओं में पैसरा सहित आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों को प्राचीन धार्मिक व आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। जनश्रुतियों के अनुसार, भगवान बुद्ध ने अपने भ्रमण के दौरान धरहरा के इन शांत पहाड़ी अंचलों में विश्राम किया था और तपस्या की थी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के इस दौरे ने इन प्राचीन मान्यताओं को प्रमाण के स्तर पर जांचने का मार्ग प्रशस्त किया है। यदि आगामी सर्वे के दौरान शिलालेख, प्राचीन सिक्के, बुद्ध मूर्तियां, पुरानी ईंटें, स्थापत्य अवशेष या मृदभांड (प्राचीन मिट्टी के बर्तन) मिलते हैं, तो उनकी कार्बन डेटिंग और तुलनात्मक जांच से इस क्षेत्र की सटीक समय-सीमा और सभ्यता का निर्धारण हो सकेगा। इस पुरातात्विक पहल को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि राज्य सरकार यहां व्यवस्थित उत्खनन कराती है, तो क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता, नगरीय व्यवस्था और तत्कालीन जीवनशैली के उत्कृष्ट नमूने दुनिया के सामने आ सकते हैं। मामले में जानकारी देते हुए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुकन्या ने बताया कि राज्य स्तरीय अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का पहला प्राथमिक दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक संभावनाओं पर विभागीय चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में राज्य मुख्यालय के निर्देशानुसार यह स्पष्ट होगा कि यहां किस स्तर पर जियो-मैपिंग, पुरातात्विक सर्वे या उत्खनन का कार्य शुरू किया जाएगा। मुंगेर की पहाड़ियों में दफन 1500 साल का राज! इंग्लैंड-जापान के वैज्ञानिक पहुंचे, अब खुलेगा इतिहास का छिपा पन्ना
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Amar Ujala
Sep 21, 2026, 12:46 PM
विलेज स्कूल की पूर्व छात्रा रीना ने प्रसिद्ध आई. आई. टी. से रसायन विज्ञान में पी. एच. डी. की उपाधि प्राप्त की

विलेज स्कूल की पूर्व छात्रा रीना ने प्रसिद्ध आई. आई. टी. से रसायन विज्ञान में पी. एच. डी. की उपाधि प्राप्त की

गांव के सरकारी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा हासिल करने वाली रीना ने अब विश्वप्रसिद्ध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से रसायन विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल कर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। रीना की इस उपलब्धि पर उनके पिता राजकुमार, माता आशा देवी और परिवार के दो अन्य सदस्य रविवार को दीक्षांत समारोह में पहुंचे।
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Sep 21, 2026, 12:21 PM
हमीरपुर उप-मंडल ने 632 छात्रों को शामिल करते हुए विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया

हमीरपुर उप-मंडल ने 632 छात्रों को शामिल करते हुए विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया

हमीरपुर उपमंडल के स्कूलों के 632 विद्यार्थी ले रहे भागसंवाद न्यूज एजेंसीहमीरपुर। बलिदानी कैप्टन मृदुल शर्मा स्मारक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हमीरपुर में सोमवार को उपमंडल स्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन शुरू हुआ। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य तय कर उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि संस्कार, ज्ञान और परिश्रम के समन्वय से ही जीवन में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी वैज्ञानिक सोच को जाना और उनके बनाए विभिन्न विज्ञान मॉडलों का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने और मेहनत के साथ लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया।विज्ञापनजिला विज्ञान पर्यवेक्षक राजेश गौतम ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में हमीरपुर उपमंडल के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों के करीब 632 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।विज्ञापनइस अवसर पर प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कमल किशोर भारती, प्रधानाचार्य दीप्ति राणा, एपीएमसी अध्यक्ष अजय शर्मा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश आनंद सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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Sep 21, 2026, 11:53 AM
आई. आई. टी. बॉम्बे के छात्र की मौत का संबंध दो प्रोफेसरों से है।

आई. आई. टी. बॉम्बे के छात्र की मौत का संबंध दो प्रोफेसरों से है।

आईआईटी बॉम्बे में 20 वर्षीय छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद संस्थान के दो नाम लगातार चर्चा में हैं। इनमें एक आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे हैं और दूसरे एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला हैं। ऐसे में आइए दोनों की शिक्षा, शोध, पेशेवर सफर, प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बारे में जानते हैं।
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Sep 21, 2026, 10:39 AM
पुणे में गरमागरम बहस को लेकर आईटी इंजीनियर ने पत्नी की हत्या कर दी।

