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Feb 4, 2026, 01:06 AM
गूगल का अल्फाजीनोम ए. आई. मॉडल सटीक डी. एन. ए. विश्लेषण के साथ रोग निदान में क्रांति लाता है।

गूगल का अल्फाजीनोम ए. आई. मॉडल सटीक डी. एन. ए. विश्लेषण के साथ रोग निदान में क्रांति लाता है।

गूगल ने एक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल बनाया है, जो DNA में हुए हर बदलाव को समझकर बता सकता है कि उसका असर हमारे शरीर पर क्या होगा। आसान तरीके से कहे तो यह मॉडल DNA को ऐसे पढ़ता है, जैसे कोई एक्सपर्ट डॉक्टर MRI या CT Scan और ब्लड रिपोर्ट एक साथ देखकर बीमारी का अनुमान लगाता है। गूगल के मुताबिक, AlphaGenome ऐसा AI मॉडल है जो DNA की लंबी-लंबी सीक्वेंस को आसानी से पढ़कर बीमारियों का लगभग सटीक अंदाजा लगा लेता है।पहले समझते हैं कि DNA क्या है और यह अहम क्यों है?हमारे शरीर की हर कोशिका में एक खास किताब होती है, जिसे जीनोम (Genome) कहते है। इसी में यह जानकारी होती है कि हम कैसे दिखेंगे, हमारा शरीर कैसे काम करेगा और हमें किन बीमारियों का खतरा हो सकता है। यह किताब DNA की भाषा में लिखी होती है, जिसमें करोड़ों अक्षर होते हैं।समस्या तब आती है जब DNA के किसी एक अक्षर में छोटा-सा बदलाव हो जाए, क्योंकि यही बदलाव कई बार गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है। अब तक यह समझना वैज्ञानिकों के लिए बेहद मुश्किल था कि ऐसे बदलाव का शरीर पर क्या असर पड़ेगा। इस चुनौती को AlphaGenome आसान करता है।कितना पावरफुल है यह AI मॉडलगूगल का यह मॉडल एक बार में 10 लाख DNA पढ़ सकता है और यह अनुमान लगा सकता है कि कौन सा जीन कहां से शुरू होता है, कहां खत्म होता है, कितना RNA बनेगा, कौन सा हिस्सा एक्टिव रहेगा और कौन सा हिस्सा किसी प्रोटीन से जुड़ेगा। अब तक जो AI मॉडल थे, वे या तो DNA का छोटा हिस्सा बहुत गहराई से देखते थे या बड़ा हिस्सा बहुत मोटे तौर पर समझ पाते थे। AlphaGenome पहली बार दोनों काम एक साथ करता है। यह बहुत लंबा DNA भी पढ़ता है और हर एक DNA को बारीकी से समझता भी है।बीमारी समझने में कैसे मदद करेगा?मान लीजिए, किसी इंसान के DNA में एक अक्षर बदल गया और A की जगह T आ गया। डॉक्टर को यह जानना है कि क्या इससे कोई जीन ज्यादा एक्टिव हो जाएगा? क्या गलत RNA बनेगा? क्या कैंसर या कोई जेनेटिक बीमारी शुरू हो सकती है? AlphaGenome ऐसे बदलाव को एक सेकंड में स्कोर कर सकता है और बता सकता है कि यह बदलाव कितना खतरनाक हो सकता है।वैज्ञानिकों ने इसका इस्तेमाल कैंसर से जुड़े एक उदाहरण में किया। एक तरह के ब्लड कैंसर (T-ALL) में DNA के कुछ खास हिस्सों में बदलाव पाए गए थे। AlphaGenome ने सही-सही अनुमान लगाया कि ये बदलाव पास के एक जीन (TAL1) को गलत तरीके से चालू कर देते हैं, जो इस कैंसर की असली वजह थी।सिर्फ बीमारी ही नहीं, और भी काम हो सकेंगेAlphaGenome का इस्तेमाल सिर्फ बीमारी समझने के लिए नहीं होगा। दुर्लभ बीमारियां, यानी जिन बीमारियों की वजह अब तक समझ नहीं आती थी, वहां यह AI बड़ा रोल निभा सकता है। सिंथेटिक बायोलॉजी मतलब, वैज्ञानिक भविष्य में ऐसा DNA डिजाइन कर सकते हैं जो सिर्फ दिमाग की कोशिकाओं में काम करे, मांसपेशियों में नहीं। DNA का कौन सा हिस्सा सबसे जरूरी है, कौन सा सिर्फ सपोर्ट करता है, यह सब समझना आसान हो जाएगा।कौन इसे इस्तेमाल कर सकता हैअभी इसे आम लोग इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। गूगल ने साफ किया है कि AlphaGenome रिसर्च के लिए है, इलाज या पर्सनल जीन टेस्ट के लिए नहीं। यह डॉक्टर की जगह नहीं लेगा, बल्कि वैज्ञानिकों को बेहतर रिसर्च करने में मदद करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मॉडल जीनोम रिसर्च में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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Feb 3, 2026, 11:12 PM
भारत ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण किया, एलीट ग्रुप ऑफ कंट्रीज में शामिल हुआ

भारत ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण किया, एलीट ग्रुप ऑफ कंट्रीज में शामिल हुआ

भारत ने एडवांस मिसाइल टेक्नोलॉजी में ऊंची छलांग लगाई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण किया है. यह ऐसी क्षमता है जिसे दुनिया में बहुत कम देश ही हासिल कर पाए हैं. इस मिसाइल टेक्नोलॉजी का 3 फरवरी, 2026 को ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में सफल परीक्षण किया गया. यह तकनीक अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें विकसित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास रैमजेट-संचालित मिसाइल तकनीक मौजूद है. सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक क्या है? रैमजेट एक तरह का एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन है, जो मिसाइल की आगे की गति से आने वाली हवा को कंप्रेस करता है. इसमें पारंपरिक जेट इंजन की तरह घूमने वाले जटिल पार्ट्स की जरूरत नहीं पड़ती. सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट में ठोस ईंधन नियंत्रित तरीके से जलता है और वातावरण से आने वाली हवा इंजन से होकर गुजरती है, जिससे उच्च गति पर लगातार थ्रस्ट मिलता रहता है. ट्रेडिशनल रॉकेट मोटर जल्दी फ्यूल खत्म कर देते हैं और फिर कोस्टिंग मोड (ईंधन/ऊर्जा बचाने की एक तकनीक) में चलते हैं. वहीं रैमजेट मिसाइलें वातावरण से आने वाली हवा को ही एक तरह से ईंधन के रूप में इस्तेमाल करती हैं. इससे पारंपरिक रॉकेट की तुलना में रैमजेट मिसाइलें ज्यादा देर तक तेज गति बनाए रख सकती हैं और अंतिम चरण में अधिक घातक साबित होती हैं. रैमजेट मिसाइलों से दुश्मन विमानों के लिए बचना बहुत मुश्किल हो जाता है.
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Feb 3, 2026, 09:16 PM
ए. के. टी. यू. के 11 छात्र लैंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर इंटर्नशिप

ए. के. टी. यू. के 11 छात्र लैंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर इंटर्नशिप

लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के बीटेक के 11 छात्रों का कैंपस प्लेसमेंट सॉफ्टवेयर इंजीनियर इंटर्न के पद पर हुआ है। एडिको ग्रुप में चयनित इन छात्रों को कंपनी दो महीने की ट्रेनिंग के दौरान 20 हजार रुपये देगी। इसके बाद आठ से दस लाख तक का पैकेज छात्रों के प्रदर्शन के अनुसार देगी।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंडीन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रो. नीलम श्रीवास्तव ने बताया कि कंपनी इनके अलावा अन्य सुविधाएं भी छात्रों को देगी। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने छात्रों को बधाई दी। विश्वविद्यालय लगातार छात्रों को ट्रेनिंग कराने के साथ ही कैंपस प्लेसमेंट का आयोजन कर रहा है। ताकि अधिक से अधिक छात्र रोजगार पा सकें।विज्ञापनविज्ञापन
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Feb 3, 2026, 08:39 PM
एम्स ने अंटार्कटिका में दुनिया के सबसे लंबे टेली-रोबोटिक्स अल्ट्रासाउंड के साथ ग्राउंड ब्रेक किया

एम्स ने अंटार्कटिका में दुनिया के सबसे लंबे टेली-रोबोटिक्स अल्ट्रासाउंड के साथ ग्राउंड ब्रेक किया

विस्तारFollow Usअखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एम्स रिसर्च डे 2026 के मौके पर प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने दिल्ली में बैठकर अंटार्कटिका में मौजूद भारतीय रिसर्च स्टेशन (मैत्री) पर एक मरीज का रीयल-टाइम अल्ट्रासाउंड किया। यह दुनिया की सबसे लंबी दूरी (लगभग 12,000-14,000 किलोमीटर) पर किया गया टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड है। यह चिकित्सा क्षेत्र में किया गया नया अध्याय है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रो. डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने बताया कि इस तकनीक में दिल्ली में बैठे डॉक्टर एक हाईटेक हैप्टिक डिवाइस (जो हाथ की हरकत महसूस कराती है) का इस्तेमाल करते हैं। उनकी हर मूवमेंट अंटार्कटिका में लगे रोबोटिक आर्म को तुरंत पहुंचती है, जो अल्ट्रासाउंड प्रोब को पकड़े हुए होता है।विज्ञापनविज्ञापनप्रोब मरीज के शरीर पर सही जगह रखकर स्कैन करता है और उच्च गुणवत्ता वाली इमेजेस रीयल-टाइम में दिल्ली वापस आती हैं। डॉक्टर पेट की जांच, ट्रामा के लिए जल्दी स्कैन, दिल की इकोकार्डियोग्राफी, डॉप्लर, गर्दन और अन्य महत्वपूर्ण जांच आसानी से कर पाते हैं। इसकी प्रक्रिया बिल्कुल वैसी है जैसे मरीज के सामने खड़े होकर कर रहा हों।इस तकनीक से दुनिया के सबसे दूर-दराज तक पहुंच संभवअंटार्कटिका में भारतीय स्टेशन पर काम करने वाले वैज्ञानिकों और सदस्यों के लिए मेडिकल सुविधाएं बहुत सीमित होती हैं। वहां 50 डिग्री से भी कम तापमान, पूर्ण अलग-थलग स्थिति और इमरजेंसी में तुरंत फैसला लेना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। अगर अचानक चोट, पेट दर्द, सीने में दिक्कत या आंतरिक चोट जैसी समस्या हो तो सही निदान के बिना समय बर्बाद हो सकता है और जान जा सकती है।डॉ. विकास डोगरा ने अंटार्कटिका में भारतीय अंटार्कटिक प्रोग्राम के साथ काम के अनुभव से इस समस्या को समझा और इस तकनीक को वहां लगाने का सुझाव दिया। डॉ. आनंद कुमार सिंह और डॉ. प्रदीप मल्होत्रा के मार्गदर्शन व सपोर्ट से प्रोजेक्ट को सभी मंजूरियां मिलीं और इसे सुरक्षित व व्यावहारिक बनाया गया। प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने बताया कि यह भारत की तकनीक दुनिया के सबसे दूर-दराज और कठिन इलाकों तक एक्सपर्ट स्वास्थ्य सेवा पहुंचा सकती है। यह तकनीक आपदा क्षेत्रों (जैसे भूकंप, बाढ़), दूरदराज के गांवों, ऊंचे पहाड़ी इलाकों, समुद्र में तेल रिग्स, जहाजों और यहां तक कि युद्ध क्षेत्रों में भी इस्तेमाल हो सकती है।एम्स, आईआईटी सहित अन्य संस्थानों ने किया आविष्कारयह रोबोटिक आर्म एम्स, आईआईटी दिल्ली, इंडियन हेल्थकेयर फाउंडेशन फॉर क्रिएटिविटी (आईएचएफसी), नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर) और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल (आरजीएसएसएच) के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है।आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर सुबीर कुमार साहा ने इसकी सटीकता, मजबूती और दूर से भरोसेमंद काम करने की क्षमता विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। युवा रिसर्चर्स उदयन बनर्जी और सिद्धार्थ गुप्ता ने सिस्टम की इंस्टॉलेशन, टेक्निकल सेटअप और ग्राउंडवर्क में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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Feb 3, 2026, 07:45 PM
तकनीकी शिक्षा व्यापार में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्वः एक निरंतर चुनौती

तकनीकी शिक्षा व्यापार में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्वः एक निरंतर चुनौती

हमीरपुर। महिलाएं आज शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, विज्ञान और खेल सहित लगभग हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। मगर तकनीकी शिक्षा के कुछ ट्रेड अब भी ऐसे हैं, जहां महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंमैकेनिक मोटर व्हीकल ट्रेड में भी एक ऐसा ट्रेड है, जिसमें महिला प्रशिक्षु अपनी रुचि नहीं दिखा रही हैं। मैकेनिक मोटर व्हीकल ट्रेड में पिछले चार वर्षों के दौरान केवल एक महिला प्रशिक्षु ने दाखिला लिया था। यह दाखिला भी करीब चार वर्ष पहले हुआ था। इसके बाद 2021-23 सत्र के बाद से अब तक किसी भी महिला प्रशिक्षु ने इस ट्रेड में प्रवेश नहीं लिया है।विज्ञापनविज्ञापननियमों के अनुसार यह ट्रेड महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से खुला है। वाहन मरम्मत और मैकेनिक से जुड़े इस कार्य में अभी भी पुरुषों का वर्चस्व है। मैकेनिक मोटर व्हीकल ट्रेड में केवल मरम्मत कार्य के रूप में ही भविष्य नहीं बनाया जा सकता है, बल्कि इसमें अन्य भी रोजगार के संसाधन उपलब्ध हैं।महिलाओं में इस ओर न आना जागरूकता की कमी भी हो सकती है, क्योंकि महिलाएं केवल ब्यूटी पार्लर, सिलाई कढ़ाई और अन्य ट्रेड की ओर आकर्षित हो रही हैं। महिलाओं को इस ट्रेड के प्रति जागरूक करना अनिवार्य है।कोट :सुजानपुर आईटीआई में 2021-23 के बैच में केवल एक महिला प्रशिक्षु ने ही मैकेनिक मोटर व्हीकल ट्रेड में दाखिला लिया था। उसके बाद किसी ने भी इसमें रुचि नहीं दिखाई है। महिलाओं को सभी ट्रेड के बारे में जागरूक किया जाएगा।-आतीश वर्मा, प्रधानाचार्य, आईटीआई, सुजानपुर
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Feb 3, 2026, 04:03 PM
भारत ने ठोस ईंधन युक्त रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया

भारत ने ठोस ईंधन युक्त रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया

भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है.रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया है. यह परीक्षण मंगलवार (3 फरवरी 2026) को सुबह करीब 10:45 बजे, ओडिशा तट पर चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया. इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास यह एडवांस तकनीक है. SFDR तकनीक की मदद से लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें विकसित की जा सकती हैं, जो दुश्मन पर रणनीतिक बढ़त दिलाती हैं.SFDR तकनीक को भविष्य की लंबी दूरी तक मार करने वाली हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए बेहद अहम र्ण माना जा रहा है. Solid Fuel Ducted Ramjet (SFDR) technology was successfully flight tested from the Integrated Test Range (ITR), Chandipur off the coast of Odisha today. SFDR is very crucial for development of long range Air to Air Missilespic.twitter.com/66ZwE0micY — DRDO (@DRDO_India)February 3, 2026 DRDO के मुताबिक, परीक्षण के दौरान सिस्टम के सभी अहम हिस्सों नोज़ल-लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट इंजन और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर ने उम्मीद के मुताबिक काम किया. पहले ग्राउंड बूस्टर से मिसाइल को तय रफ्तार दी गई, इसके बाद रैमजेट सिस्टम ने सही तरीके से प्रदर्शन किया. परीक्षण के दौरान मिले उड़ान से जुड़े आंकड़ों को बंगाल की खाड़ी के तट पर तैनात ट्रैकिंग सिस्टम्स से रिकॉर्ड किया गया, जिससे सिस्टम की सफलता की पुष्टि हुई. इस लॉन्च को DRDO की कई प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने मॉनिटर किया. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, SFDR तकनीक भारत की हवाई युद्ध क्षमता को और मजबूत करेगी और भविष्य की मिसाइल प्रणालियों में अहम भूमिका निभाएगी. SFDR तकनीक के सफल प्रदर्शन से भारत की आधुनिक हवाई युद्ध क्षमताओं को और मजबूती मिलने की संभावना है. इस प्रणाली के जरिए विकसित होने वाली मिसाइलें अधिक दूरी तक प्रभावी ढंग से लक्ष्य भेद सकेंगी, जिससे वायुसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इस सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए DRDO और देश के रक्षा उद्योग को बधाई दी है. उन्होंने इसे भारत की रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस उड़ान परीक्षण में शामिल सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के प्रयासों की सराहना की.
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Feb 3, 2026, 03:04 PM
जेपी पब्लिक स्कूल ने ग्रेटर नोएडा में विज्ञान और कला प्रदर्शनी का आयोजन किया

जेपी पब्लिक स्कूल ने ग्रेटर नोएडा में विज्ञान और कला प्रदर्शनी का आयोजन किया

ग्रेटर नोेएडा। जेपी पब्लिक स्कूल में मंगलवार को विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर छिपी रचनात्मकता को बाहर लाना और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना रहा। छात्रों ने विभिन्न विषयों पर अपने मॉडल और कलाकृतियां प्रदर्शित की। विज्ञान विभाग के छात्रों ने जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और रोबोटिक्स पर कार्यशील मॉडल पेश किए। विशेष रूप से स्मार्ट सिटी और प्रदूषण नियंत्रण के मॉडल्स ने सबका ध्यान खींचा। कला और शिल्प हस्तशिल्प अनुभाग में छात्रों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स, मिट्टी के बर्तन और वेस्ट टू बेस्ट (बेकार सामान से बनी उपयोगी वस्तुएं) की प्रदर्शनी लगाई गई। इस मौके पर डॉक्टर अर्चना शिरोमणि, मनीषा व प्रधानाचार्या मीता भंडूला आदि मौजूद रही। ब्यूरोऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
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Feb 3, 2026, 02:45 PM
भारत ने उन्नत मिसाइल प्रणोदन प्रणाली, ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (एस. एफ. डी. आर.) का सफल परीक्षण किया

भारत ने उन्नत मिसाइल प्रणोदन प्रणाली, ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (एस. एफ. डी. आर.) का सफल परीक्षण किया

SFDR Missile Tech Demonstration:भारत की 'रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन' (DRDO) ने टेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धता हासिल की है. बता दें कि मंगलवार 3 फरवरी 2026 को DRDO ने ओडिशा के चांदिपुर में स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से सॉलिड फ्यूएल डक्टेड रैमजेट (SFDR) टेक्निक का सफल परीक्षण किया. बता दें कि SDRF एक एडवांस मिसाइल प्रॉपल्शन सिस्टम है, जो उड़ान के दौरान हवा के इंटेक को कंट्रोल करके धमाके को एडजस्ट करती है. यह तकनीक लंबी दूरी की एयर टू एयर मिसाइलों के डेवलेपमेंट को संभव बनाती है, जिससे भारत को दुश्मनों पर स्ट्रैटजिक बढ़त मिलती है. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक DRDO के इस सफल परीक्षण ने भारत को उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल कर दिया है, जिनके पास SDRF टेक्नोलॉजी है. परीक्षण के दौरान सभी सिस्टम ने ठीक से काम किया, जिनमें नोजल लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर शामिल हैं. ये सिस्टम पहले ग्राउंड बूस्टर मोटर की ओर से ऑपरेट किए गए थे और फिर उन्होंने उम्मीद के मुताबिक काम किया. रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के तट पर चांदीपुर में स्थित ITR के ट्रैकिंग टूल्स ने उड़ान के आंकड़ों को रिकॉर्ड किया, जिससे सिस्टम के प्रदर्शन की पुष्टि हुई. बता दें कि DRDO की कई लैब के सीनियर साइंटिस्ट की ओर से इस लॉन्चिंग की मॉनिटरिंग की गई, जिनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट लैबोरेटरी, बिल्डिंग रिसर्च सेंटर और ITR शामिल हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SFDR तकनीक के सफल प्रदर्शन के लिए DRDO और इंडस्ट्री की सराहना की.
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Feb 3, 2026, 02:39 PM
गुजरात का अंबाजी क्षेत्र संभावित बड़े खनन केंद्र के रूप में सामने आया

गुजरात का अंबाजी क्षेत्र संभावित बड़े खनन केंद्र के रूप में सामने आया

उदयपुर:अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में छिपे दुर्लभ खनिज भंडार अब देश के सामने आने वाले हैं। उदयपुर, सिरोही और आबूरोड से जुड़े गुजरात के अंबाजी क्षेत्र में 100 मिलियन टन से अधिक खनिज भंडार होने का अनुमान लगाया गया है। प्रारंभिक आकलन में यहां कॉपर, गोल्ड, लेड, जिंक और सिल्वर जैसे बहुमूल्य खनिजों की मौजूदगी सामने आई है, जिससे यह इलाका देश के संभावित बड़े माइनिंग क्षेत्रों में शामिल हो गया है।जीएमडीसी और एमएलएसयू के बीच हुआ एमओयूखनिज संभावनाओं के वैज्ञानिक मूल्यांकन और खोज को आगे बढ़ाने के लिए गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जीएमडीसी) ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर केभू-विज्ञान विभाग के साथ रिसर्चऔर कंसलटेंसी को लेकर समझौता किया है। दो वर्षों की अवधि वाले इस एमओयू के तहत अंबाजी पर्वत क्षेत्र में खनिज खोज और माइनिंग से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।1840 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी चरणबद्ध पड़तालखनिजों की खोज शुरू। सांकेतिक तस्वीर।परियोजना के अंतर्गत कुल 1840 हेक्टेयर क्षेत्र मेंखनिजों की खोजऔर उनके फैलाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 140 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है। जीएमडीसी द्वारा गठित विशेष सोसायटी के माध्यम से इस काम की जिम्मेदारी उदयपुर विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग को सौंपी गई है, जहां विशेषज्ञ टीम विस्तृत सर्वे और विश्लेषण करेगी।विशेषज्ञों की टीम कर रही नेतृत्वइस शोध परियोजना का नेतृत्व भू-विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हर्ष भू और प्रोफेसर रितेश पुरोहित कर रहे हैं। इनके साथ डॉ. हरीश कपासिया, डॉ. निरंजन मोहंती, डॉ. टी.के. बिनवाल और प्रो. के.के. शर्मा की टीम जुड़ी हुई है। शोध कार्य के लिए विभाग की आधुनिक प्रयोगशालाओं का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही सात विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देकर उन्हें सीधे इस परियोजना से जोड़ा गया है, जिससे अकादमिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।पर्यावरण और आस्था की सुरक्षा पर जोरखनन गतिविधियों को लेकर पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रो. रितेश पुरोहित ने बताया कि अंबाजी क्षेत्र पहाड़ों, वन क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों से घिरा हुआ है। इसे ध्यान में रखते हुए अधिकांश खनन कार्य अंडरग्राउंड पद्धति से किए जाएंगे, ताकि पहाड़, जंगल और आस्था से जुड़े स्थल सुरक्षित रहें। यह परियोजना न केवल खनिज संसाधनों की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास, रोजगार और शोध के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद है।
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Feb 3, 2026, 01:59 PM
डी. आर. डी. ओ. ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए एस. एफ. डी. आर. प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया

डी. आर. डी. ओ. ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए एस. एफ. डी. आर. प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया

डीआरडीओ ने आज ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से SFDR तकनीक का सफल प्रदर्शन किया।सुबह लगभग 10:45 बजे किया गया यह परीक्षण लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में भारत की क्षमता को बढ़ावा देगा।DRDOके अनुसार, यह टेस्ट ग्राउंड बूस्टर से शुरू होकर वांछित माच संख्या तक पहुंचने के बाद SFDR मोटर ने सुचारू रूप से काम किया। इससे भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास यह प्रोपल्शन सिस्टम उपलब्ध है। परीक्षण की सफलता ने डिफेंस सेक्टर में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित किया है। टेस्ट के दौरान नोजल-लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर जैसे सभी सबसिस्टम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किए। ITR, चांदीपुर के ट्रैकिंग इंस्ट्रूमेंट्स ने बे ऑफ बंगाल के किनारे फ्लाइट डेटा को कैप्चर किया, जिससे परफॉर्मेंस की पुष्टि हुई। यह टेक्नोलॉजी वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करके सस्टेनेबल सुपरसोनिक स्पीड बनाए रखती है, जिससे मिसाइल हल्की और लंबी रेंज वाली हो जाती है। पारंपरिक रॉकेट मोटर्स की तुलना में SFDR ईंधन दक्षता बढ़ाती है और मिसाइल को अधिक दूरी तक उच्च गति पर रखती है। DRDL, HEMRL, RCI और ITR की टीमों ने इसकी निगरानी की। रक्षा क्षेत्र में कितनी बड़ी सफलता इस सफलता से भारत रूस, अमेरिका, चीन और फ्रांस जैसे देशों की एलीट लीग में शामिल हो गया है। SFDR लंबी दूरी की BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) एयर-टू-एयर मिसाइलों जैसे Astra Mk-3 (गांडीव) के विकास के लिए अहम है, जिसकी रेंज 300-350 किलोमीटर तक हो सकती है और यह माच 4+ की स्पीड से उड़ सकता है। इससे IAF को दुश्मन के AWACS, टैंकर और लड़ाकू विमानों को सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने में रणनीतिक बढ़त मिलेगी। रामजेट इंजन की जटिलता (सुपरसोनिक स्पीड पर स्थिर दहन) को मैनेज करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन DRDO ने इसे सफलतापूर्वक हासिल किया। यह Astra सीरीज (Mk-1: 80-110 km, Mk-2: 140-160 km) को आगे ले जाएगा। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती पिछले वर्षों में DRDO ने SFDR के कई टेस्ट किए हैं (2018, 2021, 2023 आदि), लेकिन यह 2026 का प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण रहा। रूस की मदद से शुरू हुई यह तकनीक अब स्वदेशी हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री को बधाई दी। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को मजबूत करेगी, जिससे लंबी दूरी की मिसाइलें जल्दी तैनात हो सकेंगी। भविष्य में यह IAF की हवाई श्रेष्ठता बढ़ाएगा और निर्यात संभावनाएं खोलेगा। कुल मिलाकर, यह परीक्षण भारतीय रक्षा अनुसंधान की परिपक्वता दर्शाता है।
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Amar Ujala
Feb 3, 2026, 01:38 PM
जी. वी. एम. गर्ल्स कॉलेज ने बालिकाओं के लिए प्रीमियर ए. आई. मेकाथॉन का आयोजन किया

जी. वी. एम. गर्ल्स कॉलेज ने बालिकाओं के लिए प्रीमियर ए. आई. मेकाथॉन का आयोजन किया

सोनीपत। जीवीएम कन्या महाविद्यालय में मंगलवार को प्रीमियर एआई मेकाथॉन का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में छात्राओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित नवाचार परियोजनाओं के माध्यम से अपनी तकनीकी दक्षता, तार्किक सोच और रचनात्मक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंकार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में एआई के प्रति रुचि विकसित करना तथा वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना रहा। मेकाथॉन में कुल छह टीमों की 27 छात्राओं ने भाग लिया।विज्ञापनविज्ञापनप्रतिभागी टीमों ने प्रस्तुत परियोजनाओं का मूल्यांकन प्रेजेंटेशन, कंटेंट, तकनीकी दक्षता एवं नवाचार आधारित आइडिया के आधार पर किया गया। मूल्यांकन उपरांत कॉलेज की दो सर्वश्रेष्ठ एआई परियोजनाओं का चयन किया गया।प्रतियोगिता में टीम-1 जीवीएम टेक टीम में शामिल अक्षिता, निशा, हिना व हेना ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। टीम-2 अल्फा ग्रुप में शामिल प्रिया, तिलाक्षा, अंशु व कशिश ने द्वितीय स्थान हासिल किया। दोनों टीमों को पदक एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।कॉलेज के प्रधान डॉ. ओपी परूथी व प्राचार्य डॉ. मंजुला स्पाह ने सभी प्रतिभागी छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्राचार्य डॉ. मंजुला स्पाह ने कहा कि इस प्रकार की तकनीकी गतिविधियां छात्राओं की रचनात्मकता, तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास को सशक्त बनाती हैं।कंप्यूटर साइंस विभाग के एचओडी राकेश जुनेजा ने भी छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में भागीदारी छात्राओं को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करती है।कार्यक्रम के दौरान रिसोर्स पर्सन के रूप में सोनू गुप्ता और संजय यादव ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया। इस दौरान मेनू सैनी, प्रीति, अंशु, डॉ. मोनिका विश्नोई, रितु, पारुल मौजूद रही।
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Feb 3, 2026, 01:10 PM
डॉ. शाम कुमार शर्मा को पेयजल और स्वच्छता क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया

डॉ. शाम कुमार शर्मा को पेयजल और स्वच्छता क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया

पेयजल और स्वच्छता क्षेत्र में नवाचारों के मूल्यांकन व मार्गदर्शन की मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारीऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसंवाद न्यूज एजेंसीऊना। भारत के पेयजल एवं स्वच्छता क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. शाम कुमार शर्मा (वैज्ञानिक–एफ) को राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का सदस्य सचिव नामित किया गया है। यह समिति देशभर में पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़े नवाचारी प्रयासों के मूल्यांकन, तकनीकी परीक्षण और मार्गदर्शन का कार्य करेगी। डॉ. शाम कुमार शर्मा की यह नियुक्ति उनके व्यापक वैज्ञानिक अनुभव, तकनीकी दक्षता और जल एवं स्वच्छता क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान को ध्यान में रखते हुए की गई है। सदस्य सचिव के रूप में वे समिति की बैठकों के संचालन, विभिन्न नवाचारों की समीक्षा, तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने तथा नीति-स्तर पर प्रभावी सुझाव देने की अहम भूमिका निभाएंगे।देश में स्वच्छ पेयजल उपलब्धता, जल संरक्षण, अपशिष्ट जल प्रबंधन और स्वच्छता अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार नए प्रयोग और तकनीकी समाधान सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य इन नवाचारों की गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थायित्व का आकलन कर उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने हेतु दिशा-निर्देश तैयार करना है। डॉ. शाम कुमार शर्मा की विशेषज्ञता से समिति के कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे देश में सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता सेवाओं के विस्तार को बल मिलेगा। उनकी नियुक्ति को वैज्ञानिक समुदाय, नीति-निर्माताओं और संबंधित विभागों द्वारा सराहना के साथ देखा जा रहा है।विज्ञापनविज्ञापन
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Feb 3, 2026, 01:07 PM
भारत ने उच्च गति वाले विमान प्रणोदन के लिए उन्नत एस. एफ. डी. आर. प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण किया

भारत ने उच्च गति वाले विमान प्रणोदन के लिए उन्नत एस. एफ. डी. आर. प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण किया

विस्तारFollow Usरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 3 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 10:45 बजे ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रामजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंयह तकनीक लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विकास में अहम भूमिका निभाती है। इस तकनीक से संभावित विरोधियों के मुकाबले रणनीतिक बढ़त मिलती है। परीक्षण के दौरान सभी प्रमुख उप-प्रणालियों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया। इनमें नोजल-लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रामजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर शामिल थे।विज्ञापनविज्ञापनये भी पढ़ें:Supreme Court: सोनम वांगचुक को क्यों किया गिरफ्तार? केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में चीन-PAK का जिक्र कर कही ये बातचांदीपुर रेंज में किया गया सफल परीक्षणसिस्टम को पहले ग्राउंड बूस्टर मोटर की मदद से निर्धारित मैक संख्या तक पहुंचाया गया, जिसके बाद एसएफडीआर प्रणाली ने सफलतापूर्वक काम किया। पूरे परीक्षण की निगरानी और पुष्टि आईटीआर, चांदीपुर की ओर से बंगाल की खाड़ी के तट पर तैनात कई ट्रैकिंग उपकरणों से प्राप्त उड़ान आंकड़ों के जरिए की गई।प्रक्षेपण के दौरान डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं- जिनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी, रिसर्च सेंटर इमारत और आईटीआर शामिल हैं- के वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे।ये भी पढ़ें:NASA Mission Postponed: हाइड्रोजन लीक या कुछ और? किस वजह से नासा ने टाला आर्टेमिस-II चांद मिशन, जानें सबकुछरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाईरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एसएफडीआर तकनीक के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ और उद्योग जगत को बधाई दी। वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने इस सफल उड़ान परीक्षण में शामिल सभी टीमों को शुभकामनाएं दीं।एसएफडीआर (Solid Fuel Ducted Ramjet) तकनीक की खासियतेंयह तकनीक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में सक्षम बनाती हैपारंपरिक प्रणालियों की तुलना में उड़ान के दौरान बेहतर थ्रस्ट प्रदान करती हैनोजल-लेस बूस्टर और डक्टेड रामजेट मोटर का संयोजन उच्च गति पर प्रभावी प्रदर्शन सुनिश्चित करता हैफ्यूल फ्लो कंट्रोलर के जरिए ईंधन आपूर्ति को नियंत्रित किया जाता है, जिससे दक्षता बढ़ती हैआधुनिक हवाई युद्ध परिदृश्यों में सामरिक बढ़त देने में मददगारअन्य वीडियोविज्ञापनविज्ञापनरहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें AndroidHindi News apps, iOSHindi News appsऔरAmarujala Hindi News appsअपने मोबाइल पे|Get allIndia Newsin Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and morenews in Hindi.
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Feb 3, 2026, 11:44 AM
दीनबंधु छोटू राम विश्वविद्यालय और एन. आई. टी. दिल्ली ने अनुसंधान और नवाचार पर सहयोग किया