पुणे में गरमागरम बहस को लेकर आईटी इंजीनियर ने पत्नी की हत्या कर दी।

महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित देहूगांव इलाके में पारिवारिक विवाद के चलते एक अत्यंत दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां पेशे से IT इंजीनियर रहे एक पति ने आपसी विवाद के बाद धारदार हथियार से अपनी पत्नी का । इसके बाद खुद का भी जीवन समाप्त करने के इरादे से उसने इमारत की दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज वारदात देहूगांव इलाके में स्थित 'ओंकार नामक आलीशान सोसायटी' में शनिवार और रविवार के दरमियानी सुबह करीब साढ़े पांच बजे के आसपास घटी है। इसमें शुभांगी आकाश बारस्कर नामक (उम्र 26 साल) पत्नी की मौत हो गई हैं तो उसका 28 वर्षीय पति आकाश रामदास बारस्कर घायल होने की वजह से उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यह दम्पति पिछले चार महीनों से देहूगांव के इस फ्लैट में किराए पर रह रहे थे। इस वारदात को लेकर पुलिस अधिकारी विक्रम बनसोडे के द्वारा मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक अपराधी पति आकाश इसी इलाके में स्थित एक आईटी कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम करता था। उसने अपने गांव में जमीन खरीदी थी। इसका विरोध उसकी पत्नी शुभांगी बार-बार करती आ रही थी। इसी बात को लेकर ही दोनों के बीच में काफी अनबन भी चलती थी। शनिवार की मध्यरात्रि को भी इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तीखी नोकझोंक और विवाद हुआ था। यह विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर आकाश बारस्कर ने घर में रखे धारदार हथियार से शुभांगी पर हमला कर दिया और उसका गला रेतकर उसकी हत्या कर दी। पत्नी की हत्या करने के बाद, आरोपी पति आकाश ने इमारत की दूसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस खौफनाक घटना की जानकारी मिलते ही देहूरोड पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल आरोपी आकाश को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। देहूरोड पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि क्या इसके अलावा कोई और तो कारण नहीं था जिसके चलते इतना बड़ा विवाद हुआ है। समीर शेख की रिपोर्ट
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Sep 21, 2026, 08:34 AM
एप्पल का आईफोन हैंडऑफ़ः दो उपकरणों में एक मोबाइल नंबर साझा करें

एप्पल का आईफोन हैंडऑफ़ः दो उपकरणों में एक मोबाइल नंबर साझा करें

अगर आपके पास दो iPhone हैं और दोनों में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो Apple ने आपके लिए एक बेहद काम का फीचर पेश किया है. iOS 27 में आया iPhone Handoff आपको एक ही मोबाइल नंबर को दो iPhone पर इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. यानी बार-बार SIM या eSIM बदलने और दोनों फोन के लिए अलग-अलग मोबाइल कनेक्शन लेने की जरूरत कम हो सकती है. iPhone Handoff एक ऐसा फीचर है जिसके जरिए दो iPhone को एक ही मोबाइल नंबर से कनेक्ट जा सकता है. इसके बाद दोनों डिवाइस से उसी नंबर पर कॉल और मैसेज किए जा सकते हैं. Apple ने इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया है जो समय-समय से दो iPhone के बीच स्विच करते हैं. फीचर सेट होने के बाद जिस iPhone को इस्तेमाल करना है, उसे अनलॉक करना ही काफी है. फोन खुद Handoff के जरिए सक्रिय हो जाता है और यूजर उसी नंबर से कॉल या मैसेज कर सकता है. iPhone Handoff इस्तेमाल करने के लिए दोनों iPhone में iOS 27 या उससे नया वर्जन होना जरूरी है. दोनों फोन एक ही Wi-Fi नेटवर्क से जुड़े होने चाहिए और iCloud, FaceTime तथा iMessage के लिए एक ही Apple Account से साइन इन होना चाहिए. सेटअप के दौरान एक iPhone को Primary और दूसरे को Secondary डिवाइस बनाया जाता है. Primary iPhone में मुख्य eSIM और कैरियर सेटिंग्स रहती हैं. हालांकि, सपोर्ट करने वाले कैरियर की कंडिशन में दोनों फोन की अपनी eSIM का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. दोनों iPhone को पास रखकर किसी एक को अनलॉक करें. इसके बाद Settings > Cellular में जाएं और Set Up Cellular/Add eSIM या iPhone Handoff ऑप्शन चुनें. अब Use Number on This iPhone and Another पर टैप करके स्क्रीन पर दिए निर्देशों का पालन करना होगा. इसके बाद एक फोन को मुख्य यानी Primary iPhone के रूप में असाइन किया जा सकता है. फीचर एक्टिव होने पर Dynamic Island के पास एक छोटा नोटिफिकेशन भी दिखाई देता है. यहां सबसे जरूरी बात यह है कि iPhone Handoff सिर्फ फोन में मौजूद फीचर नहीं है. इसके लिए मोबाइल कैरियर का सपोर्ट भी जरूरी है. मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल अमेरिका में T-Mobile और जर्मनी में Telekom ने इसके लिए सपोर्ट की पुष्टि की है. अमेरिका में T-Mobile इसके लिए अतिरिक्त 5 डॉलर प्रति माह चार्ज कर रहा है. भारत में इस फीचर के लिए कैरियर सपोर्ट की उपलब्धता अलग से चेक करनी होगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दो iPhone रखने वाले यूजर्स के लिए यह फीचर काफी सुविधाजनक हो सकता है. जैसे कोई व्यक्ति नया iPhone खरीदने के बाद पुराने फोन को ट्रैवल के दौरान इस्तेमाल कर सकता है. इसी तरह ऑफिस और पर्सनल इस्तेमाल के लिए अलग-अलग iPhone रखने वाले यूजर्स भी एक ही नंबर दोनों डिवाइस पर इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, इसकी कुछ सीमाएं भी हैं. मसलन, इससे Apple Watch अपने आप दूसरे iPhone पर स्विच नहीं होती और कुछ Wallet आइटम जैसे ID और पास भी दोनों डिवाइस पर उपलब्ध नहीं हो सकते. स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है. टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं. इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.
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Sep 21, 2026, 04:35 AM
संघर्ष से सफलता तकः रूमी-1 के निर्माता की प्रेरणादायक यात्रा