दीनबंधु छोटू राम विश्वविद्यालय और एन. आई. टी. दिल्ली ने अनुसंधान और नवाचार पर सहयोग किया

सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल और दिल्ली राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के लिए एमओयू हुआ है। इस पर कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह और एनआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. अजय शर्मा के बीच बैठक में सहमति बनी।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंकुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित साझेदारी के तहत उन्नत रोबोटिक्स, वीएलएसआई डिजाइन, औद्योगिक स्वचालन, डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।विज्ञापनविज्ञापनकुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि इस साझेदारी के अंतर्गत संयुक्त शोध प्रयोगशालाओं की स्थापना, छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम, नवाचार केंद्र और स्टार्टअप इनक्यूबेशन पर मिलकर कार्य किया जाएगा। इन प्रयासों का उद्देश्य शोध एवं नवाचार को व्यावसायिक और बाजार-उपयुक्त समाधानों में परिवर्तित करना है।कुलपति ने कहा कि डीसीआरयूएसटी की बहुविषयक शैक्षणिक क्षमताओं और एनआईटी दिल्ली की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का यह संगम एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा। एनआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. अजय शर्मा ने कहा कि यह सहयोग अकादमिक नवाचार को वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग और स्टार्टअप से जोड़ने का मजबूत मंच बनेगा।कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने बताया कि एमओयू को अंतिम रूप देने के लिए दोनों संस्थानों की ओर से समर्पित टीमें गठित की गई हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र में नवाचार प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स की शुरुआत किए जाने की योजना है।
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Feb 3, 2026, 11:20 AM
बिहार सरकार ने शिक्षा और समाज कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हुए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया

बिहार सरकार ने शिक्षा और समाज कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हुए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया

नीतीश कुमार की सरकार ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया. इस बार के बजट को ‘ज्ञान, विज्ञान और अरमान’ पर केंद्रित बताया गया है. इसमें ‘ईमान’ और ‘सम्मान’ को भी जोड़ा गया है. इस बार का बजट पिछले साल (3.17 लाख करोड़) के मुकाबले काफी बड़ा है. सरकार को उम्मीद है कि 2026-27 में वह अपने टैक्स के जरिए करीब 65,800 करोड़ रुपये जुटा लेगी. गरीबों और समाज के पिछड़ों के लिए चल रही योजनाओं (सोशल वेलफेयर) पर 7,724 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट ‘न्याय के साथ विकास’ के नारे को पूरा करने और बिहार को विकसित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आसान शब्दों में कहें तो, सरकार ने शिक्षा, तकनीक और आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस बार अपना खजाना खोला है. #विकसित_बिहारकी गति को तेज रफ्तार देते हुए करीब ₹3.5 लाख करोड़ तक पहुँचा राज्य का#बजट। NDA सरकार ने बिहार को दी नई उड़ान,विकास को मिल रही नई पहचान।#ViksitBiharBudget2026pic.twitter.com/rmpbs0jfTU — Samrat Choudhary (@samrat4bjp)February 3, 2026 वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने बजट पेश करते हुए यह बजट ईमान, ज्ञान, विज्ञान, अरमान और सम्मान पर विशेष ध्यान देते हुए तैयार किया गया है. वित्त मंत्री ने महज 11 मिनट में अपना बजट भाषण समाप्त कर लिया. विजेंद्र यादव ने बहुचर्चित मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का भी जिक्र किया, जिसे पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों से पहले लागू किया गया था. उन्होंने कहा कि 1.56 करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये की राशि ट्रांसफर की गई, जिन्होंने इस राशि का इस्तेमाल शुरू करने में किया होगा, उन्हें जल्द ही अतिरिक्त दो लाख रुपये दिए जाएंगे. बजट में राज्य की वित्तीय स्थिति को भी सुदृढ़ बताया गया है. इसमें कहा गया है कि 2024-25 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का मात्र 0.04 प्रतिशत रहा, हालांकि राजकोषीय घाटा 4.16 प्रतिशत रहा, जो निर्धारित 3.0 प्रतिशत की सीमा से अधिक है.
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Feb 3, 2026, 10:19 AM
हिमाचल प्रदेश को शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में 500 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र मिलेगा

हिमाचल प्रदेश को शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में 500 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र मिलेगा

Kangra News:हिमाचल प्रदेश की शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से 500 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा। शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करने के बाद यह जानकारी दी।पठानिया ने बताया कि यह सोलर प्लांट परगोड़ पंचायत के गुब्बर गांव में लगाया जायेगा और प्रतिवर्ष लगभग आठ लाख यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा। इसे राज्य सरकार 3.45 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार हरित ऊर्जा उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में प्रदेश में कई सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले और ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके।इस परियोजना से क्षेत्र के विकास को मिलेगी गतिविधायक ने विश्वास जताया कि इस परियोजना से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयास और मजबूत होंगे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि तथा स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
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Feb 3, 2026, 10:00 AM
धीमी हृदय दर के छिपे हुए खतरों को उजागर करनाः ब्रैडीकार्डिया को समझना

धीमी हृदय दर के छिपे हुए खतरों को उजागर करनाः ब्रैडीकार्डिया को समझना

आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग शरीर को महसूस होने वाली छोटी-छोटी आहटों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं आपके दिल की धीमी पड़ती रफ्तार कई बार किसी बड़े खतरे का इशारा हो सकती है? जी हां, यदि आपका दिल एक मिनट में 60 बार से कम धड़क रहा है, तो यह 'ब्रैडीकार्डिया' का संकेत हो सकता है। सुनने में यह शायद सामान्य लगे, लेकिन जब दिल की लय सुस्त पड़ती है, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचने की रफ्तार भी धीमी हो जाती है। यह सुस्ती केवल थकान नहीं, बल्कि आपके जीवन की ऊर्जा पर लगने वाला एक ब्रेक भी हो सकती है। मणिपाल हॉस्पिटल, (ईएम बाइपास, कोलकाता) के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दिलीप कुमार से जानने की कोशिश करते हैं आखिर क्या है ब्रैडीकार्डिया की समस्या, इसके लक्षण और बचाव के उपाय। OTICAOTICA 12 Channel Thermal ECG Graph Paper Roll (Size: 210 mm x 20 mtr) | 1200G Thermal ECG Graph 3 Paper Roll | Suitable for Contec CMS 1200G/Bionet 12 Channel ECG Machine/Mortara ELI 230 VMSVMS Ultrason Physiotherapy Ultrasound Gel 250 ml Pack of 4 (Blue) OTICAOTICA ECG Adult Chest Suction Electrode Bulb for ECG Machine multicolor ecg electrode bulb MEDILMAMEDILMA® 3 Channel ECG Machine ECG300GA with Interpretation, ECG Storage up to 15 Cases (100 Cases with SD Card), 1.5 Hour Battery Backup Recording and Analyzing Electrocardiogram (ECG) Signals. KNYAKnya 6sense Stethoscope | Dual-Sided Chest Piece for Adult & Pediatric Use | Lightweight Stainless Steel Build | Soft-Seal Ear Tips | Made in India | Comes in a Premium Gift Box | Navy Blue MEDILMAMEDILMA® 12 Channel ECG1200G 12-Lead Electrocardiograph (ECG), Multi-Language, Case Database Backup Recording ECG Signals. Frontier XFrontier X2 Smart ECG Monitor Chest Strap, Wearable Heart Rate Monitor with Strain, VO2 Max, Real Time Vibration Alerts and 20+ Fitness Activities with Continuous ECG Monitoring ब्रैडीकार्डिया, वह स्थिति है जब आराम के समय हृदय की गति सामान्य से धीमी, यानी 60 बीट्स प्रति मिनट (bpm) से कम हो जाती है। एथलीटों के लिए यह सामान्य हो सकता है, लेकिन दूसरों में यह चक्कर, थकान, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ का कारण बन सकता है, जिसका पता लगाने के लिए ईसीजी करवाने की जरूरत पड़ती है। आसान शब्दों में समझें तो दिल की धड़कन को एक इलेक्ट्रिकल सिस्टम नियंत्रित करता है। जब इस सिस्टम में गड़बड़ी पैदा हो जाती है, तो दिल सामान्य से धीमी गति से धड़कने लगता है, जिसे ब्रैडीकार्डिया कहते हैं। बहुत अधिक ट्रेनिंग करने वाले खिलाड़ियों में दिल की धड़कन स्वाभाविक रूप से धीमी हो सकती है, जो सामान्य होती है, लेकिन बाकी लोगों में यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकती है। ब्रैडीकार्डिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन इसका खतरा खासतौर पर इन लोगों में ज्यादा बना रहता है- -बुज़ुर्ग लोग -हृदय रोगी -डायबिटीज या किडनी रोगी -कुछ खास दवाओं का सेवन करने वाले लोग हर कारण को रोका नहीं जा सकता, लेकिन दिल को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली अपनाकर जोखिम कम जरूर किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव को नियंत्रित करके और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाने से दिल की सेहत को बेहतर बनाकर रखा जा सकता है। अगर दिल की धड़कन बहुत धीमी है, तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं- लगातार थकान और कमजोरी-आराम के बाद भी अत्यधिक थकान महसूस होना। चक्कर आना या हल्कापन महसूस होना-दिमाग तक पर्याप्त खून न पहुंचने के कारण चक्कर आ सकते हैं। बेहोशी या बेहोश होने जैसा महसूस होना-अचानक धड़कन बहुत कम हो जाने पर बेहोशी महसूस होना। चलने-फिरने में सांस फूलना-हल्की गतिविधि में भी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। सीने में दर्द या बेचैनी-सीने में दर्द का होना दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुचने का संकेत हो सकता है। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण हाल में महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर पहचान और सही इलाज दिल की सेहत को अच्छा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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Feb 3, 2026, 09:52 AM
ओपनएआई ने कोडेक्स ऐप लॉन्च कियाः डेवलपर्स के लिए एआई-संचालित कोडिंग में क्रांति

ओपनएआई ने कोडेक्स ऐप लॉन्च कियाः डेवलपर्स के लिए एआई-संचालित कोडिंग में क्रांति

OpenAI Codex App:AI कोडिंग टूल्स की दुनिया में बड़ा अपडेट आया है. OpenAI ने macOS यूजर्स के लिए Codex App लॉन्च कर दिया है, जो खास तौर पर डेवलपर्स और कोडिंग टीमों के लिए बनाया गया है. यह एक ऐसा डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म है जहां कई AI coding agents एक साथ अलग-अलग टास्क पर काम कर सकते हैं. कंपनी का कहना है कि इससे डेवलपमेंट का समय घटेगा और वर्कफ्लो ज्यादा अच्छे से मैनेज हो सकेगा. यह ऐप macOS-native इंटरफेस के साथ आता है और सीधे कोड रिपॉजिटरी के साथ काम कर सकता है. OpenAI का Codex App एक dedicated macOS डेस्कटॉप एप्लिकेशन है, जिसे agent-driven coding के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें AI agents अलग-अलग टास्क को समानांतर तरीके से संभाल सकते हैं. पहले ज्यादातर AI coding tools एक समय में एक ही काम करते थे या यूजर को कई टैब और टूल के बीच स्विच करना पड़ता था. Codex App इस परेशानी को कम करता है और एक ही जगह पर पूरा कोडिंग माहौल देता है. इससे डेवलपर्स को कम मैन्युअल कोऑर्डिनेशन करना पड़ता है और काम की स्पीड बढ़ती है. Codex एक क्लाउड बेस्ड सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एजेंट है, जिसे OpenAI ने 2025 में पेश किया था. यह coding के लिए फाइन-ट्यून्ड एलएलएम पर आधारित है और नेचुरल लैग्वेज प्रॉम्प्ट को सीधे कोड में बदल सकता है. यह पुल रिक्वेस्ट तैयार करने, बग्स ठीक करने, टेस्ट जनरेट करने और बड़े कोडबेस को समझने में मदद करता है. यही मॉडल GitHub Copilot और Codex CLI जैसे टूल्स को भी पावर देता है. यह Python, JavaScript, Go समेत कई भाषाओं में काम करने की क्षमता रखता है, जिससे इसका उपयोग दायरा काफी बड़ा हो जाता है. कोडेक्स ऐप में थ्रेड्स का सपोर्ट दिया गया है, जहां हर एआई एजेंट अलग स्ट्रीम में किसी खास टास्क पर काम करता है. डेवलपर अलग-अलग थ्रेड खोलकर नए फीचर, डिबगिंग या कोड रिव्यू जैसे काम अलग रख सकते हैं. इससे कॉन्टेक्स्ट मिक्स होने का खतरा कम होता है और रिपॉजिटरी में टकराव घटता है. ऐप के अंदर डिफ रिव्यू और इटरेशन का विकल्प भी मिलता है, जिससे बदलाव वहीं देखे और सुधारे जा सकते हैं. स्किल्स फीचर री-यूजेबल वर्कफ्लो देता है, जिनसे टीम बार-बार होने वाले काम को एक जैसे तरीके से ऑटोमेट कर सकती है. ओपनएआई कोडेक्स ऐप अभी मैकओएस के लिए उपलब्ध है और एपल सिलिकॉन सिस्टम को सपोर्ट करता है. इसे कम्पैटिबल मैक डिवाइस पर डाउनलोड और इंस्टॉल किया जा सकता है. यूजर चैटजीपीटी अकाउंट या ओपनएआई एपीआई की से साइन इन करके एजेंट वर्कफ्लो और प्रोजेक्ट थ्रेड्स एक्सेस कर सकते हैं. कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में विंडोज और लिनक्स प्लेटफॉर्म के लिए भी यह ऐप जारी किया जाएगा. इससे क्रॉस-प्लेटफॉर्म डेवलपर टीमों को भी इसका फायदा मिल सकेगा. ये भी पढ़ें:संविधान का पालन नहीं तो भारत छोड़ो WhatsApp और Meta को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक- डेटा साझा की अनुमति नहीं
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Feb 3, 2026, 09:15 AM
आई. आई. टी. कानपुर का ए. आई. एम. एल. लघु पाठ्यक्रमः 45 दिनों में ए. आई. कौशल ऑनलाइन सीखें

आई. आई. टी. कानपुर का ए. आई. एम. एल. लघु पाठ्यक्रमः 45 दिनों में ए. आई. कौशल ऑनलाइन सीखें

IIT Kanpur AI Course: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स कम समय में सीखना चाहते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर से 45 दिन में AI स्किल्स सीखें जा सकते हैं. इसके लिए IIT कानपुर ने एप्लाइड डेटा साइंस और मशीन इंटेलिजेंस (AIML)शॉर्ट कोर्स शुरू किया है. ये काेर्स पूरी तरह ऑनलाइन है. यानी घर बैठे 45 दिन में AI स्किल्स सीखें जा सकते हैं. ये कोर्स1 जून से 15 जुलाई के बीच शुरू होगा. आइए, जानते हैं कि IIT कानपुर की तरफ से संचालित AIML शार्ट कोर्स में क्या है? जानते हैं कि आवेदन कैसे किया जा सकता है? साथ ही जानेंगे कि फीस कितनी है? IIT कानपुर का AI शार्ट कोर्स में मशीन लर्निंग के मूल सिद्धांत, डीप लर्निंग एल्गोरिदम, लैंग्वेज मॉडल, GenAI एप्लिकेशन के बारे में बताया जाता है. कोर्स को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है. इसमें रिकॉर्डेड और लाइव सेशन शामिल हैं, जिनके माध्यम से थ्योरी और प्रैक्टिकल कराया जाता है. कुल 50 से अधिक घंटों की लर्निंग औरऔर 10 से अधिक हैंड्स-ऑन प्रोजेक्ट शामिल हैं. कुल जमा ये कोर्स AIML में करियर बनाने के इच्छुक स्टूडेंट्स, प्रोफेसर, रिसचर्स, प्रोफेशनल्स के लिए है, जिसके माध्यम से वह AI संचालित समाधानों की खोज और रिसर्च पर फोकस कर सकते हैं. इस कोर्स के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है. इच्छुक कैंडिडेट्स आधिकारिक लिंकiitk.ac.in/oa/events/2025-26/next-generation–AIपर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई. अर्ली बर्ड कैटेगरी के लिए आवेदन 28 फरवरी 2026 तक किए जा सकते है. वहीं नॉर्मल रजिस्ट्रेशन 10 मई 2026 तक तक किए जा सकते हैं. फीस की बात करें तो IIT कानपुर के पूर्व स्टूडेंट्स के लिए 18 से 24 हजार रुपये की फीस निर्धारित है. वहीं नॉन IIT कानपुर स्टूडेंट्स के लिए 18 से 28 हजार रुपये की फीस निर्धारित है. इसी तरह IIT कानपुर वर्किंग प्रोफेसर या अकेडमिक के लिए 31 हजार रुपये तक की फीस है. तो वहीं नाॅन IIT कानपुर वर्किंग प्रोफेसर या अकेडमिक के लिए 36 हजार रुपये तक की फीस शामिल है. इसमें जीएसटी शामिल है. यानी फीस के साथ जीएसटी देय है. इस कोर्स से जुड़ी अधिक जानकारीiitk.ac.in/oa/events/2025-26/next-generation-AIलिंक पर क्लिक कर प्राप्त की जा सकती है.
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Feb 3, 2026, 08:44 AM
ए. आई. में अंध विश्वासः मनुष्य बिना सवाल किए या जाँच किए सलाह स्वीकार कर रहे हैं

ए. आई. में अंध विश्वासः मनुष्य बिना सवाल किए या जाँच किए सलाह स्वीकार कर रहे हैं

टेक्नोलॉजी एक तरफ जहां लोगों की लाइफ आसान बना रही है, वहीं दुसरी तरफ अब एक नई चिंता भी सामने आ रही है. क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आज के समय में लोगों का ऐसा अटूट भरोसा हो गया है कि अब वह चिंता का विषय बनता जा रहा है. ऐसे में अगर आप भी अपने हर एक सवाल के लिए AI चैटबॉट पर निर्भर हो गए हैं, तो थोड़ा संभल जाइए. एंथ्रोपिक (Anthropic) की एक नई स्टडी ने इसको लेकर पूरी दुनिया को आगाह किया है. उनका कहना है कि आज के समय में लोग एआई की सलाह को बिना किसी सवाल या जांच के सच मान रहे हैं. ऐसे में AI अगर गलत जानकारी भी दे रहा है, तो इंसान उसे पकड़ने के बजाय उसी रास्ते पर चल दे रहा है. यह लोगों के लिए बेहद डरावना होता जा रहा है. मशीन के आगे फेल हुआ इंसानी दिमाग?एंथ्रोपिक के रिसर्चर्स ने यह जानने के लिए एक रिसर्च की कि इंसान और AI के बीच का रिश्ता कैसा है. स्टडी में पाया गया कि जब भी लोगों को कोई कठिन काम दिया गया या कोई सलाह मांगी गई, तो उन्होंने एआई के जवाब को ही 'अंतिम सत्य' मान लिया. इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि एक्सपर्ट्स ने भी कई बार AI के गलत जवाब की कोई काट नहीं दी. स्टडी के अनुसार, एआई चैटबॉट्स की भाषा इतनी आत्मविश्वास से भरी और लुभावनी होती है कि यूजर को लगता ही नहीं कि यह गलत हो सकता है. इसे टेक्निकल भाषा में 'Automated Bias' कहा जा रहा है. इसके अनुसार इंसान धीरे-धीरे खुद सोचने के बजाय मशीन की बात को सही मानने लगता है. ऐसा खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखा गया जो पहले से तनाव, अकेलेपन या किसी निजी परेशानी से गुजर रहे थे. यह भी पढ़ें:-बिजली बिल से चाहिए 70% छुटकारा? वैज्ञानिकों ने रेत से बना डाली ऐसी बैटरी, जो कोयले.. ऐसा क्यों हो रहा है?रिसर्चर्स का मानना है कि इसके पीछे मुख्य वजह एआई का बातूनी अंदाज है. एआई केवल डेटा नहीं देता, बल्कि वह बड़े प्यार और तर्क के साथ अपनी बात रखता है. ऐसे में लोग इसकी गलती पकड़ नहीं पाते हैं. कई बार जब AI लगातार सही स्पेलिंग या छोटे-मोटे गणित हल करता है, तो इंसान का दिमाग उस पर भरोसा करना शुरू कर देता है. लोग अब गूगल सर्च करके चार अलग-अलग वेबसाइट पढ़ने के बजाय एआई से एक सारा जवाब एक ही जगह लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इससे हमारी सोचने और परखने की शक्ति कम हो रही है. क्या है इसके खतरे?एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में इसको लेकर चेतावनी दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि AI पर यह अंधा विश्वास लोगों आगे चल कर बहुत भारी पड़ने वाला है. अगर एआई ने किसी गंभीर बीमारी या कानूनी मामले में गलत सलाह दे दी, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं. AI को इस तरह से प्रोग्राम किया जा सकता है कि वह धीरे-धीरे आपकी सोच बदल दे और आपको पता भी न चले. यह स्थिती आपके लिए बहुत डेंजर हो सकती है. AI के कहने पर चलने से आपमें जिम्मेदारी की कमी हो जाएगी. अप अपनी गलती नहीं देख पाएंगे. सावधानी ही बचाव हैएक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई एक शानदार 'असिस्टेंट' हो सकता है. लेकिन इसको आप अपना 'बॉस' नहीं बनने दें. किसी भी बड़े फैसले से पहले एआई के जवाब को क्रॉस-चेक करना बहुत जरूरी है. याद रखें, एआई सिर्फ पिछला डेटा देख सकता है, उसके पास इंसानी संवेदनाएं और वर्तमान का विवेक नहीं है. इसलिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मदद के लिए करें, अपने दिमाग की जगह देने के लिए नहीं. यह भी पढ़ें:-Sam Altman को क्यों आया खुद पर रोना? नया AI ऐप लॉन्च करते ही बोले- मैं तो फालतू...
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Feb 3, 2026, 07:30 AM
Pixel 10: गूगल के फ्लैगशिप फोन की कीमत में भारी कटौती

Pixel 10: गूगल के फ्लैगशिप फोन की कीमत में भारी कटौती

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी Google के लेटेस्ट फ्लैगशिप फोन को खरीदने की सोच रहे हैं? लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने की वजह से खुद को रोक रहे थे तो अब आपके लिए गुड न्यूज है। दरअसल इस वक्त Pixel 10 पर शानदार डिस्काउंट मिल रहा है जिसे भारत में 79,999 रुपये में लॉन्च किया गया था। फोन पर ऑनलाइन 10 हजार रुपये तक का डिस्काउंट देखने को मिल रहा है।
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Feb 3, 2026, 07:12 AM
आई. आई. टी. बी. एच. यू. ने चार करोड़ रुपये की अनुसंधान परियोजनाओं के लिए आई. एस. आर. ओ. और डी. आर. डी. ओ. के साथ सहयोग किया

आई. आई. टी. बी. एच. यू. ने चार करोड़ रुपये की अनुसंधान परियोजनाओं के लिए आई. एस. आर. ओ. और डी. आर. डी. ओ. के साथ सहयोग किया

विस्तारFollow Usइसरो और डीआरडीओ के साथ मिलकर आईआईटी बीएचयू आठ मिशन और उत्पादों पर रिसर्च करेगा। इसके लिए करीब चार करोड़ रुपये के रिसर्च प्रोजेक्ट आईआईटी बीएचयू को दिए गए हैं। रिसर्च और अध्ययन के विषय स्पेसक्राफ्ट, अंतरिक्ष मिशन, आदित्य एल-1, हाईवे सुरक्षा, स्मार्ट ट्रैफिक आदि होंगे। इसके निष्कर्ष, तकनीक और रिपोर्ट को सरकार या फंडिंग एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंइसके लिए इसरो ने 1.80 करोड़ रुपये से ज्यादा के सात और डीआरडीओ ने 2.11 करोड़ के एक प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी है। इन रिसर्च प्रोजेक्ट के साथ ही कुल पांच करोड़ के कुल 26 नए प्रोजेक्ट जारी किए गए हैं। इनके लिए बड़े स्तर वैज्ञानिकों और रिसर्चरों की भर्तियां भी होंगी।विज्ञापनविज्ञापनइसे भी पढ़ें;Ghazipur News: चेयरमैन पर जानलेवा हमला, सफारी सवार हमलावरों ने वाहन में मारी टक्कर, बाल-बाल बची जानइसरो के सबसे बड़े प्रोजेक्ट के तौर पर स्पेसक्राफ्ट के एक्सपर्ट एजेंट और अंतरिक्ष मिशन के क्रू मेंबर्स को मदद करने के लिए उपकरणों पर शोध किया जाएगा। अभी तक इसरो की ओर से इसकी तकनीक को पूरा करने के लिए दो साल का समय दिया गया है। आईआईटी बीएचयू इसमें एआई आधारित तकनीक बनाएगा। यह क्रू मेंबर्स की समस्याओं का समाधान भी देगा।इसके अलावा डीआरडीओ ने सिलिकॉन से बेहतर और शुद्ध सिंगल क्रिस्टल तैयार करने के लिए करीब दो करोड़ से ज्यादा का प्रोजेक्ट दिया है। इसके लिए तीन साल की अवधि तय की गई है। ये सिंगल क्रिस्टल सिलिकॉन से ज्यादा ताप झेल सकता है। क्लाउडबिट्ज ने हाइवे सेफ्टी एनालिटिक्स और मॉडलिंग के लिए 25 लाख रुपये और पांच साल का समय दिया है।अर्बन हीट आईलैंड और सेमी कंडक्टर डिवाइस पर होंगे रिसर्चउत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटी) ने तीन साल के तीन प्रोजेक्ट्स दिए हैं। अर्बन हीट आईलैंड, नैनो वायर आधारित रूम टेंपरेचर उत्पाद, सेमी कंडक्टर डिवाइस और हाईस्पीड ऑप्टिकल कम्युनिकेशन पर रिसर्च कर तकनीक यूपी सरकार को दी जाएगी। इसके अलावा आईडीएपीटी की ओर से छह प्रोजेक्ट के लिए 45 लाख रुपये की फंडिंग की गई है। जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना मंत्रालय ने 61.56 लाख से इलेक्ट्रिक व्हीकल एप्लिकेशन और सीजी पॉवर ने कार्बन सिरेमिक रजिस्टर्स आदि बनाने के लिए एक लाख की फंडिंग की गई है।
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Feb 3, 2026, 06:39 AM
आईफोन का छिपा हुआ माइक्रोफोनः पेशेवर-गुणवत्ता वाले ऑडियो का रहस्य

आईफोन का छिपा हुआ माइक्रोफोनः पेशेवर-गुणवत्ता वाले ऑडियो का रहस्य

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।iPhone यूज करते टाइम आपने भी कभी न कभी तो उसके कैमरा मॉड्यूल के पास दिखने वाले एक छोटे-से छेद को जरूर नोटिस किया होगा। पहली नजर में देखने पर ये बहुत से लोगों को डिजाइन का हिस्सा लग सकता है, लेकिन इसका रोल उतना छोटा बिल्कुल भी नहीं है। जी हां, ये कोई डिजाइन एलिमेंट नहीं है बल्कि iPhone के सबसे खास हार्डवेयर में से एक रियर माइक्रोफोन का ही पार्ट है। दरअसल ये यही वो माइक्रोफोन है जो आपके वीडियो की ऑडियो क्वालिटी को प्रोफेशनल लेवल तक ले जाने में मदद करता है।
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Feb 3, 2026, 06:14 AM
अवेक बोर्ड ने हाइड्रोफॉइल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन'नवी'का अनावरण किया जो पानी पर'उड़ता'है

अवेक बोर्ड ने हाइड्रोफॉइल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन'नवी'का अनावरण किया जो पानी पर'उड़ता'है

डेनमार्क की कंपनी अवेक बोर्ड्स (Awake Boards) ने पानी पर चलने वाला एक अनोखा और हाई-टेक इलेक्ट्रिक वीकल पेश किया है, जिसका नाम है Awake Navi। इसे जर्मनी के एक बड़े शो (Boot Düsseldorf) में लॉन्च किया गया है। यह दिखने में एक मोटरसाइकल जैसी है, लेकिन यह सड़कों पर नहीं बल्कि पानी की लहरों के ऊपर उड़ती है। यह आम नावों या जेट-स्की से काफी अलग है क्योंकि यह पानी की लहरों के बीच से गुजरने के बजाय उसके थोड़ा ऊपर हवा में तैरता है। आइए आपको पानी के ऊपर उड़ने वाली इस अनोखी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल की खासियतों के बारे में विस्तार से बताते हैं।यह पानी पर कैसे उड़ती है?इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हाइड्रोफॉइल (Hydrofoil) तकनीक है। जैसे ही यह एक खास स्पीड पकड़ती है, इसके नीचे लगे पंख (Foil) इसे पानी की सतह से ऊपर उठा देते हैं। इससे यह पानी की लहरों के ऊपर उड़ पाती है। इससे पानी की रुकावट (Drag) कम हो जाती है। साथ ही सफर बहुत स्मूथ हो जाता है और लहरों के झटके भी महसूस नहीं होते। यह बिना किसी झटके के पानी पर हवा में चलती हुई महसूस होती है।चलाने में बिल्कुल मोटरसाइकल जैसीइसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आप इस पर मोटरसाइकल की तरह बैठकर इसे चला सकते हैं। अगर आप बाइक चलाना जानते हैं, तो इसे चलाना आपके लिए बहुत आसान होगा। इसे चलाने का तरीका भी बाइक जैसा ही है। हैंडल पर लगे थ्रॉटल (एक्सीलेटर) को घुमाकर इसकी स्पीड कम या ज्यादा की जा सकती है। इसमें पीछे जाने के लिए रिवर्स गियर और सेफ्टी के लिए किल स्विच भी दिया गया है। हैंडल के बीच में एक स्क्रीन लगी है जो रास्ता (नेविगेशन) और बैटरी की जानकारी दिखाती है।बैटरी और बैकअपAwake Navi पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है। अगर आप बड़ी बैटरी (XR4) इस्तेमाल करते हैं, तो यह एक बार फुल चार्ज होने पर 3 घंटे तक चल सकती है। वहीं, छोटी बैटरी (LR4) पर यह करीब 1.5 घंटे तक चलती है। साथ ही इंजन न होने की वजह से यह पानी पर बिना किसी शोर या कंपन के बिल्कुल शांति से चलती है।हल्का और मजबूत शरीरइसे कार्बन कंपोजिट (Carbon Composite) से बनाया गया है, जो काफी मजबूत होने के साथ-साथ वजन में भी बहुत हल्का होता है। इसमें एक छोटी स्क्रीन भी लगी है जो आपको नेविगेशन और बैटरी की जानकारी देती है। इसके पंखों को जरूरत पड़ने पर मोड़ा या छोटा किया जा सकता है, जिससे इसे कम गहरे पानी में भी ले जाया जा सकता है या आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।एक या दो सवारी, आपकी मर्जीAwake Navi पर एक या दो लोग बैठ सकते हैं। इसमें खास तरह के फ्लोट ट्यूब्स (हवा वाले ट्यूब) लगाए जा सकते हैं। ट्यूब लगाकर इस पर 2 लोग आराम से बैठ सकते हैं। इसकी अधिकतम वजन क्षमता 250 किलोग्राम है। अगर आप इसे अकेले चलाना चाहते हैं तो इन ट्यूब्स को हटा सकते हैं। ट्यूब हटाने से यह पतली और तेज बन जाती है।
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Feb 3, 2026, 05:02 AM
बी. एस. एन. एल. ने बुनियादी लाभों और दीर्घकालिक वैधता के साथ दो वार्षिक प्रीपेड योजनाओं का अनावरण किया

बी. एस. एन. एल. ने बुनियादी लाभों और दीर्घकालिक वैधता के साथ दो वार्षिक प्रीपेड योजनाओं का अनावरण किया

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।बीएसएनएल का सिम कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी अपने करोड़ों यूजर्स को दो जबरदस्त एनुअल प्रीपेड प्लान्स ऑफर कर रही है। इन प्लान्स में बेसिक बेनिफिट्स के साथ लॉन्ग-टर्म वैलिडिटी देखने को मिल रही है। दोनों ही प्लान पूरे एक साल की सर्विस देते हैं, जिससे ये उन लोगों के लिए बेस्ट ऑप्शन बन जाते हैं जो कम पैसों में डेली डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और डेली SMS की सुविधा चाहते हैं। इनमें से एक प्लान बैलेंस्ड इस्तेमाल पर फोकस करता है, जबकि दूसरा उन यूजर्स के लिए है जिन्हें ज्यादा डेली डेटा चाहिए। चलिए इन दोनों प्लान्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Feb 3, 2026, 03:48 AM
मोल्टबुकः ए. आई. द्वारा डिज़ाइन किया गया ऐप मानव संपर्क को रोकने का प्रयास करता है

मोल्टबुकः ए. आई. द्वारा डिज़ाइन किया गया ऐप मानव संपर्क को रोकने का प्रयास करता है