संघर्ष से सफलता तकः रूमी-1 के निर्माता की प्रेरणादायक यात्रा

फिर, अचानक रुमी-1 ने उड़ान भरी और आसमान की ओर बढ़ गया। इस सफलता के पीछे एक ऐसे व्यक्ति का हाथ था, जिसने संघर्ष को ही अपना मार्गदर्शक बना लिया था। बचपन में वह रोज करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे। कॉलेज के पहले सेमेस्टर में सभी विषयों में फेल भी हुए। लेकिन उन्होंने इसमें भी अपने लिए एक नई मंजिल तलाश ली और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की ओर कदम बढ़ाया और धीरे-धीरे उस दुनिया में अपनी जगह बनाई, जहां कभी पहुंचने का सपना भी आसान नहीं था।कॉलेज के दौरान उनकी टीम का एक रिसर्च पेलोड नासा के क्यूब इन स्पेस कार्यक्रम के लिए चुना गया था और टीम को लॉन्च देखने के लिए अमेरिका जाने का निमंत्रण मिला था। वीजा इंटरव्यू में उनके पिता के पेशे और परिवार की सालाना आय के बारे में सवाल पूछा गया। आनंद ने ईमानदारी से पिता का ट्रैक्टर ड्राइवर होना और सालाना पारिवारिक आय 1.20 लाख रुपये बता दिया। इस वजह से उनका वीजा स्वीकृत नहीं हुआ। करीब एक साल तक जिस प्रोजेक्ट पर उन्होंने मेहनत की थी, उसकी लॉन्चिंग देखने के लिए वे अपनी टीम के साथ अमेरिका नहीं जा सके। इस बात से उन्हें दुख तो हुआ, लेकिन उन्होंने अपने काम को जारी रखा।वक्त का पहिया घूमा, तो हालात भी पूरी तरह बदल गए। जिस अमेरिका ने कभी आर्थिक तंगी के कारण उनका वीजा अस्वीकार कर दिया था, वर्षों बाद उसी देश ने उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। वह दुनिया के 23 चयनित प्रतिभागियों में जगह बनाने में सफल रहे। इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें अमेरिकी अंतरिक्ष क्षेत्र को करीब से समझने और नासा से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एवं एयरोस्पेस क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ काम किया और उनके अनुभवों से सीखने का मौका पाया।डॉ. आनंद मेगालिंगम का बचपन तमिलनाडु के एक ग्रामीण, साधारण किसान परिवार में बीता। उनके पिता कंधासामी मेगालिंगम परिवार का खर्च चलाने के लिए ट्रैक्टर चलाने और खेती का काम करते थे। स्कूली शिक्षा के बाद आनंद ने सुरक्षित कॅरिअर की दृष्टि से शुरुआत में कंप्यूटर साइंस/इंजीनियरिंग को चुना, लेकिन इस क्षेत्र में उनका मन न लगा। नतीजतन, कॉलेज के पहले ही सेमेस्टर में वह सभी विषयों में फेल हो गए। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। फिर, खेलों में उनकी प्रतिभा के चलते उन्हें दोबारा कॉलेज में दाखिला लेने का अवसर मिला। बता दें कि वह कॉलेज स्तर के एक बेहतरीन एथलीट/खिलाड़ी भी थे। इस बार उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को चुना, जो विमान और अंतरिक्ष तकनीक में उनकी रुचि के अधिक करीब था। इसका असर यह हुआ कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह बदल गया और उन्होंने 9.8 सीजीपीए के साथ गोल्ड मेडलिस्ट बनकर स्नातक की उपाधि हासिल की।वर्ष 2021 में डॉ. आनंद की टीम का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। इसके बाद 2023 में उन्होंने भारत का पहला हाइब्रिड रॉकेट लॉन्च किया, जिसमें सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के पेलोड शामिल थे। इसके बाद रुमी-1 मिशन के जरिये उन्होंने हाइब्रिड रॉकेट तकनीक और छोटे सैटेलाइट मिशनों के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला। उनकी एयरोस्पेस स्टार्टअप कंपनी, स्पेस जोन इंडिया, का मार्केट वैल्यूएशन लगभग 800 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू चुका है। खास बात यह है कि आनंद ने अपनी कंपनी में किसी बड़े कॉरपोरेट निवेशक के बजाय अपने पिता को पहला डायरेक्टर और को-फाउंडर बनाया। उन्होंने पिता को कंपनी में 50 फीसदी की हिस्सेदारी दी है।जीवन का एक कठिन अध्याय जीवन का सार नहीं होता।शुरुआत की असफलता को अंतिम परिणाम न मानें, जरूरत हो, तो अपनी दिशा बदलें।सीमित संसाधन सपनों की राह में बाधा हो सकते हैं, लेकिन मेहनत और सीखने की लगन आगे बढ़ने का रास्ता बनाती है।
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Sep 21, 2026, 04:31 AM
आधुनिक भंडारण प्रणालियों में नैंड फ्लैश मेमोरी का महत्व