Who Is Peter Steinberger?:दुनिया भर के टेक सर्कल्स में इन दिनों एक नई और अजीब सी ऐप चर्चा में है, जिसका नाम है Moltbook. पहली नजर में यह किसी आम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसा लगता है, लेकिन असल में यह इंसानों के इस्तेमाल के लिए बनाया ही नहीं गया है. जी हां, इस ऐप को खासतौर पर एआई एजेंट्स यानी मशीनों के लिए डिजाइन किया गया है. इसके क्रिएटर्स तो यहां तक चाहते हैं कि प्लेटफॉर्म पर केवल एआई ही एक्टिव रहें. इसी वजह से वे ‘रिवर्स CAPTCHA’ लाने की योजना बना रहे हैं, ताकि इंसान अंदर न आ सकें और सिर्फ मशीनें ही आपस में बातचीत करें. कौन हैं Peter Steinberger?Moltbook के पीछे का नाम है पीटर स्टाइनबर्गर, जो ऑस्ट्रिया के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर और टेक एंटरप्रेन्योर हैं. वे लंबे समय से डेवलपर कम्युनिटी में जाने जाते हैं. वायरल होने से पहले उन्होंने PSPDFKit नाम की कंपनी शुरू की थी. यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) है, जिसकी मदद से डेवलपर्स अपने ऐप्स में PDF देखने, एडिट करने, साइन करने और प्रोसेस करने जैसे फीचर्स जोड़ सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इस प्लेटफॉर्म को बिना किसी वेंचर फंडिंग के खड़ा किया और इसे इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड बना दिया. मोबाइल और वेब पर PDF हैंडलिंग के लिए PSPDFKit को डिफॉल्ट टूल माना जाने लगा. 13 साल बाद महसूस हुआ ‘लॉस्ट’स्टाइनबर्गर ने करीब 13 साल तक PSPDFKit पर काम किया. लेकिन इतने लंबे समय तक एक ही प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद उन्हें खुद को ‘लॉस्ट’ महसूस होने लगा. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि OpenClaw के वायरल होने से पहले वे 43 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स बना चुके थे. यानी वे हमेशा नए एक्सपेरिमेंट्स करते रहे और कुछ अलग बनाने की कोशिश में लगे रहे. कैसे शुरू हुआ OpenClaw का आइडियाकरीब दो महीने पहले उन्होंने एक वीकेंड पर मजाक-मजाक में एक छोटा सा प्रोजेक्ट बनाया. शुरुआत में इसका नाम ‘Clawd’ रखा गया, जो एक पॉपुलर एआई चैटबॉट के नाम पर मजेदार शब्द खेल था. लेकिन Anthropic की लीगल टीम की सलाह के बाद उन्हें नाम बदलना पड़ा. पहले इसे Moltbot और फिर OpenClaw नाम दिया गया. WIRED से बातचीत में उन्होंने बताया कि वे ऐसा सिस्टम बनाना चाहते थे, जिसमें इमेज और फाइल्स को सीधे कोडिंग मॉडल्स में फीड किया जा सके. साथ ही उनका मकसद था कि एआई असिस्टेंट्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स को अपना पर्सनल डेटा क्लाउड पर न देना पड़े. उनका मानना है कि लोग एआई तो चाहते हैं, लेकिन अपने डेटा पर कंट्रोल भी रखना चाहते हैं. Moltbook: Reddit जैसा, लेकिन सिर्फ AI के लिएअब Moltbook का लेटेस्ट वर्जन काफी हद तक Reddit जैसा दिखता है. इसमें अलग-अलग कम्युनिटीज हैं, पोस्ट करने का ऑप्शन है, कमेंट्स, अपवोट और डाउनवोट जैसे फीचर्स भी मौजूद हैं. लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि इंसान यहां सिर्फ कंटेंट देख सकते हैं, बातचीत में हिस्सा नहीं ले सकते. असली इंटरैक्शन सिर्फ एआई एजेंट्स के बीच होता है. यानी मशीनें खुद पोस्ट करती हैं, खुद कमेंट करती हैं और खुद ही डिस्कशन चलाती हैं. AI आपस में बात करे तो क्या होगा?हालांकि यह कॉन्सेप्ट काफी फ्यूचरिस्टिक लगता है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जताई है. OpenAI के पूर्व को-फाउंडर आंद्रेज करपैथी जैसे एआई एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब मशीनें आपस में ऑटोनॉमस तरीके से बात करेंगी, तो इसके सेकेंड-ऑर्डर इफेक्ट्स सामने आ सकते हैं.
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Feb 3, 2026, 02:40 AM
फतेहपुर के सिविल अस्पताल रेहान ने डिजिटल एक्स-रे सुविधा शुरू की, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि हुई

फतेहपुर के सिविल अस्पताल रेहान ने डिजिटल एक्स-रे सुविधा शुरू की, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि हुई

राजा का तालाब (कांगड़ा)। फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नागरिक अस्पताल रैहन में सोमवार से डिजिटल एक्स-रे की सुविधा विधिवत रूप से शुरू हो गई है। स्वास्थ्य सेवाओं में हुए इस विस्तार से क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को बड़ी राहत मिली है। अब मरीजों को एक्स-रे करवाने के लिए नूरपुर या फतेहपुर के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंबीएमओ फतेहपुर डॉ. रिचा मेहरोत्रा ने बताया कि इस डिजिटल एक्स-रे मशीन के शुरू होने से अस्पताल की जांच क्षमता में गुणात्मक सुधार होगा। डिजिटल तकनीक के कई लाभ मरीजों को मिलेंगे। डॉक्टरों को अब बेहतर क्वालिटी की इमेज मिलेगी, जिससे रोगों का सटीक निदान आसान होगा। इसके साथ ही डिजिटल होने के कारण रिपोर्ट तैयार होने में बहुत कम समय लगेगा, जिससे मरीजों का इलाज तुरंत शुरू हो सकेगा। यह सुविधा अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता को नए स्तर पर ले जाएगी।विज्ञापनविज्ञापनरैहन अस्पताल में इस सुविधा के अभाव के कारण अब तक मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब रैहन सहित आसपास की दर्जनों पंचायतों के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही यह आधुनिक स्वास्थ्य लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है।
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Feb 3, 2026, 01:35 AM
मस्तिष्क का सामंजस्यपूर्ण सहयोग मानव बुद्धि की कुंजीः अध्ययन

मस्तिष्क का सामंजस्यपूर्ण सहयोग मानव बुद्धि की कुंजीः अध्ययन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।एक नए अंतरराष्ट्रीय शोध में पाया गया है कि मानव बुद्धिमत्ता (इंटेलिजेंस) दिमाग के किसी एक खास हिस्से में सीमित नहीं होती, बल्कि यह पूरे मस्तिष्क की समन्वित कार्यप्रणाली का परिणाम है। यह निष्कर्ष नेटवर्क न्यूरोसाइंस थ्योरी के समर्थन में सामने आया है, जो मानती है कि दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तालमेल और अनुकूलन क्षमता ही बुद्धिमत्ता की असली पहचान है। यह शोध संकेत देता है कि बुद्धिमत्ता को समझने के लिए अब “दिमाग का कौन-सा हिस्सा'' नहीं, बल्कि “दिमाग कैसे संगठित है'', इस पर ध्यान देना होगा।
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Feb 2, 2026, 08:18 PM
कबीर मघर महोत्सवः एक ऐसा विज्ञान प्रदर्शनी जैसा कोई और नहीं

कबीर मघर महोत्सवः एक ऐसा विज्ञान प्रदर्शनी जैसा कोई और नहीं

मगहर। कबीर मगहर महोत्सव में आईआईटी बीएचयू के छात्र विभिन्न अवार्ड से नवाजे गए मनोहर कुमार और उनकी टीम ने अपने साइंस शो से सभी को अचंभित कर दिया। विभिन्न प्रकार के केमिकल के इस्तेमाल से आसमान से धरती पर उतरते बादल ने सबको चौंकाया। इसी तरह केमिकल के प्रयोग से लड़की की आवाज को लड़के की आवाज में परिवर्तित किया तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंइसके अलावा आग की लपटों का संगीत पर थिरकना, आग को मुंह में खा जाना, बिना बिजली के ट्यूबलाइट जलाने व आग को अलग अलग रंगों में निकालने जैसे प्रयोग देख लोग हैरान रह गए। साइंस शो का संचालन विवेक कुमार ने किया। मैनेजमेंट मोहित कुमार और बैक ग्राउंड सेटअप की जिम्मेदारी अमित और मनीष ने निभाई।विज्ञापनविज्ञापनइस मौके पर एसडीएम सदर, कोतवाली प्रभारी पंकज पांडेय, चौकी इंचार्ज मनीष जायसवाल, सदस्य महोत्सव समिति नुरुज्जमा अंसारी, अधिशासी अधिकारी वैभव सिंह, अवधेश सिंह, रईस आलम, सुजीत गुप्ता, मेराज खान आदि मौजूद रहे।
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Feb 2, 2026, 07:51 PM
72 वर्षीय रोगी का कैंसर-पूर्व आंत्र मेटाप्लासिया के लिए न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया के साथ सफलतापूर्वक इलाज किया गया

72 वर्षीय रोगी का कैंसर-पूर्व आंत्र मेटाप्लासिया के लिए न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया के साथ सफलतापूर्वक इलाज किया गया

संवाद न्यूज एजेंसीऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंफरीदाबाद। समय पर जांच और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के माध्यम से पेट के कैंसर को बनने से पहले ही रोकने का एक सफल मामला सामने आया है। 72 वर्षीय बुजुर्ग मरीज लंबे समय से पेट दर्द, भूख न लगने और पेट फूलने की समस्या से परेशान थे। विस्तृत जांच में एंडोस्कोपी के दौरान पेट की अंदरूनी परत में असामान्य बदलाव पाए गए। आगे की बायोप्सी जांच में यह स्थिति प्री-कैंसर पाई गई, जो समय पर इलाज न होने पर कैंसर में बदल सकती थी।इसके बाद शहर के यथार्थ हॉस्पिटल में मरीज का उन्नत और मिनिमली इनवेसिव तरीके से इलाज किया गया। अस्पताल के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी डॉ. ध्रुव कांत मिश्रा ने बताया कि मरीज में इंटेस्टाइनल मेटाप्लेसिया की पुष्टि हुई थी। विशेषज्ञ टीम ने बिना चीरा लगाए असामान्य टिशू को पूरी तरह हटा दिया गया।विज्ञापनविज्ञापनयह डे-केयर प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के सफल रही और मरीज को उसी दिन स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी और समय पर निदान की अहमियत को दर्शाता है, जिससे बड़ी सर्जरी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से मरीज को बचाया जा सका।
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Feb 2, 2026, 06:57 PM
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय को स्मार्ट डिजिटल आतिथ्य प्रदर्शन उपकरण के लिए पेटेंट प्राप्त हुआ

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय को स्मार्ट डिजिटल आतिथ्य प्रदर्शन उपकरण के लिए पेटेंट प्राप्त हुआ

महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने नवाचार और शोध के क्षेत्र में एक और उपलब्धि अपने नाम की है। विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अमित कुमार और उनके शोधार्थी सलोनी बंसल व काजल सिंह को एक पेटेंट मिला है। इससे मेहमाननवाजी स्मार्ट होगी।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंयह पेटेंट होटलों में अतिथि स्वागत के लिए रियल-टाइम डिजिटल हॉस्पिटैलिटी डिस्प्ले डिवाइस से जुड़ा है। इसका उद्देश्य होटलों में मेहमानों के अनुभव को बेहतर बनाना है। यह एक स्मार्ट डिजिटल स्क्रीन है जिसे होटल की लॉबी, रिसेप्शन या कमरों में लगाया जा सकता है।विज्ञापनविज्ञापनइस स्क्रीन पर मेहमानों के लिए व्यक्तिगत स्वागत संदेश, चेक-इन और चेक-आउट की जानकारी, होटल की सेवाओं जैसे स्पा, भोजन का समय, होटल के कार्यक्रम, मौसम और समाचार और अन्य जरूरी जानकारियां दिखाई जा सकती हैं। इसमें टच स्क्रीन और डिजिटल कंसीयर्ज सेवाएं भी होंगी जिससे मेहमान आसानी से जानकारी ले सकें।यह नई तकनीक होटल के कामकाज को आधुनिक बनाएगी और होटल व मेहमानों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने इस उपलब्धि के लिए शोध दल की सराहना की और उन्हें आगे भी अच्छे शोध और नए नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।इस अवसर पर कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा और कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने डॉ. अमित कुमार और उनके शोधार्थियों को इस सफलता के लिए बधाई दी।
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Feb 2, 2026, 02:49 PM
दीनबंधु छोटू राम विश्वविद्यालय ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की स्थापना की

दीनबंधु छोटू राम विश्वविद्यालय ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की स्थापना की

सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में अब उच्च शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकी शोध को नई दिशा मिलने जा रही है। विश्वविद्यालय में जल्द ही एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना की जाएगी जहां विद्यार्थी आधुनिक खेती की तकनीकों पर शोध कर सकेंगे।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंविश्वविद्यालय प्रशासन ने नए विभाग के गठन को लेकर सरकार से मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो से तीन महीने में मंजूरी मिलने के बाद विभाग का कार्य विधिवत शुरू हो जाएगा। विश्वविद्यालय में पहले से ही एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग का कोर्स संचालित है, जिसमें 30 सीटें निर्धारित हैं।विज्ञापनविज्ञापनहालांकि अब तक इस कोर्स में अपेक्षित दाखिले नहीं हो पा रहे थे, लेकिन इस सत्र में पहली बार सभी सीटें भरने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विषय के लिए अलग विभाग स्थापित करने का निर्णय लिया है। विभाग के गठन के बाद विद्यार्थियों को शोध से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।इसके साथ ही टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भी तैनाती की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि शीघ्र ही विद्यार्थी कृषि तकनीक पर अनुसंधान शुरू कर देंगे जिससे फसल उत्पादन बढ़ाने और किसानों की समस्याओं के समाधान में सीधा लाभ मिलेगा।टेक्सटाइल विभाग भी होगा स्थापितविश्वविद्यालय प्रशासन ने टेक्सटाइल विभाग स्थापित करने का भी फैसला लिया है। इसके लिए सरकार से मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंजूरी मिलने के बाद टेक्सटाइल उद्योग को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा। वर्तमान में टेक्सटाइल सेक्टर में तेजी से विकास हो रहा है और ऐसे में विशेष विभाग बनने से विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। विश्वविद्यालय का प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल छात्रों को प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट के लिए तैयार करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।आयसर कंपनी ने जारी किया अनुदानऑटोमोबाइल और ई-व्हीकल क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने आयसर कंपनी के साथ काम करने का निर्णय लिया है। कंपनी की ओर से विश्वविद्यालय को डेढ़ करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया गया है। इससे अत्याधुनिक तकनीकी लैब का निर्माण किया जा रहा है। लैब के तैयार होने के बाद विद्यार्थी ई-व्हीकल और ऑटोमोबाइल तकनीक पर गहन शोध कर सकेंगे और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप स्वयं को दक्ष बना सकेंगे।शिक्षा की गुणवत्ता के साथ शोध बढ़ेगाकुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल विभाग के गठन से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि शोध और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और भविष्य के लिए सक्षम बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहा है।
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Feb 2, 2026, 01:30 PM
अपने स्मार्टफोन को वर्चुअल मेट्रो कार्ड में बदलेंः यात्रियों के लिए एक गेम-चेंजर

अपने स्मार्टफोन को वर्चुअल मेट्रो कार्ड में बदलेंः यात्रियों के लिए एक गेम-चेंजर

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।क्या आपको भी अपने साथ मेट्रो कार्ड केरी करना मुश्किल लगता है? या आप भी कभी-कभी मेट्रो कार्ड घर भूल जाते हैं या फिर आपके वॉलेट में भी कार्ड रखने की जगह नहीं है तो आप अपने मोबाइल फोन को भी मेट्रो कार्ड बना सकते हैं। जी हां, अब आपको कार्ड खो जाने की भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है, आपका स्मार्टफोन ही आपका मेट्रो कार्ड बन सकता है। कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप अपने फोन में एक ऐसा QR-बेस्ड वर्चुअल स्मार्ट कार्ड तैयार कर सकते हैं, जिससे हर बार बिना टिकट जनरेट किए, बिना फिजिकल कार्ड के आराम से मेट्रो में एंट्री कर सकते हैं। चलिए जानें कैसे...
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Feb 2, 2026, 01:29 PM
दुर्लभ पृथ्वी खनिजों में चीन को चुनौती देने की भारत की महत्वाकांक्षी योजना

दुर्लभ पृथ्वी खनिजों में चीन को चुनौती देने की भारत की महत्वाकांक्षी योजना

भारत 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी रेस में सिर्फ उपभोक्ता नहीं, आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) बनने की दिशा में बढ़ रहा है. इसी कड़ी में रेयर अर्थ मिनरल यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) पर सरकार का खास फोकस दिख रहा है. आम बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की, जो भारत के तटीय और खनन समृद्ध इलाकों में नई औद्योगिक क्रांति की ज़मीन तैयार कर सकता है. यही नहीं, इस पर फोकस करके भारत चीन का भी तोड़ निकालने की कोशिश में है, क्योंकि रेयर अर्थ एलिमेंट्स मामले में चीन सबसे ऊपर है और भारत 5वीं पोजिशन पर है. आइए, केन्द्रीय बजट में हुई घोषणा के बहाने इससे जुड़े कुछ सवाल हल करने का प्रयास करते हैं. जैसे, भारत में कहां-कहां रेयर अर्थ मिनरल का भंडार है? किन राज्यों में सरकार का फोकस है? कहां-कहां रेयर अर्थ कॉरिडोर बनेंगे? रेयर अर्थ मिनरल 17 तत्वों का समूह है. 15 लैंथेनाइड, साथ में स्कैन्डियम और इट्रियम. ये दिखने में साधारण खनिजों जैसे मोनाज़ाइट आदि के भीतर छिपे रहते हैं, लेकिन आधुनिक टेक्नोलॉजी की रीढ़ इन्हीं पर टिकी है. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से स्मार्टफोन, लैपटॉप, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के मोटर और बैटरी, विंड टर्बाइन व अन्य ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट, रडार, मिसाइल और डिफेंस सिस्टम और हाई-परफॉर्मेंस परमानेंट मैग्नेट, लेज़र, मेडिकल इमेजिंग आदि में होता है. अभी इस मामले में दुनिया की सप्लाई चेन में चीन की हिस्सेदारी बहुत अधिक है. यही कारण है कि रेयर अर्थ पर नियंत्रण सिर्फ आर्थिक नहीं, रणनीतिक (स्ट्रैटेजिक) शक्ति भी माना जाता है. भारत के रेयर अर्थ संसाधन मुख्य रूप से बीच सैंड (समुद्री तटों की रेत) और कुछ आंतरिक खनिज भंडारों में केंद्रित हैं. केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा समेत कई अन्य राज्यों में रेयर अर्थ मिनरल के भंडार की संभावनाएं हैं. केन्द्रीय बजट 2026 में सरकार ने जिन राज्यों को स्पष्ट रूप से रेयर अर्थ कॉरिडोर के लिए चिन्हित किया है, उनमें ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु मुख्य हैं. सरकार का प्रस्ताव है कि इन खनिज समृद्ध राज्यों को रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर विकसित करने के लिए सहायता दी जाएगी, जिसमें माइनिंग (खनन), प्रोसेसिंग (अयस्क से रेयर अर्थ अलग करना व शुद्धिकरण), रिसर्च एंड डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, ख़ासकर परमानेंट मैग्नेट और अन्य हाई-वैल्यू प्रोडक्ट आदि शामिल हैं. बजट 2026 की घोषणा के मुताबिक, कॉरिडोर का फोकस मुख्यतः तटीय राज्यों के बीच सैंड मोनाज़ाइट डिपॉज़िट पर है. व्यापक रूप में कॉरिडोर की रूपरेखा कुछ इस तरह समझी जा सकती है. कॉरिडोर की सटीक भूगोलिक सीमाएं, क्लस्टर की लोकेशन, और प्रोजेक्ट की सूक्ष्म डिटेल आगे आने वाली सरकारी अधिसूचनाओं, डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट, और राज्यों की नीतियों से स्पष्ट होंगी. अभी यह एक फ्रेमवर्क और नीति-सूचना के रूप में सामने आया है. बजट 2026 रेयर अर्थ कॉरिडोर जितना आकर्षक दिखता है, उतने ही गंभीर सवाल भी उठते हैं. बीच सैंड माइनिंग समुद्री तट के इकोसिस्टम, मछुआरा समुदायों और तटीय जैव विविधता पर असर डाल सकती है. रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में केमिकल इस्तेमाल और रेडियोएक्टिव बाइ-प्रोडक्ट (जैसे थोरियम युक्त अपशिष्ट) का सुरक्षित निपटान बेहद ज़रूरी है. जमीन का अधिग्रहण, तटीय इलाकों का उपयोग, और पारंपरिक आजीविका (मत्स्य पालन आदि) पर प्रभाव जैसे मुद्दे सामने आएंगे. ट्रांसपेरेंट कंसल्टेशन, उचित मुआवज़ा, और स्थानीय लोगों के लिए प्राथमिकता से नौकरी सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा. खनन से लेकर हाई-एंड मैग्नेट और इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट तक पूरी वैल्यू चेन बनाना आसान नहीं है. इसके लिए विदेशी टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, R&D में भारी निवेश और स्किल डेवलपमेंट की ज़रूरत होगी, वरना भारत सिर्फ कच्चा माल सप्लायर बनकर रह सकता है. दुनिया भर में जब-तब रेयर अर्थ की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव होता है. अगर प्रोजेक्ट्स सिर्फ ऊंचे दाम के दौर को देखकर प्लान किए गए तो भाव गिरने पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. इसलिए नीतिगत स्थिरता और दीर्घकालिक सोच ज़रूरी है. भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां रेयर अर्थ मिनरल सिर्फ एक और खनिज संसाधन नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, सुरक्षा, हरित ऊर्जा और भू-राजनीति के चौराहे पर खड़ा एक रणनीतिक अवसर है. ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में प्रस्तावित रेयर अर्थ कॉरिडोर भारत को कई स्तरों पर सशक्त कर सकते हैं. चीनी निर्भरता घटेगी, वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बारगेनिंग पावर बढ़ेगी. बीच सैंड से लेकर हाई-टेक मैग्नेट, EV कंपोनेंट, सैटेलाइट-मिसाइल पार्ट्स तक नई इंडस्ट्री का निर्माण होगा. तटीय और खनन समृद्ध राज्यों में निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास की नई लहर उठ सकती है. लेकिन इस अवसर का सही लाभ तभी मिलेगा जब पर्यावरण मानकों, स्थानीय समुदायों के अधिकार, और लॉंग टर्म टेक्नोलॉजी क्षमता पर पारदर्शी और ज़िम्मेदार नीति लागू की जाए. यह भी पढ़ें:भारत के लिए बायोलॉजिक मेडिसिन कैसे बनेगी गेम चेंजर? बजट में ऐलान के बाद समझें पूरा गणित
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Feb 2, 2026, 12:47 PM
चीन के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा केंद्रों के लिए तरल शीतलन प्रौद्योगिकी में सफलता हासिल की

चीन के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा केंद्रों के लिए तरल शीतलन प्रौद्योगिकी में सफलता हासिल की

विस्तारवॉट्सऐप चैनल फॉलो करेंचीन के वैज्ञानिकों ने थर्मल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। उन्होंने ऐसी लिक्विड कूलिंग तकनीक पेश की है, जो कमरे के तापमान से कुछ ही सेकंड में सब-जीरो स्तर तक ठंडक पैदा कर सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक AI आधारित डेटा सेंटर्स के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, जहां अत्यधिक कंप्यूटिंग पावर के कारण हीट मैनेजमेंट एक बड़ी चुनौती बन चुका है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंइस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें पानी में घुले एक खास नमक अमोनियम थायोसाइनेट के अनोखे व्यवहार का इस्तेमाल किया गया है। दबाव डालने और छोड़ने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक “गीले स्पंज को निचोड़ने” जैसा बताते हैं। जैसे ही दबाव छोड़ा जाता है, नमक तेजी से दोबारा घुलता है और आसपास की गर्मी को तुरंत सोख लेता है।विज्ञापनविज्ञापन20 सकेंड में जमा देगा बर्फरिसर्च के दौरान पाया गया कि कमरे के तापमान पर यह घोल सिर्फ 20 सेकंड में करीब 30 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो गया। वहीं, अधिक गर्म वातावरण में तापमान में 50 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। यह क्षमता मौजूदा कूलिंग सिस्टम्स से कहीं ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है। यह रिसर्च 22 जनवरी को प्रतिष्ठित जर्नल 'नेचर' में प्रकाशित हुई थी। रिसर्च टीम में चीनी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल रिसर्च से ली बिंग, सेंटर फॉर हाई प्रेशर साइंस एंड टेक्नोलॉजी एडवांस्ड रिसर्च सहित कई वैज्ञानिक शामिल थे। उनका कहना है कि यह तकनीक AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए न केवल तेज कूलिंग देगी, बल्कि ऊर्जा की खपत भी काफी कम कर सकती है।AI रेस में यह तकनीक बन सकती है अहमदरअसल, अमेरिका और चीन के बीच AI रेस के साथ-साथ डेटा सेंटर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2024 में अमेरिका की कमर्शियल बिजली खपत में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जिसमें डेटा सेंटर्स की भूमिका अहम रही। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि AI सिस्टम्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग की जरूरत पड़ती है।हालांकि चीन के पास अमेरिका से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता है, लेकिन वह अब ज्यादा ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटर्स पर भी काम कर रहा है। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक ‘बारोकैलोरिक इफेक्ट’ को आगे बढ़ाते हुए इसे लिक्विड सॉल्यूशन तक लागू किया है, जिसे उन्होंने “डिसॉल्यूशन पर आधारित बारोकैलोरिक इफेक्ट” नाम दिया है।तेजी से ठंडा करता है लिक्विडइस तकनीक के आधार पर वैज्ञानिकों ने चार चरणों वाला कूलिंग साइकिल तैयार किया है, जिसमें दबाव डालना, गर्मी बाहर निकालना, दबाव छोड़कर तेजी से ठंडा करना और फिर उस ठंडे तरल से मशीनों की गर्मी सोखना शामिल है। एक साइकिल में हर ग्राम लिक्विड लगभग 67 जूल गर्मी सोख सकता है और इसकी सैद्धांतिक दक्षता 77 फीसदी तक बताई गई है, जो सामान्य फ्रिज की तुलना में कहीं बेहतर है।चीन की सरकारी मीडिया CCTV के मुताबिक, डेटा सेंटर्स की कुल बिजली खपत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा सिर्फ कूलिंग में खर्च होता है। ऐसे में यह नई खोज न सिर्फ बिजली की बचत कर सकती है, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों के इस्तेमाल को भी खत्म कर सकती है।
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Feb 2, 2026, 12:13 PM
श्रीनगर के छात्रों ने पर्यावरण के अनुकूल और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के साथ 53वीं क्षेत्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में शानदार प्रदर्शन किया

श्रीनगर के छात्रों ने पर्यावरण के अनुकूल और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के साथ 53वीं क्षेत्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में शानदार प्रदर्शन किया

श्रीनगर। केंद्रीय विद्यालय संगठन के संभागीय कार्यालय देहरादून की ओर से आयोजित 53वीं क्षेत्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में केंद्रीय विद्यालय एसएसबी श्रीनगर के छात्र छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिता में कक्षा 8 के छात्र अनंत रावत ने प्रथम स्थान जबकि कक्षा 9 के छात्र शाश्वत बलोदी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। यह विज्ञान प्रदर्शनी 29 एवं 30 जनवरी को केंद्रीय विद्यालय आईआईपी मोहकमपुर, देहरादून में आयोजित की गई। प्रतियोगिता में अनंत रावत ने सस्टेनेबल एग्रीकल्चर थीम के अंतर्गत इको फ्रेंडली कृषि मॉडल प्रस्तुत किया, जिसकी निर्णायकों ने अत्यंत सराहा की। वहीं शाश्वत बलोदी ने ग्रीन एनर्जी प्रोग्राम के तहत पोर्टेबल सोलर पावर्ड मोबाइल चार्जर का मॉडल बनाकर प्रस्तुत किया। विद्यालय की प्राचार्या कृति ने विजेता छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं मार्गदर्शक शिक्षकों को भी इस सफलता के लिए बधाई दी। संवादऔर पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
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Feb 2, 2026, 11:58 AM
प्रो. आशुतोष मिश्रा ने डी. सी. आर. यू. एस. टी. और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाला

प्रो. आशुतोष मिश्रा ने डी. सी. आर. यू. एस. टी. और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाला

सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) में सोमवार को प्रो. आशुतोष मिश्रा ने कुलसचिव का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने प्रो. आशुतोष मिश्रा को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रो. आशुतोष मिश्रा ने 16 जनवरी, 2025 को ही राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के नए कुलसचिव का पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वह दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत थे।विज्ञापनविज्ञापनउनके वर्तमान दायित्वों के साथ अब कुलाधिपति एवं हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम घोष ने डीसीआरयूएसटी मुरथल के कुलसचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। इस संबंध में हरियाणा राजभवन से आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।कुलसचिव प्रो. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में काम का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। वह कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करेंगे।इस दौरान डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति के ओएसडी ललित एवं पीएस राजेश भी उपस्थित रहे।
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Feb 2, 2026, 10:02 AM
निजी तस्वीरों को सुरक्षित रखेंः तीसरे पक्ष के ऐप के बिना संवेदनशील फाइलों को छिपाने की तरकीबें

निजी तस्वीरों को सुरक्षित रखेंः तीसरे पक्ष के ऐप के बिना संवेदनशील फाइलों को छिपाने की तरकीबें

Hide photos without app:आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल करने का साधन नहीं रह गया है. इसमें अब लोग अपने पर्सनल राज दबा कर रखते है. कई लोग अपने फोन में कुछ खास फोटो या वीडियो रखते है. जिससे उनको अपना फोन किसी और को देने में डर लगता है. उनको लगता है कि सामने वाला अगर गलती से कोई फोटो खोल कर देख लिया तो उनको क्या होगा? ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या बिना किसी अलग ऐप के वो अपनी प्राइवेट तस्वीरों को सिक्योर रख सकते है. तो इसका जवाब है 'हां'. हम यहां आपको कुछ ऐसी ट्रिक बताने जा रहे हैं, जिससे आप बिना किसी थर्ड-पार्टी ऐप के अपनी सेंसेटिव तस्वीरें छिपा सकेंगे. खतरनाक होते हैं थर्ड-पार्टी ऐप्स?स्मार्टफोन में आपकी प्राइवेट तस्वीरों को सिक्योर करने के लिए कई थर्ड-पार्टी ऐप्स भी आते हैं. लेकिन ये ऐप्स न सिर्फ आपके फोन की मेमोरी भरते हैं, बल्कि कई बार आपके डेटा और प्राइवेसी के लिए भी खतरा बन जाते हैं. इनमें से कई ऐप्स ऐड से भरे होते हैं और आपका पर्सनल डेटा सर्वर पर स्टोर कर सकते हैं. इसीलिए फोन के इनबिल्ट फीचर्स का इस्तेमाल करना आपके लिए सबसे सिक्योर ऑप्शन होता है. Android यूजर्स करें ये कामअगर आप एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करते हैं, तो आप गूगल फोटोज के 'Locked Folder' फीचर का इस्तेमाल अपनी प्राइवेट फोटो या वीडियो के लिए कर सकते हैं. इसके लिए आप नीचे दिए जा रहे स्टेप्स को फॉलो करें.स्टेप 1.सबसे पहले आप Google Photos ऐप खोलेंस्टेप 2.अब आप नीचे दिए गए Library टैब पर जाएं और फिर Utilities पर क्लिक करें.स्टेप 3.यहाँ आपको 'Locked Folder' का ऑप्शन दिखेगा, इसे सेट-अप करें.स्टेप 4.अब अपनी प्राइवेट तस्वीरों को सिलेक्ट करें और 'Move to Locked Folder' कर दें.स्टेप 5.अब आपकी ये तस्वीरें मेन गैलरी, एलबम्स या क्लाउड बैकअप में भी नजर नहीं आएंगी. इन्हें देखने के लिए आपके फिंगरप्रिंट या पिन की जरूरत होगी. iPhone वाले यूजर्स भी ना हो निराशअगर आप Android फोन नहीं चलाते, तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं हैं. यहां हम iPhone यूजर्स के लिए भी ऐसी ट्रिक लेकर आए हैं, जिससे आप अपनी Private चीजें Hide कर सकते हैं. एप्पल ने iOS 16 के बाद से तस्वीरों को हाइड करना बेहद आसान बना दिया है. इसके लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को देखें.स्टेप 1.इसके लिए आप सबसे पहले अपनी Photos ऐप में जाएं और उस तस्वीर को चुनें जिसे Hide करना है.स्टेप 2.अब ऊपर बने तीन डॉट्स या शेयर बटन पर क्लिक कर Hide बटन दबाएं.स्टेप 3.अब आपकी फोटो 'Hidden' एलबम में चली जाएगी.स्टेप 4.आईफोन की सेटिंग्स में जाकर आप 'Use Face ID' को ऑन कर सकते हैं, जिससे 'Hidden' एलबम खोलने के लिए आपकी Face ID या पासवर्ड जरूरी होगा. इसके बाद आपका एलबम दिखते हुए भी कोई उसे खोल नहीं पाएगा. फाइल्स का नाम बदलकर भी कर सकते हैं 'खेल'एक पुरानी लेकिन कारगर ट्रिक यह भी है कि आप फाइल मैनेजर में जाकर फोटो का एक्सटेंशन बदल दें. जैसे image.jpg को image.txt कर दें. ऐसा करने से फोन उसे फोटो के बजाय एक फाइल समझेगा और वह गैलरी में दिखेगी ही नहीं. जब आपको दोबारा उस फोटो को देखना हो, तो उसे फिर से .jpg में कनवर्ट कर दें. यह भी पढ़ें:-Mozilla Firefox यूजर्स सावधान! भारत सरकार ने जारी की 'हाई रिस्क' वार्निंग, एक गलती..
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Feb 2, 2026, 09:37 AM
भारत ने लंबी दूरी के संचालन के लिए 4x4 ट्रक पर दुनिया की पहली 155 मिमी तोप का अनावरण किया

भारत ने लंबी दूरी के संचालन के लिए 4x4 ट्रक पर दुनिया की पहली 155 मिमी तोप का अनावरण किया