आधुनिक भंडारण प्रणालियों में नैंड फ्लैश मेमोरी का महत्व

आज के समय में फोन में फोटो-वीडियो, लैपटॉप में बड़ी-बड़ी फाइलें और SSD में ढेर सारा डेटा स्टोर करना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सब आखिर स्टोर कैसे होता है. इस पूरे स्टोरेज सिस्टम में NAND Flash Memory का बड़ा रोल है. यही टेक्नोलॉजी स्मार्टफोन स्टोरेज, SSD, USB ड्राइव, मेमोरी कार्ड और कई दूसरे डिवाइस में इस्तेमाल होती है. इसकी खास बात यह है कि डिवाइस की बिजली बंद होने के बाद भी इसमें सेव किया गया डेटा सुरक्षित रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि NAND Flash के बिना क्यों Digital Storage मुश्किल है और इसकी खासियत क्या है. NAND Flash एक Non-Volatile Memory है. डिवाइस बंद होने पर भी इसमें मौजूद जानकारी डिलीट नहीं होती है. इसमें डेटा स्टोर करने के लिए बहुत छोटे Semiconductor Transistors और Memory Cells का इस्तेमाल होता है. हर Cell में Electrical Charge को फंसा कर रखा जाता है और इसी के आधार पर डेटा को 0 और 1 के रूप में पहचाना जाता है. Memory Controller अलग-अलग वोल्टेज लेवल की मदद से इन Cells में मौजूद जानकारी को पढ़ता है. NAND Cell में Floating Gate नाम का एक हिस्सा होता है, जो Electrical Charge को अपने अंदर रोककर रख सकता है. Charge की मात्रा बदलने से Cell का Threshold Voltage भी बदलता है. इसी अंतर से अलग-अलग Data Values को पहचाना जाता है. Data Write करने के दौरान Electrons को Floating Gate में भेजा जाता है, जबकि Erase प्रक्रिया में इस Charge को हटाया जाता है. NAND Flash Block-Based Design है. NAND Flash में डेटा को हर Bit के स्तर पर अलग-अलग Write या Erase करने की जगह Blocks में प्रोसेस किया जाता है. यही वजह है कि यह बड़े पैमाने पर Storage और Fast Data Operations के लिए यूजफुल बनती है. Air Purifier की सफाई नहीं, ये Settings बढ़ाएंगी Performance NAND Flash में ज्यादा डेटा कम जगह में स्टोर किया जा सकता है. यह डेटा को तेजी से एक्सेस करती है और कम पावर का इस्तेमाल करती है. इसमें कोई Moving Parts नहीं होते, इसलिए HDD की तुलना में झटके और वाइब्रेशन का असर कम पड़ता है. इसी वजह से NAND Flash का इस्तेमाल स्मार्टफोन और दूसरे Consumer Devices के अलावा Data Centers, Enterprise Storage, Automotive Systems और Medical Equipment में भी किया जाता है. Artificial Intelligence के बढ़ते इस्तेमाल के साथ High-Speed Storage की जरूरत भी बढ़ रही है. AI Systems को Training Data, Images, Videos और दूसरे बड़े Datasets के लिए भारी स्टोरेज चाहिए, जिसमें NAND-based SSDs जरूरी भूमिका निभाते हैं. इसी बढ़ती मांग का असर NAND Flash की कीमतों पर भी पड़ रहा है. 2026 में AI Infrastructure, Enterprise Flash Storage और Supply Constraints के कारण NAND Storage Market में कीमतों पर दबाव बढ़ा है. SIM बंद होने के बाद कितने दिनों तक चलता है WhatsApp? जानिए सच्चाई मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.
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Dainik Jagran
Sep 21, 2026, 04:30 AM
रेडमी ने बड़े डिस्प्ले और 5जी कनेक्टिविटी के साथ रेडमी नोट 17 5जी स्मार्टफोन का अनावरण किया

रेडमी ने बड़े डिस्प्ले और 5जी कनेक्टिविटी के साथ रेडमी नोट 17 5जी स्मार्टफोन का अनावरण किया

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में रेडमी ने अपना नया Redmi Note 17 5G फोन लॉन्च किया है जिसमें न सिर्फ बड़ी बैटरी मिल रही है बल्कि फोन में बड़े AMOLED डिस्प्ले के साथ 5G कनेक्टिविटी भी मिल रही है। वहीं आज हम आपको इस फोन का फुल रिव्यू देंगे। फोन को इस्तेमाल करने के बाद इसकी कुछ खूबियां साफ तौर पर सामने आती हैं। वहीं, कुछ जगहों पर आपको इसमें समझौता भी करना पड़ता है। खासतौर पर बैटरी और डिस्प्ले इस फोन का पावरफुल पॉइंट हैं, लेकिन कैमरा और परफॉर्मेंस में फोन थोड़ा और बेहतर हो सकता था। चलिए पहले फोन के डिजाइन से शुरू करते हैं... Redmi Note 17 5G का डिजाइन काफी मिनिमल सा लगता है। बड़ी बैटरी होने के बावजूद इसकी थिकनेस करीब 8.3mm और वजन 230 ग्राम है। फोन में 8,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। इतनी बड़ी बैटरी के हिसाब से फोन को ज्यादा मोटा न रखना Redmi के लिए अच्छी बात है। हालांकि फोन का फॉर्म फैक्टर काफी बड़ा लगता है, इसलिए छोटे हाथों वाले यूजर्स को इसे एक हाथ से यूज करने में परेशानी हो सकती है। हालांकि फोन की सबसे बड़ी खूबियों में 6.9 इंच की Full HD+ AMOLED डिस्प्ले है। स्क्रीन की ब्राइटनेस अच्छी है और आउटडोर विजिबिलिटी भी ठीक है। फोन में बेजल्स भी ज्यादा मोटे नहीं हैं, हालांकि नीचे का बेजल थोड़ा बड़ा लगता है। YouTube पर HDR सपोर्ट न मिलना इस डिस्प्ले की एक कमी लगता है। फोन में स्नैपड्रैगन 4 Gen 4 प्रोसेसर देखने को मिल रहा है और ये Android 16 पर चलता है। डेली यूज जैसे WhatsApp, Instagram, YouTube और ब्राउजिंग में फोन आसानी से काम करता है। UI में भी ज्यादा लैग नहीं मिलता। हालांकि, हैवी मल्टीटास्किंग और गेमिंग में इसकी लिमिटेशन नजर आती हैं। BGMI को Smooth और Extreme सेटिंग पर खेला जा सकता है, लेकिन गेमिंग के दौरान फ्रेम ड्रॉप देखने को मिल सकते हैं। AnTuTu स्कोर करीब 6.5 लाख के आसपास है। साथ ही इसमें UFS 2.2 स्टोरेज की जगह तेज स्टोरेज दिया जाता तो फोन और बेहतर हो सकता था। फोन में 8,000 mAh की बैटरी इस फोन की सबसे बड़ी खासियत है। नॉर्मल यूज में फोन दो से तीन दिन तक का बैकअप दे सकता है। हैवी यूजर्स को भी करीब दो दिन का बैकअप मिल सकता है। फोन में 45W चार्जिंग और 22.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट है। हालांकि, इतनी बड़ी बैटरी के साथ कम से कम 67W या इससे फास्ट चार्जिंग मिलती तो बेहतर होता, क्योंकि 45W पर बैटरी को पूरी तरह चार्ज होने में ज्यादा टाइम लग सकता है। फोन में 50MP का प्राइमरी और 8MP का फ्रंट कैमरा है। अच्छी लाइट में तस्वीरें ठीक आती हैं, लेकिन लो लाइट में डिटेल और कलर क्वालिटी कमजोर पड़ जाती है। इसमें अल्ट्रा-वाइड कैमरा और प्राइमरी कैमरे में OIS भी नहीं है। इस कीमत पर OIS और अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलता तो फोन का कैमरा सेटअप ज्यादा पावरफुल हो सकता था। फ्रंट और रियर दोनों में 1080p पर वीडियो रिकॉर्डिंग सपोर्ट मिल रहा है। कीमत की बात करें तो Redmi Note 17 5G के 6GB+128GB वाले मॉडल की कीमत करीब ₹28,000 और 8GB+128GB वेरिएंट की कीमत करीब ₹31,000 है। ऑफर्स के साथ कीमत कम हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि POCO M8 Power 5G में काफी हद तक ऐसा ही हार्डवेयर मिल रहा है और इसकी कीमत करीब ₹3,000 तक कम पड़ सकती है। इसलिए Redmi लेने से पहले पोको का डिवाइस भी जरूर चेक कर लें। ओवरऑल कहें तो Redmi Note 17 5G की सबसे बड़ी खूबियां इसकी 8,000mAh बैटरी और इसका बड़ा AMOLED डिस्प्ले है। वहीं कैमरा, गेमिंग परफॉर्मेंस और चार्जिंग स्पीड ऐसे एरिया हैं जहां रेडमी थोड़ा और बेहतर काम कर सकता था। अगर आपको लंबी बैटरी लाइफ और बड़ी डिस्प्ले वाला फोन चाहिए तो आप Redmi Note 17 5G के साथ जा सकते हैं। Redmi के 9,000 mAh बैटरी वाले नए 5G फोन की सेल कल से, 16GB तक RAM और स्नैपड्रैगन प्रोसेसर
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Sep 21, 2026, 04:27 AM
फेस आई. डी. बनाम फेस अनलॉकः ऐपल की तकनीक चेहरे की पहचान सुरक्षा में अग्रणी है

फेस आई. डी. बनाम फेस अनलॉकः ऐपल की तकनीक चेहरे की पहचान सुरक्षा में अग्रणी है

आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन में चेहरे से फोन अनलॉक करने का फीचर मिल जाता है. Apple इसे Face ID कहता है जबकि Android फोन में इसे आमतौर पर Face Unlock के नाम से जाना जाता है. देखने में दोनों फीचर एक जैसे लगते हैं लेकिन इनके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी में बड़ा अंतर है. यही वजह है कि हर Face Unlock सिस्टम, Apple के Face ID जितना सुरक्षित नहीं होता है. आपको बता दें कि Apple का Face ID सिर्फ फोन के फ्रंट कैमरे से चेहरा देखकर फोन अनलॉक नहीं करता. iPhone में इसके लिए TrueDepth कैमरा सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है. यह यूजर के चेहरे पर हजारों छुपे हुए इंफ्रारेड डॉट्स प्रोजेक्ट करके चेहरे का एक 3D मैप तैयार करता है. इस सिस्टम में इंफ्रारेड कैमरा और दूसरे सेंसर मिलकर चेहरे की गहराई और अलग-अलग हिस्सों की बनावट को पहचानते हैं. इसके बाद फोन इस जानकारी को सिक्योर तरीके से स्टोर किए गए फेस डेटा से मैच करता है. इसका एक बड़ा फायदा यह है कि कम रोशनी या अंधेरे में भी Face ID काम कर सकता है. Apple का सिस्टम फोटो या सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई देने वाली 2D तस्वीर से धोखा खाना काफी मुश्किल बनाता है. Android फोन में Face Unlock की टेक्नोलॉजी हर डिवाइस पर एक जैसी नहीं होती है. कई स्मार्टफोन में यह सिर्फ 2D फ्रंट कैमरे की मदद से चेहरे की पहचान करता है. कैमरा चेहरे की फोटो लेता है और सॉफ्टवेयर उसमें मौजूद पैटर्न को सेव किए गए डेटा से मिलाता है. ऐसे सिस्टम का फायदा यह है कि इसे फोन में लागू करना आसान और अपेक्षाकृत सस्ता होता है. लेकिन इसकी सुरक्षा 3D फेस स्कैनिंग वाले सिस्टम से अलग हो सकती है. हालांकि, सभी Android फोन का Face Unlock कमजोर नहीं होता. कुछ प्रीमियम Android डिवाइस एक्सट्रा हार्डवेयर, इंफ्रारेड सेंसर या 3D फेस-मैपिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए किसी Android फोन की सुरक्षा को सिर्फ Face Unlock नाम देखकर तय नहीं किया जा सकता है. Face ID का सबसे बड़ा अंतर इसका 3D डेप्थ डेटा है. यह सिर्फ यह नहीं देखता कि सामने चेहरा कैसा दिख रहा है बल्कि चेहरे की गहराई और साइज को भी समझता है. वहीं नॉर्मल 2D Face Unlock कैमरे से मिलने वाली फोटो पर निर्भर करता है. इस वजह से कुछ फोन में फोटो या मिलते-जुलते चेहरे से सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना ज्यादा हो सकती है. यही कारण है कि बैंकिंग, पासवर्ड मैनेजर और दूसरी संवेदनशील एक्टिविटी के लिए फोन निर्माता अलग-अलग लेवल की बायोमेट्रिक सुरक्षा उपलब्ध कराते हैं. सिर्फ फीचर के नाम से फैसला करना सही नहीं होगा. Android में भी ऐसे फोन मौजूद हैं जिनकी फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी काफी एडवांस है. अगर सुरक्षा आपकी प्राथमिकता है तो फोन खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि उसमें 2D कैमरा आधारित फेस अनलॉक है या 3D/डेप्थ सेंसर आधारित ऑथेंटिकेशन. चेहरे की पहचान सुविधाजनक जरूर है लेकिन यह अकेली सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. फोन में मजबूत PIN या पासकोड रखना हमेशा जरूरी है. कई कंडिशन में स्मार्टफोन बायोमेट्रिक के बजाय पासकोड मांगता है. इसलिए Apple का Face ID हो या Android का Face Unlock, सबसे सुरक्षित तरीका मजबूत पासकोड और भरोसेमंद बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल करना है. स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है. टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं. इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.
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Sep 21, 2026, 04:26 AM
गूगल ने पेश किए पासवर्डः पासवर्ड का एक सुरक्षित विकल्प