नई दिल्ली:अमेरिका और ईरान में तनाव किसी से छिपा नहीं है। रूस-यूक्रेन में पहले ही जंग जारी है। इस तरह दुनिया के कई देशों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच भी बीते साल सैन्य संघर्ष सामने आ चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को घुटनों पर आना पड़ा था। इस बीच भारतीय सेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है। इंडियन आर्मी सैन्य क्षमता में इजाफे के लिए नए हथियारों को बेड़े में शामिल कर रही। ऐसे में दुश्मनों के खिलाफ एक्शन के लिए नए 'बाहुबली' की एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हम बात कर रहे दुनिया की पहली 4x4 ट्रक पर सवार 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन की, जिसके एक्शन से दुश्मनों को संभलने का मौका भी नहीं मिले।नए आर्टिलरी गन से जुड़ा बड़ा अपडेटकल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (केएसएसएल) ने ये अहम हथियार बनाया है। उन्होने 4×4 पहियों वाले चेसिस पर लगी 155mm/52-कैलिबर आर्टिलरी गन के सफल निर्माण की पुष्टि की है। दुनिया में ऐसा पहली बार है, जब इंजीनियरिंग उपलब्धि के लिए लंबी दूरी की हेवी होवित्जरतोप की मारक क्षमताको कॉम्पैक्ट गाड़ी के साथ जोड़ा गया है। ये ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसे पहले स्ट्रक्चर के हिसाब से संभव नहीं माना जाता था।कैसे 4x4 ट्रक पर सवार हुई ये तोपकेएसएसएल ने हाइब्रिड रिकॉइल टेक्नोलॉजी के साथ इस तोप के वजन की बाधा को तोड़ने का प्रयास किया गया। इसमें हल्के 4×4 ट्रक पर 52-कैलिबर गन लगाने में मुख्य चुनौती फायरिंग के दौरान पैदा होने वाले भारी रिकॉइल फोर्स को मैनेज करना था। ऐसा इस पावर की गन को स्थिरता बनाए रखने के लिए भारी 6×6 या 8×8 प्लेटफॉर्म या ट्रैक वाली गाड़ियों की जरूरत होती है।दुनिया की पहली 4x4 ट्रक पर सवार आर्टिलरी गनकल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड ने एक खास हाइब्रिड रिकॉइल सिस्टम विकसित करके इस कमी को दूर किया है। यह एडवांस्ड मैकेनिज्म फायरिंग एनर्जी को प्रमुखता से सोखता है, जिससे प्लेटफॉर्म बिना किसी भारी चेसिस पर स्थिर और सुरक्षित रहता है। एडवांस्ड मटीरियल और ऑटोमेशन सिस्टम को 4×4 प्लेटफॉर्म के लिए और भी बेहतर बनाने के लिए, इंजीनियरों ने वजन कम करने पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया।जानें नए 'बाहुबली' की खास बातें4x4 ट्रक पर सवार 155mm 52-कैलिबर आर्टिलरी गन कैरिज को लेकर अहम बदलाव किए गए हैं।पारंपरिक स्टील के बजाय हाई-स्ट्रेंथ एल्यूमीनियम से इस गन को बनाया गया है, जिससे इसका वजन काफी कम हो गया।अब इसका वजन लगभग 24 टन है, जो इस क्लास की आर्टिलरी के लिए बहुत हल्का है।ऑपरेशनल एक्शन को एक ऑटोमैटिक गोला-बारूद हैंडलिंग सिस्टम से बढ़ाया गया हैइस कदम से क्रू पर शारीरिक तनाव कम पड़ता है।ये गन हर मिनट पांच राउंड तक की तेज फायरिंग स्पीड की अनुमति देता है।हल्के निर्माण और ऑटोमेशन का यह कॉम्बिनेशन सिस्टम को ग्लोबल डिफेंस मार्केट में एक खास जगह देता है।डिजिटल इंजीनियरिंग और टेस्टिंग भी की गई है। अब इसे ओडिशा के बालासोर फील्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण के लिए निर्धारित किया गया है।ये आने वाले ट्रायल लाइव-फायर स्थितियों में बंदूक की सटीकता, संरचनात्मक मजबूती और रिकॉइल मैनेजमेंट का कड़ाई से मूल्यांकन करेंगे।
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Feb 2, 2026, 09:25 AM
एनवीडिया ने सटीक मौसम पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन अंतर्दृष्टि के लिए पृथ्वी-2 एआई मॉडल का अनावरण किया

एनवीडिया ने सटीक मौसम पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन अंतर्दृष्टि के लिए पृथ्वी-2 एआई मॉडल का अनावरण किया

Nvidia Earth 2 :मौसम का सटीक अनुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक अलग-अलग तकनीकों का इस्‍तेमाल करते हैं। भविष्‍य में आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस यानी AI इस काम में भी मददगार होगा। AI की मदद से तूफान की भविष्‍यवाणी और सटीकता से की जाएगी जिससे जानमाल का नुकसान कम करने में मदद मिलेगी। यह सब संभव होगा दिग्‍गज कंपनी एनवीड‍िया (Nvidia) के नए एआई मॉडल से, जिसका नाम Earth-2 है। कहा जा रहा है कि सुपरकंप्‍यूटर से भी फास्‍ट इन एआई मॉडलों की मदद से मौसम भी भविष्‍यवाणी और जलवायु परि‍वर्तन का अनुमान लगाना पूरी तरह से बदल सकता है। इनमें से कुछ का इस्‍तेमाल शुरू भी हो गया है।क्‍या है Earth-2दुनिया की दिग्‍गज टेक कंपनी एनवीड‍िया ने Earth-2 नाम से एआई मॉडलों को पेश किया है। इन मॉडलों में CorrDiff, FourCastNet3, Medium Range, Nowcasting, Global Data Assimilation और PhysicsNeMo जैसे फ्रेमवर्क शामिल हैं। इनमें से PhysicsNeMo को AI-फिजिक्स मॉडलों को ट्रेनिंग देने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए लाया गया है। ये सभी मॉडल- सैटेलाइट और रडार व मौसम स्‍टेशनों से मिली जानकारी को एक जगह इंटीग्रेट करके हमारे वायुमंडल की स्‍थि‍त‍ि का सटीक आकलन करते हैं।जेनरेट‍िव एआई का इस्‍तेमालEarth-2 एआई मॉडलों के कई फ्रेमवर्क जेनरेट‍िव एआई का इस्‍तेमाल करते हैं। इससे भविष्‍यवाणी करना ज्‍यादा फास्‍ट हो जाता है। दावा है कि मौजूदा तकनीक से 500 गुना फास्‍ट यह एआई मॉडल मौसम की भविष्‍यवाणी कर सकते हैं।अलग-अलग मॉडलों के अलग-अलग कामEarth-2 एआई मॉडलों में जितने भी फ्रेमवर्क हैं, उनके अलग-अलग काम हैं। टेक रडार कीरिपोर्ट के अनुसार, CorrDiff फ्रेमवर्क, जनरेटिव AI आर्किटेक्चर का इस्‍तेमाल करके महाद्वीप के लेवल से जुड़े अनुमानों को रीजनल अनुमानों में बदल देता है। इसी तरह से FourCastNet3 का काम हवा, टेंपरेचर और नमी का सटीक अनुमान लगाना है। दावा है कि यह ट्रेड‍िशनल मॉडल से 60 गुना तेज भविष्‍यवाणी करता है। इसी तरह से PhysicsNeMo मॉडल का काम AI-फिजिक्स मॉडलों को ट्रेन करना है। रिपोर्ट के अनुसार, मौसम की भविष्‍यवाणी करने वाले संगठनों और वैज्ञानिक रिसर्च, दोनों के लिए यह उपयोगी है।इसके आगे सुपरकंप्‍यूटर भी फेलEarth-2 इतना एडवांस और होशियार है कि यह वायुमंडल में हो रहे बदलावों को चंद सेकंड में भांप लेता है। इस काम को करने में सुपरकंप्‍यूटरों को घंटों लग जाते हैं। अगर किसी बदलाव को कुछ सेकंड में भांप लिया जाए तो लोगों तक अलर्ट जल्‍दी भेजा जा सकता है। एनवीड‍िया के कुछ फ्रेमवर्क का इस्‍तेमाल कई देशों के मौसम विभाग पहले से कर रहे हैं।इस्राइल में हो रहा इस्‍तेमालइस्राइल की मौसम बताने वाली सर्विस में CorrDiff का उपयोग किया जा रहा है। जैसाकि हमने बताया, यह महाद्वीप स्‍तर होने वाली हलचलों को से क्षेत्रीय आकलन करके एक अनुमान बना देता है। इस्राइल बहुत जल्‍द Nowcasting को भी अपनाने वाला है, जिसके बाद एक द‍िन में 8 बार मौसम की भविष्‍यवाणी हाई-रेजॉलूशन ग्राफ‍िक्‍स से की जा सकेगी। इस्राइल के अलावा, ताइवान के मौसम विज्ञानी भी एनवीड‍िया के कई फ्रेमवर्क्‍स को इस्‍तेमाल कर रहे हैं।
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Feb 2, 2026, 08:01 AM
नासा के दृढ़ता रोवर ने मंगल ग्रह पर एआई-नियंत्रित ड्राइव के साथ नया रिकॉर्ड बनाया

नासा के दृढ़ता रोवर ने मंगल ग्रह पर एआई-नियंत्रित ड्राइव के साथ नया रिकॉर्ड बनाया

विस्तारFollow Usआज के इस आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई हमारे भविष्य का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष संस्था नासा (NASA) ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नासा के परसेवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की मुश्किल सतह पर बिना किसी मानवीय निर्देश के पूरी तरह एआई की मदद से खुद गाड़ी चलाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंबिना इंसानी मदद के तय किया रास्ताआमतौर पर मंगल ग्रह पर रोवर को चलाने के लिए पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिकों को उसके हर कदम की बारीकी से प्लानिंग करनी पड़ती है। लेकिन 8 और 10 दिसंबर को हुए परीक्षण में इस रोवर ने बिना किसी मानवीय मदद के अपना रास्ता खुद तय करके सबको चौंका दिया। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में यह पहली और सबसे बड़ी घटना है, जहां किसी रोवर ने बिना किसी निर्देश के खुद फैसला लेकर अपनी यात्रा पूरी की है।विज्ञापनविज्ञापनकैसे काम करती है यह तकनीक?चूंकि मंगल ग्रह पृथ्वी से लगभग 22.5 करोड़ किलोमीटर दूर है इसलिए वहां सिग्नल पहुंचने में काफी देरी होती है। इस चुनौती को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने रोवर में 'जनरेटिव एआई' तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक की मदद से रोवर ने पुराने मिशनों के डाटा को खुद समझा और इंसानों की तरह ही तस्वीरों के आधार पर अपने रास्ते के बिंदु (वेपॉइंट्स) तय किए। अब यह रोवर दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने के लिए किसी इंसान के निर्देश का इंतजार करने के बजाय खुद सुरक्षित फैसले ले सकता है।भारतीय वैज्ञानिक वंदी वर्मा की मुख्य भूमिकाइस पूरे मिशन का नेतृत्व नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) ने किया है। इस ऐतिहासिक सफलता पर JPL की वरिष्ठ इंजीनियर और भारतीय मूल की वंदी वर्मा ने बताया कि जनरेटिव एआई अब अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया को पूरी तरह बदलने वाला है। उन्होंने बताया कि चाहे मंगल के पत्थरों को पहचानना हो, अपनी सही लोकेशन का पता लगाना हो या सबसे सुरक्षित रास्ता चुनना हो- एआई इन सभी कामों को एक इंसान की तरह और भी बेहतर तरीके से करने में सक्षम है, जिससे भविष्य के मिशन बहुत आसान हो जाएंगे।भविष्य की राहनासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन के अनुसार, यह सफलता दिखाती है कि हमारी तकनीकी क्षमताएं अब काफी आगे बढ़ चुकी हैं। इस तरह की 'सेल्फ-ड्राइविंग' तकनीक न केवल भविष्य के मिशनों को पहले से बेहतर बनाएगी, बल्कि पृथ्वी से सिग्नल मिलने में होने वाली देरी के बावजूद रोवर को मुश्किल रास्तों पर तेजी से फैसले लेने में मदद करेगी। इससे समय बचेगा और वैज्ञानिक खोजों का दायरा भी काफी बढ़ जाएगा।
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Feb 2, 2026, 07:08 AM
किशोर की आत्महत्या एआई-जनरेटेड नग्न छवि पर धमकियों से जुड़ी हुई है

किशोर की आत्महत्या एआई-जनरेटेड नग्न छवि पर धमकियों से जुड़ी हुई है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।यूनाइटेड स्टेट्स के राज्य केंटकी के रहने वाले 16 साल के बच्चे ने आत्महत्या कर ली है। इस बच्चे की आत्महत्या के पीछे का कारण AI है। नाबालिग के माता-पिता को पता चला कि उसे धमकी भरे टेक्स्ट मैसेज मिल रहे थे, जिसमें उसकी AI-जेनरेटेड न्यूड इमेज को छिपाने के लिए 3,000 डॉलर की मांग की गई थी। न्यूडिफाई एप्स में AI टूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन एप्स का तेजी से बढ़ रहा है। ये एप डिजिटल रूप से लोगों के कपड़े हटाते हैं या सेक्शुअल इमेज बनाते हैं।
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Feb 2, 2026, 06:57 AM
पी. जी. आई. चंडीगढ़ ने व्यापक संक्रामक रोग उपचार के लिए सुविधाओं का उन्नयन किया

पी. जी. आई. चंडीगढ़ ने व्यापक संक्रामक रोग उपचार के लिए सुविधाओं का उन्नयन किया

चंडीगढ़ (पाल):आने वाले समय में, PGI एक ही छत के नीचे कोविड-19 और कई दूसरी संक्रामक बीमारियों का इलाज कर पाएगा। PGI के जरूरी प्रोजेक्ट का हिस्सा क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने का रास्ता साफ हो गया है। PGI के डिप्टी डायरेक्टर पंकज राय के मुताबिक, एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस मिलने के बाद काम HSCC को सौंप दिया गया है। PGI मास्टर प्लान के तहत, कैंपस में अभी दो बड़े प्रोजेक्ट तैयार हैं, न्यूरोसाइंस सेंटर और मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर। PGI कैंपस में स्कूल ऑफ नर्सिंग के सामने खाली जमीन पर 150 बेड वाले इस सेंटर का काम शुरू हो गया है। यह इंस्टीट्यूशन में बनने वाला तीसरा बड़ा प्रोजेक्ट होगा। डिप्टी डायरेक्टर के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट PGI के लिए खास है, जिसके लिए लंबे समय से प्लानिंग की जा रही थी। उम्मीद है कि इससे मरीज़ों को और भी ज़्यादा फायदा होगा।संक्रामक बीमारियों से पीड़ित गंभीर मरीजों को मिलेगा इलाजइस प्रोजेक्ट की प्लानिंग कोविड के दौरान की गई थी। उस समय सोचा गया था कि यहां इंफेक्शन वाली बीमारियों के मरीजों को इलाज मिल सकेगा। कोविड के समय जिस तरह का माहौल था, उसे देखते हुए उस समय हॉस्पिटल के कई डिपार्टमेंट नेहरू एक्सटेंशन केयर सेंटर में शिफ्ट कर दिए गए थे। अब इस सेंटर में इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में आने वाले क्रिटिकल और बहुत क्रिटिकल मरीजों को रखा जाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर भविष्य में कोविड जैसे हालात बने तो यह सेंटर बहुत असरदार साबित होगा।मरीजों को मिलेंगी ये सुविधाएंक्रिटिकल केयर ब्लॉक में एक ICU, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन सपोर्ट बेड, सर्जिकल यूनिट, दो लेबर डिपार्टमेंट, डिलीवरी और रिकवरी रूम, और नवजात बच्चों और उनसे जुड़ी बीमारियों की देखभाल के लिए एक अलग डिपार्टमेंट होगा। यह एक मल्टी-स्पेशियलिटी सेंटर होगा, जिसमें ICU और स्टेप-डाउन यूनिट (SDU) होंगे। अगर हॉस्पिटल के किसी भी डिपार्टमेंट में कोई मरीज ज्यादा सीरियस है और उसे स्पेशल केयर की जरूरत है, तो उसे यहां भेजा जाएगा।अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिएClick Hereऔर ये भी पढ़ेआपदा से निपटने को नायब सरकार का बड़ा कदम,अब इस भर्ती में भी अग्निवीरों को मिलेगी प्राथमिकताSYL पर पंजाब-हरियाणा की बैठक, दोनों सीएम बोले-अच्छे माहाैल में बात हुई है, झगड़ा निपट जाना चाहिए86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन लखनऊ में शुरू
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Feb 2, 2026, 06:21 AM
भारतीय छात्रों ने पहनने योग्य मनोदशा डिटेक्टर मॉडल विकसित किया