गूगल ने पेश किए पासवर्डः पासवर्ड का एक सुरक्षित विकल्प

आज के समय में Google Account में Sign In करने के लिए हर बार Password याद रखने और टाइप करने की जरूरत कम हो रही है. Google ने 2023 में Passkeys फीचर पेश किया था, जो Traditional Password की जगह Sign In करने का आसान तरीका देता है. Passkey की मदद से Google Account में Sign In करते समय Password टाइप करने की जगह डिवाइस के Biometrics का इस्तेमाल किया जा सकता है. डिवाइस के हिसाब से इसमें Fingerprint, Face Unlock, PIN या Screen Lock का सहारा लिया जा सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Google Account में Passkey कैसे ऑन करें. Passkey को Password के एक सुरक्षित ऑप्शन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. Google के मुताबिक इसे इस तरह तैयार किया गया है कि Phishing जैसे Online Attacks के खिलाफ सुरक्षा बेहतर हो. Passkeys पासवर्ड मैनेजर में Save और Sync किए जा सकते हैं. इसका फायदा यह है कि एक ही Passkey के जरिए दूसरे कॉम्पिटेबल डिवाइस पर भी Google Account में Sign In किया जा सकता है. जैसे अगर Android Phone पर Google Account के लिए Passkey बनाया गया है, तो वही Passkey नए डिवाइस पर अकाउंट एक्सेस करने में काम आ सकता है. इसमें iPhone भी शामिल है. Google के अनुसार, Passkey सिर्फ उन्हीं डिवाइस पर बनाना बेहतर है जो आपके अपने हों और जिन्हें आप नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं. इसे सेट करते समय Google आपसे अकाउंट में Sign In करने या Identity Verify करने के लिए कह सकता है. Passkey बनाने के लिए पहले Google Account के Passkeys Page पर जाएं. यहां Create a passkey पर टेप करें. अगर दोबारा यही ऑप्शन दिखाई दे तो उसे फिर सेलेक्ट करें. इसके बाद अपने डिवाइस को उसके स्क्रीन लॉक मेथड से अनलॉक करें. स्क्रीन पर दिए गए बाकी निर्देश को फॉलो करके सेटअप पूरा किया जा सकता है. अगर आप अलग-अलग डिवाइस पर Passkey इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो हर डिवाइस में यही प्रक्रिया दोहरानी होगी. Google Gemini ने टेस्ट के दौरान कर दी हैकिंग! तीन कंपनियों के सिस्टम में ऐसे बनाई सेंध Passkey तैयार होने के बाद यह Password डालने के अल्टरनेटिव की तरह काम करता है. Google Sign-In Page पर जाकर अपना Account Username डालें. अगर Passkey Sign-In ऑप्शन के तौर पर दिखाई दे, तो उसे सिलेक्ट करें. इसके बाद Device या Browser के निर्देशन फॉलो करें और Fingerprint, Face Recognition, PIN या दूसरे Supported स्क्रीन लॉक मेथड से डिवाइस अनलॉक करके वेरीफीकेशन पूरी करें. Passkey से Android Phone, iPhone, iPad या Hardware Security Key में स्टोर्ड पासकी का इस्तेमाल करके कंप्यूटर पर भी Sign In किया जा सकता है. कुछ मामलों में Google QR Code दिखा सकता है, जिसे फोन के कैमरा या QR Code स्कैनर से स्कैन करके मोबाइल पर Identity वेरीफाई की जा सकती है. SSD खराब हुआ तो क्या होगा? HDD से कितना अलग है मामला मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.
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Sep 21, 2026, 04:15 AM
विशेषज्ञों की टीम ने अभिनव जबड़े-चलने की तकनीक का उपयोग करके संकीर्ण वायुमार्ग वाले बच्चे का सफलतापूर्वक इलाज किया

विशेषज्ञों की टीम ने अभिनव जबड़े-चलने की तकनीक का उपयोग करके संकीर्ण वायुमार्ग वाले बच्चे का सफलतापूर्वक इलाज किया

मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रंगीला राम और उनकी टीम ने विशेष अस्थि-विचलन तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक के माध्यम से बच्चे के निचले जबड़े को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया गया। करीब एक महीने तक रोजाना दो बार 0.5 मिलीमीटर की दर से जबड़े को आगे बढ़ाया गया। इस प्रक्रिया में निचला जबड़ा कुल 20 मिलीमीटर आगे लाया गया।विज्ञापनजबड़ा आगे बढ़ने के साथ सांस की नली के रास्ते में भी विस्तार हुआ। इससे बच्चे के लिए सांस लेना पहले की तुलना में आसान हुआ। सर्जरी के बाद की जांच में जबड़े में लगाए गए उपकरण के जरिए हुए बदलाव भी स्पष्ट दिखाई दिए।विज्ञापनडॉक्टरों के अनुसार बच्चे का मुंह बिल्कुल नहीं खुल रहा था और सांस लेने का रास्ता भी काफी संकरा था। इसलिए सर्जरी के दौरान सुरक्षित रूप से सांस दिलाने की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती थी।इस चुनौती से निपटने के लिए बच्चे की श्वासनली में छेद कर विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। इस उपचार में आईजीएमसी शिमला के निश्चेतना विभाग और कान, नाक एवं गला विभाग की टीम ने भी सहयोग दिया। बच्चे की स्थिति को देखते हुए उपचार की पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ की गई। धीरे-धीरे जबड़े को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी।
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Sep 21, 2026, 01:09 AM
प्रसिद्ध शोधकर्ता डॉ. प्रदीप कुमार की उपलब्धियांः हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात

प्रसिद्ध शोधकर्ता डॉ. प्रदीप कुमार की उपलब्धियांः हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात

डॉ. प्रदीप कुमार के नाम 52 पुस्तकें दर्ज हैं और वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में 51 शोध-पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में 12 शोधार्थी पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. प्रदीप ने इस उपलब्धि को पूरे हिमाचल प्रदेश और विशेष रूप से कांगड़ा जिले के लिए गौरव का विषय बताया है। संवाद
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Sep 20, 2026, 08:22 PM
सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज चर्क में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन का समापन

सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज चर्क में स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन का समापन

चुर्क। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज चुर्क में आयोजित स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआईएच) का शनिवार को पुरस्कार वितरण के साथ समापन हुआ। हार्डवेयर श्रेणी में द सेवियर और सॉफ्टवेयर श्रेणी में माइनटेक टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने तकनीकी नवाचार और समस्या समाधान पर आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण का आयोजन 11 और 12 सितंबर को हुआ था। इसमें 40 टीमों ने हिस्सा लिया। इनमें 29 सॉफ्टवेयर और 11 हार्डवेयर आधारित टीमें थीं। पहले दिन विशेषज्ञों और अतिथियों ने प्रतिभागियों को प्रोजेक्ट में सुधार और तकनीकी समाधान विकसित करने के संबंध में सुझाव दिए। दूसरे दिन सभी प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया गया। प्रारंभिक चरण के बाद 17 टीमों ने फाइनल राउंड के लिए जगह बनाई। 16 और 17 सितंबर को फाइनल राउंड में चयनित टीमों ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। हार्डवेयर श्रेणी में आलोक कुमार के नेतृत्व वाली द सेवियर टीम प्रथम, सत्यम तिवारी की कृषि विजन टीम द्वितीय और प्रधुमन सिंह की एंटीफाल्कन टीम तृतीय रही। वहीं सॉफ्टवेयर श्रेणी में हिमानी नाग की माइनटेक टीम ने पहला, श्रद्धा सिंह की कॉम्प्लिस्कैन ने दूसरा और दीपिका सिंह की रिजालिटिक्स टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रशांत पांडेय ने जूरी सदस्यों के प्रति आभार जताया। संस्थान के निदेशक प्रो. केएस वर्मा ने विद्यार्थियों के नवाचारों की सराहना करते हुए उन्हें अपने प्रोजेक्ट को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डॉ. अमोद तिवारी, डॉ. हिमांशु कटियार, डॉ. डीके त्रिपाठी, डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. हरीश चंद्र उपाध्याय, डॉ. आशीष रंजन मिश्रा, डॉ. मैनेजर यादव, आशीष श्रीवास्तव, राम ईश्वर वैस और सिकंदर समेत अन्य फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे। आयोजन आईईईई स्टूडेंट ब्रांच की ओर से किया गया।
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Sep 20, 2026, 07:45 PM
छात्र उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे रेशम के उत्पादन के लिए उन्नत तकनीक सीखते हैं

छात्र उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे रेशम के उत्पादन के लिए उन्नत तकनीक सीखते हैं