भारतीय छात्रों ने पहनने योग्य मनोदशा डिटेक्टर मॉडल विकसित किया

विस्तारFollow Usराजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पालमपुर की 12वीं की छात्रा निधि पालमपुर की और 11वीं की छात्राओं ने छात्रा शैलजा ने मिलकर मूड स्विंग डिटेक्टर बनाया मॉडल सिस्टम नामक मॉडल तैयार किया है। यह शरीर के तापमान और हृदय की गति (हार्ट बीट) के आधार पर यह बताने में सक्षम है कि व्यक्ति खुशी, चिंता या तनाव की किस स्थिति में है। छात्राओं ने इस मॉडल को स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में विकसित किया है। निधि को इस मॉडल की प्रेरणा अपनी दादी के स्वभाव में आने वाले अचानक बदलावों को देखकर मिली।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंमॉडल प्रोटोटाइप स्तर पर है। छात्राओं का लक्ष्य इसे अंगूठी (रिंग) या रिस्ट बैंड जैसा बनाना है। छात्रा निधि का कहना है कि आज के दौर में युवा अक्सर मानसिक तनाव से गुजरते हैं और अपनी बात साझा नहीं कर पाते। यह तकनीक उनके भावनात्मक संकेतों को समय रहते पकड़ लेगी। इस प्रोजेक्ट में मेंटर सन्नी, भौतिकी की शिक्षिका मंजू और कंप्यूटर शिक्षिका प्रियंका का विशेष योगदान रहा। प्रधानाचार्य रितु जम्वाल ने इसे स्कूल के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है। जिला शिक्षा उपनिदेशक (सेकेंडरी) कमलेश ठाकुर ने स्कूल पहुंचकर मॉडल का अवलोकन किया और सराहा।
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Feb 2, 2026, 06:11 AM
बजट घोषणाएँः बायोफार्मा और बायोलॉजिक्स क्षेत्रों को होगा लाभ

बजट घोषणाएँः बायोफार्मा और बायोलॉजिक्स क्षेत्रों को होगा लाभ

नई दिल्ली।बजट में फ्यूचर एंड ऑप्शन पर एसटीटी यानी सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाने से भले ही 1 फरवरी को शेयर बाजार औंधे मुंह लुढ़क गया, मगर कई सेक्टर ऐसे हैं, जिन्हें लॉन्ग टर्म में फायदा हो सकता है। ये फायदा उन घोषणाओं से हो सकता है, जो विभिन्न सेक्टरों के लिए की गयी हैं। जैसे कि बायोफार्मा और बायोलॉजिक्स सेक्टर, जिनके लिए कुछ खास अलॉटमेंट हुए हैं। नतीजे में इन सेक्टरों की लिस्टेड कंपनियों को भी फायदा हो सकता है। आइए जानते हैं, ऐसे ही सभी सेक्टरों के बारे में की गई मुख्य घोषणाओं के बारे में।
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Feb 2, 2026, 05:57 AM
एप्पल ने आईफोन 18 सीरीज और पहला फोल्डेबल आईफोन पेश कियाः'आईफोन फोल्ड'

एप्पल ने आईफोन 18 सीरीज और पहला फोल्डेबल आईफोन पेश कियाः'आईफोन फोल्ड'

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।एप्पल इस साल अपनी नई आईफोन 18 सीरीज लॉन्च कर सकता है। इस सीरीज के साथ ही एप्पल अपना पहला फोल्डेबल iPhone भी पेश कर सकता है, जिसे iPhone Fold के नाम से लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि अब नई रिपोर्ट्स में ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि कंपनी का ये एकमात्र फोल्डेबल मॉडल नहीं होगा। जी हां, कंपनी इस फोल्ड आईफोन के लॉन्च के बाद अपना फ्लिप फोन भी लॉन्च कर सकता है।
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Feb 2, 2026, 04:13 AM
जापान ने सोने पर हमला कियाः अपने ही पिछवाड़े में दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की खोज

जापान ने सोने पर हमला कियाः अपने ही पिछवाड़े में दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की खोज

जापान को अब चीन की मेहरबानी की जरूरत नहीं रह गई है क्योंकि उसने रेयर अर्थ मेटल्स का खुद का खान खोज निकाला है. जापान ने एक महीने पहले अपना एक रिसर्च जहाज समंदर में उतारा था जिसने 6 किलो मीटर की गहराई में गहरे समुद्र के अंदर रेयर अर्थ मेटल्स की खोज की थी. अब जापान की सरकार ने सोमवार, 2 फरवरी को उसे समुद्र की इस गहराई पर जो गाद (सेडिमेंट) मिले हैं, उसमें रेयर अर्थ मेटल्स पाए गए हैं. जापान के लिए यह खुशखबरी उस समय आई है जब चीन से उसके रिश्तें बहुत खराब चल रहे हैं. जापान का कहना है कि यह मिशन समुद्र के अंदर इतनी गहराई में रेयर अर्थ मेटल्स निकालने वाला दुनिया का पहला ऐसा प्रयास था.काम की बात: पहले तो आपको आसान भाषा में बताते हैं कि आखिर रेयर अर्थ मेटल्स होते क्या हैं. रेयर अर्थ मेटल्स धरती के अंदर पाए जाने वाले 17 दुर्लभ धातु हैं. आज के टेक्नोलॉजी के जमाने में रेयर अर्थ मेटल्स ऐसा फैक्टर है जिससे कंट्रोल अपने हाथ में बनाया रखा जा सकता है. दरअसल हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ी बनाने से लेकर एयरोस्पेस बनाने तक, सेमीकंडक्टर बनाने से और उपभोक्ता वस्तुओं बनाने तक, हर जगह रेयर अर्थ के कंपोनेंट अहम हैं. अभी चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है. दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का 60-70 प्रतिशत हिस्सा चीन का है.जापान की तो बल्ले-बल्ले हो गई12 जनवरी को जापान के इसवैज्ञानिक ड्रिलिंग जहाजकी ऐतिहासिक यात्रा शुरू हुई जिसका नाम चिक्यू है. शिज़ुओका के शिमिज़ु बंदरगाह से यह जहाज प्रशांत क्षेत्र के सुदूर द्वीप मिनामी तोरीशिमा के लिए रवाना हुआ. पहले से ही माना जा रहा था कि इस द्वीप के आसपास के पानी में मूल्यवान खनिजों का एक समृद्ध भंडार है. और यह साबित भी हो गया है. जापान ने यहां समंदर के अंदर रेयर अर्थ मेटल्स खोज लिए हैं.न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार जापान के सरकारी प्रवक्ता केई सातो ने इसे जापान की आर्थिक सुरक्षा और व्यापक समुद्री विकास दोनों के संदर्भ में एक बड़ी उपलब्धि" बताया है. उन्होंने कहा कि जो सैंपल मिल हैं, उनका पहले विश्लेषण किया जाएगा. यह जाना जाएगा कि यहां के सैंपल में रेयर अर्थ के कितने मेटल्स मौजूद हैं.द इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के रिसर्च फेलो ताकाहिरो कामिसुना ने एएफपी को बताया, "अगर जापान लगातार मिनामी तोरीशिमा के आसपास से रेयर अर्थ मेटल्स को सफलतापूर्वक निकाल सकता है, तो यह प्रमुख उद्योगों के लिए घरेलू सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा. इसी तरह, यह ताकाची सरकार के लिए चीन पर निर्भरता को काफी कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति होगी."चीन और जापान में तल्खी चरम परचीन दुनिया में रेयर अर्थ कासबसे बड़ा सप्लायर देशहै और वो इस बात की अहमियत जानता है. लेकिन अभी जापान को चीन के साथ बढ़ते राजनीतिक, व्यापार और सुरक्षा तनाव का सामना करना पड़ रहा है. जापान की प्रधान मंत्री साने ताकाची ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अगर ताइवान के खिलाफ चीन कोई कार्रवाई करता है तो जापानी हस्तक्षेप कर सकता है. ताइवान एक स्व-शासित लोकतांत्रिक द्वीप है और उसपर चीन अपना दावा करता है. जापान के बयान के बाद से चीन और उनके बीच तनाव चरम पर है. दोनों देश एक-दूसरे के प्रति बढ़ती शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों और बयानबाजी में लगे हुए हैं. इस महीने की शुरुआत में, चीन ने जापान को रेयर अर्थ मेटल्स से संबंधित उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध कड़े कर दिए.यह भी पढ़ें: तकनीक से ताकत तक रेयर अर्थ मिनरल्स की लड़ाई, चीन के आगे भारत कहां खड़ा है? पढ़ें 360 डिग्री विश्‍लेषण
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Feb 2, 2026, 03:49 AM
हुंडई और किआ का विजन पल्स सिस्टम रियल-टाइम ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के साथ ड्राइवर की सुरक्षा को बढ़ाता है।

हुंडई और किआ का विजन पल्स सिस्टम रियल-टाइम ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के साथ ड्राइवर की सुरक्षा को बढ़ाता है।

दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनियां Hyundai Motor Company और Kia Corporation ने हाल ही में एक नई ड्राइवर सेफ्टी टेक्नोलॉजी लॉन्च की है, जो सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाने का दावा करती है. यह टेक्नोलॉजी रडार की मदद से लोगों और वाहनों को तब भी पहचान सकती है, जब वे ड्राइवर की नजर से छिपे हों या ब्लाइंड स्पॉट में हों. आमतौर पर ब्लाइंड स्पॉट एक्सीडेंट का बड़ा कारण बनते हैं, लेकिन इस नए सिस्टम के आने से ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है. कंपनियों का कहना है कि यह सिस्टम रियल टाइम में लगभग 99 प्रतिशत सटीकता के साथ आसपास की चीजों का पता लगा सकता है. क्या है Vision Pulse सिस्टमइस नई तकनीक का नाम Vision Pulse रखा गया है. यह सिस्टम उन लोगों और वाहनों को भी पहचान सकता है जो सीधे दिखाई नहीं देते. इसके लिए यह अल्ट्रा-वाइडबैंड यानी UWB रेडियो सिग्नल्स का इस्तेमाल करता है. ये सिग्नल आसपास मौजूद ऑब्जेक्ट्स की लोकेशन को तुरंत ट्रैक करते हैं. UWB आधारित यह तरीका काफी सटीक है. यह लगभग चार इंच यानी 10 सेंटीमीटर तक की सटीक पोजिशनिंग दे सकता है और करीब 100 मीटर यानी 330 फीट की दूरी तक काम करता है. खास बात यह है कि यह सिस्टम तब भी ठीक से काम करता है जब विजुअल रुकावटें हों, जैसे धुंध, बारिश या अंधेरा. खराब मौसम और रात में भी असरदारHyundai के अधिकारियों के अनुसार, यह टेक्नोलॉजी खराब मौसम या रात के समय भी 99 प्रतिशत से ज्यादा डिटेक्शन सटीकता बनाए रखती है. साथ ही इसकी कम्युनिकेशन स्पीड एक से पांच मिलीसेकंड के बीच है, जिससे रियल टाइम में तुरंत अलर्ट मिल जाता है. इसका मतलब है कि ड्राइवर को खतरे की जानकारी बहुत तेजी से मिलती है, जिससे समय रहते ब्रेक या स्टेयरिंग कंट्रोल किया जा सकता है और एक्सीडेंट टाला जा सकता है. कैमरा नहीं, सीधे डिवाइस से कनेक्शनआमतौर पर ब्लाइंड स्पॉट या प्रॉक्सिमिटी सिस्टम कैमरा, रडार या किसी फिक्स्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहते हैं. लेकिन Vision Pulse अलग तरीके से काम करता है. यह सीधे आसपास मौजूद UWB डिवाइस से कनेक्ट हो जाता है. गाड़ियों में लगे UWB मॉड्यूल सिग्नल भेजते हैं. अगर आसपास की दूसरी गाड़ियों, साइकिल, पैदल चलने वाले या किसी व्यक्ति के स्मार्टफोन, वियरेबल या ट्रैकर में भी UWB मॉड्यूल मौजूद है, तो सिस्टम सिग्नल के समय को मापकर उनकी सटीक लोकेशन पता कर लेता है. जब संभावित टक्कर का खतरा दिखता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे दुर्घटना की संभावना काफी कम हो जाती है. तेज रफ्तार ऑब्जेक्ट्स भी होंगे ट्रैककंपनियों का कहना है कि Vision Pulse एक साथ कई तेज रफ्तार ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक कर सकता है. इसके लिए खास एल्गोरिद्म तैयार किए गए हैं, जो गाड़ी के आसपास तेजी से चल रही चीजों की पोजिशन का सही अनुमान लगाते हैं. इससे भीड़भाड़ वाले चौराहों, खराब मौसम या रात में भी सिस्टम बेहतर परफॉर्मेंस देता है, जहां सामान्य कैमरे अक्सर फेल हो जाते हैं. कम लागत और ज्यादा फायदाइस सिस्टम का एक बड़ा फायदा इसकी कम लागत और आसान इस्तेमाल है. Hyundai और Kia की कुछ गाड़ियों में पहले से ही Digital Key 2 के जरिए UWB हार्डवेयर मौजूद है. यह वही फीचर है जिससे स्मार्टफोन से कार को लॉक, अनलॉक और स्टार्ट किया जा सकता है. इसी वजह से इस टेक्नोलॉजी को बिना अतिरिक्त सेंसर लगाए भी एक्टिव किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि इससे महंगे LiDAR और रडार जैसे सेंसर पर निर्भरता कम होती है. साथ ही UWB सिग्नल अन्य वायरलेस सिग्नल से कम प्रभावित होते हैं. कार से बाहर भी होगा इस्तेमालHyundai और Kia का मानना है कि Vision Pulse सिर्फ ड्राइवर असिस्टेंस तक सीमित नहीं रहेगा. इसे इंडस्ट्रियल एरिया जैसे वेयरहाउस में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां फोर्कलिफ्ट और वर्कर्स के बीच टक्कर का खतरा रहता है. इसके अलावा आपदा या रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने में भी यह मददगार हो सकता है. कंपनियों ने इस टेक्नोलॉजी की लाइव टेस्टिंग शुरू कर दी है और भविष्य में बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल करने की योजना है.
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Feb 2, 2026, 03:27 AM
बैंक सौदों के साथ आईफ़ोन 16 पर 7,000 रुपये तक की छूट दे रहा है फ़्लिपकार्ट

बैंक सौदों के साथ आईफ़ोन 16 पर 7,000 रुपये तक की छूट दे रहा है फ़्लिपकार्ट

टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली।अगर आप भी काफी वक्त से एक नया आईफोन सस्ते में खरीदने की सोच रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। इस वक्त ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट iPhone 16 पर जबरदस्त डील दे रहा है जहां बैंक ऑफर्स के साथ इस डिवाइस पर 7000 रुपये तक का डिस्काउंट देखने को मिल रहा है। इस डिवाइस की कीमत वैसे तो 69,900 रुपये से शुरू होती है लेकिन अभी बैंक ऑफर्स के बाद इस डिवाइस की कीमत काफी कम हो गई है।
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Feb 2, 2026, 03:07 AM
भारत ने 2283 करोड़ रुपये के बजट में वृद्धि के साथ रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा दिया

भारत ने 2283 करोड़ रुपये के बजट में वृद्धि के साथ रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा दिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा संगठन डीआरडीओ के सालाना बजट में 2283 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी करने का एलान किया है। सालाना बजट बढ़ने से रक्षा उत्पादों के निर्माण, तकनीक और शोध में विकास होगा। इसका सीधा असर कानपुर स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) को भी मिलेगा। डीएमएसआरडीई तीनों सेनाओं के लिए जरूरी रक्षा उत्पादों के प्रोटोटाइप तैयार करने के साथ-साथ तकनीक और जरूरी सुविधाओं को विकसित करने के लिए नई खोज और शोध करता है। बजट बढ़ने से रक्षा अनुसंधान में तेजी आएगी। डीएमएसआरडीई ने देश के सबसे सशक्त ब्रह्मोस मिसाइल के स्वेदशी रैमजेट ईंधन को विकसित किया है। अभी तक यह नेफथाइल ईंधन अमेरिका समेत दूसरे देशों से आयात करना पड़ता था। डीएमएसआरडीई की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा लेवल-छह श्रेणी की देश की सबसे हल्की बुलेटफ्रूफ जैकेट भी बनाई है। बैलेस्टिक हेलमेट, ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट और एंटी माइन बूट, न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल खतरों से सुरक्षा देने के लिए एनबीसी सूट सशस्त्र बलों के लिए बनाया है। नेवी के लिए समुद्री खारे पानी को मीठे पानी में बदलने वाली पॉलीमर मेंब्रेन भी विकसित की है। कानपुर स्थित एचएएल और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को विमान, रक्षा एयरक्राफ्ट और कलपुर्जों को विदेशों से मंगवाने पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) में छूट का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा असर स्वेदश में तैयार होने वाले विमानों, उनकी मरम्मत और रक्षा उपकरणों की ओवरहॉलिंग में लागत और खर्च पर पड़ेगा। एचएएल कानपुर में विमानों की मरम्मत होती है और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में तोपों समेत रक्षा हथियारों और उत्पादों की ओवरहॉलिंग होती है, जिसमें आने वाला खर्च कम होगा। एयरक्राफ्ट, विमान, रक्षा उपकरणों के कलपुर्जों को मंगवाने पर कस्टम ड्यूटी में कमी का फायदा रक्षा प्रतिष्ठानों को मिलेगा। मेंटेनेंस,ओवरहॉलिंग के काम में लागत कम होने का फायदा निर्माणियों को मिलेगा।
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