डॉ. देवाशीष ने कहा कि इंजीनियरिंग विशेषकर कारपेट टेक्नालाॅजी के छात्रों को सिल्क यार्न के बारे में बारीक जानकारी होनी चाहिए। सत्र में कोकून प्रोसेसिंग के बाद की तकनीक व उच्चीकृत पहलुओं पर प्रकाश डाला। कोकून स्टिफलिंग, सॉर्टिंग और ग्रेडिंग, कोकून कुकिंग, ब्रशिंग, मॉडर्न रीलिंग सिस्टम, री-रीलिंग और क्वालिटी कंट्रोल के साथ ही स्पन सिल्क उत्पादन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। छात्रों को कोकून से हाई-क्वालिटी कच्चा सिल्क बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के इनोवेशन पर जोर दिया। कहा कि इससे वे फाइबर की शुद्धता, मजबूती और इको-फ्रेंडली प्रोसेसिंग को बेहतर बना सकते हैं। आईआईसीटी के निदेशक डाॅ. राजीव कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि सत्र हमारे छात्रों के लिए काफी उपयोगी रहा। इसमें उन्हें सिल्क तकनीक और इसके औद्योगिक इस्तेमाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
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Sep 20, 2026, 07:37 PM
छात्रों ने पहाड़ी ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने के लिए धुएं से मुक्त बायोमास से चलने वाला चूल्हा विकसित किया

छात्रों ने पहाड़ी ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने के लिए धुएं से मुक्त बायोमास से चलने वाला चूल्हा विकसित किया

प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्राध्यापक डाॅ. पीसी तिवारी के मार्गदर्शन में एमटेक छात्रों ने धुआं रहित बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाया है। यह चूल्हा पहाड़ में ग्रामीणों के जीवन को आसान कर सकता है। इससे जंगलों की जलौनी लकड़ी पर निर्भरता भी खत्म हो सकती है। डाॅ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा धुआं रहित चूल्हा बनाया जाए, जिससे पहाड़ के लोगों का जीवन आसान हो जाए और पिरूल सहित पर्यावरण जैसी प्रमुख समस्याओं से भी निजात मिले। उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की अभिकल्प नव प्रवर्तन (डीआईसी) परियोजना के तहत इस पर काम शुरू किया और उनके दिशा निर्देशन में एमटेक छात्रों ने बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाने की तकनीक ईजाद कर ली। इस नवाचार का पेटेंट भी फाइल कर दिया गया है।विज्ञापन-इंसेटऐसे बना बायोमास फायर्ड चूल्हापंतनगर। डाॅ. तिवारी ने बताया कि इस तकनीक में उत्तराखंड के जंगलों में उपलब्ध बायोमास (पिरूल) का प्रयोग किया गया है। जिससे ऊर्जा की जरूरत के लिए लकड़ी के ईंधन पर निर्भरता खत्म होगी और जंगल की आग रोकने सहित पौधों के पुनर्जन्म में मदद मिलेगी। बताया कि लोहे की चादर (स्क्रैप) से करीब दस इंच आयताकार और 15 इंच ऊंचाई का चूल्हा डिजाइन किया गया है। जिसके बीच में करीब चार इंच आयताकार लोहे की गोल चादर का पाइप लगाकर उसे ढक्कन से बंद किया गया है। साथ ही धुआं निकलने के लिए ऊंचाई के बीच दो इंच चौड़ा और दो फीट लंबा पाइप निकाला गया है। इसकी बाहरी और अंदर की दीवार के बीच पिरूल का चूरा और सस्ते मिश्रण का प्रयोग किया है। इस चूल्हे को व्यावसायिक तौर पर बनाने में डेढ़ से दो हजार रुपये खर्च हुए। संवादविज्ञापन-इंसेटएलपीजी का बन सकता है विकल्पपंतनगर। डॉ. तिवारी ने बताया कि पहले चरण में बायोमास स्टोव और दूसरे चरण में बायोमास फायर्ड चूल्हा बनाया है। तीसरे चरण में तकनीक को मॉडिफाई कर एलपीजी का विकल्प बनाने पर काम करेंगे और उन्नत चूल्हे बनाकर राज्य सरकार में प्रस्तुतिकरण के बाद रिमोट एरिया में उपलब्ध कराएंगे। यदि राज्य सरकार ने सहयोग किया तो जल्द इस तकनीक का व्यावसायीकरण कर वृहद स्तर पर बायोमास चूल्हे का निर्माण शुरू हो जाएगा। संवाद
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Sep 20, 2026, 06:42 PM
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उन्नत सामग्री डिजाइन और विकास पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उन्नत सामग्री डिजाइन और विकास पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

संवाद न्यूज एजेंसीबिलासपुर। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली में उन्नत सामग्री डिजाइन एवं विकास विषय पर एक सप्ताह की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला रविवार से शुरू हो गई। इसमें बिलासपुर के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।20 से 26 सितंबर तक आयोजित कार्यशाला में देश-विदेश के प्रतिभागियों को उन्नत सामग्री विज्ञान, डीएफटी, मशीन लर्निंग और कंप्यूटेशनल तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इसका आयोजन जेएनयू के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज की ओर से जेएनयू पेयर नेटवर्क ऑन फ्यूचर सस्टेनेबल फ्यूचर और इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स के सहयोग से किया जा रहा है।विज्ञापनकार्यशाला में एसआईईएसटीए सॉफ्टवेयर के माध्यम से सामग्री के डिजाइन और विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ. अरुण कुमार विभिन्न सत्रों में सॉफ्टवेयर के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दे रहे हैं। पहले दिन उन्होंने पर्यावरण तैयार करने और एसआईईएसटीए की स्थापना का प्रशिक्षण दिया। आगामी सत्रों में वे डीएफटी, स्यूडोपोटेंशियल, सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक गुण, बैंड स्ट्रक्चर, हेट्रोस्ट्रक्चर और एडसॉर्प्शन पर हैंड्स ऑन प्रशिक्षण देंगे।
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